‘बचपन में चाय तो बेची ही, संघ के ऑफिस में बर्तन भी धुले’

नई दिल्ली (ब्यूरो रिपोर्ट) : ‘Humans of Bombay’ नाम के फेसबुक पेज पर शेयर किए एक साक्षात्कार में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बचपन की यादें शेयर की हैं. उन्होंने बताया, “मुझे याद है जब पहली बार मैं अहमदाबाद आया था. यहां पर मैंने अपने चाचा की एक कैंटीन में काम शुरू किया. यही से मेरी जिंदगी को नहीं राह मिली. चाचा की मदद करते हुए मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा और एक पूर्णकालीन प्रचारक बन गया. यहां पर मुझे अलग-अलग तरह के लोगों के साथ बातचीत करने और उनके साथ काम करने का अवसर मिला. हम सभी लोग आरएसएस के कार्यालय को साफ करते थे और चाय बनाते थे. हमने आरएसएस कार्यालय में बर्तन भी धुले.”

कई भाग में आ रहे इस साक्षात्कार में मोदी ने अपने बचपन की यादें शेयर करते हुए बताया कि कैसे वह अपने गांव से अहमदाबाद आ गए और उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ जुड़ने का मौका मिला. मोदी ने कहा कि वे जीवन में इतने व्यस्त थे, लेकिन उन्होंने हिमालय पर मिलने वाली शांति को कभी भी अपने से दूर नहीं जाने का दृढ़ संकल्प लिया था. जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए उन्होंने पांच दिन हिमालय में बताने का फैसला लिया है और वह इसके लिए खुद खर्च करेंगे.

इसके पूर्व मोदी ने बताया था, “मेरे परिवार के आठ लोग 40X12 के कमरे में रहते थे. यह छोटा सा घर था, पर हमारे परिवार के लिए पर्याप्तन था. हमारे दिन की शुरुआत सुबह पांच बजे हो जाती थी. मेरी मां पढ़ी-लिखी नहीं थी पर भगवान की कृपा से उनके पास एक खास तरह का ज्ञान था. वह नवजात शिशुओं की हर तकलीफ को तुरंत समझ जाती थीं. मां के उठने से पहले महिलाएं अपने शिशुओं को लेकर घर के बाहर लाइन लगाकर खड़ी रहती थीं.”

मोदी ने बताया कि जब वह छोटे थे तब उन्हें हिंदी आती ही नहीं थी. वह रोज पिता के साथ सुबह चाय की दुकान खोला करते थे. दुकान की साफ-सफाई की जिम्मेंदारी उनके ऊपर थी. कुछ देर में ही लोगों का आना शुरू हो जाता था. पिता जब उन्हें चाय देने को बोलते तो वह लोगों की बात सुना करते थे. धीरे-धीरे उन्हें हिंदी बोलना आ गया.

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