बनारस में बड़े अंतर से जीते मोदी लेकिन हार गए आसपास की महत्वपूर्ण सीटें

2014 में आजमगढ़ सीट को छोड़कर पूर्वांचल की 26 लोकसभा सीटों पर बीजेपी ने मोदी लहर में जीत दर्ज की थी. लेकिन अब जब कहा जा रहा है कि 2019 में मोदी लहर सुनामी में तब्दील हो गई तब बीजेपी की पकड़ पूर्वांचल में ढीली पड़ गई. प्रधानमंत्री मोदी की संसदीय सीट के आसपास गठबंधन मोदी मैजिक पर भारी पड़ा.

साल 2014 में नरेंद्र मोदी गुजरात के वड़ोदरा और उत्तर प्रदेश के वाराणसी संसदीय सीट से चुनाव लड़े. दोनों सीटों पर उन्हें बड़े अतंर से जीत मिली. नरेंद्र मोदी ने वड़ोदरा सीट को छोड़ वाराणसी सीट पर बने रहने का रणनीतिक फैसला किया क्योंकि कहा जाता है कि प्रधानमंत्री बनने का रास्ता यूपी से होकर जाता है. 2014 में वाराणसी से चुनाव लड़ने की वजह से पूर्वांचल की 26 सीटों में से 25 पर बीजेपी ने जीत हासिल की.

इस बार मोदी वाराणसी सीट से और भी बड़े अंतर से जीते तो लेकिन पूर्वांचल की 4 महत्वपूर्ण सीटें आजमगढ़, गाजीपुर, घोसी और जौनपुर हार बैठे. इन सीटों पर मोदी की सुनामी का असर नहीं पड़ा और सपा-बसपा गठबंधन ने इस सीट पर जीत हासिल कर ली.

आजमगढ़ सीट को छोड़कर पूर्वांचल की अन्य सभी लोकसभा सीटों पर बीजेपी ने मोदी लहर में जीत दर्ज की थी. लेकिन अब जब कहा जा रहा है कि 2019 में मोदी लहर सुनामी में तब्दील हो गई, तब बीजेपी की पकड़ पूर्वांचल से ढीली पड़ गई. प्रधानमंत्री मोदी की संसदीय सीट के आसपास गठबंधन मोदी मैजिक पर भारी पड़ा.

किन सीटों पर मिली हार?

आजमगढ़

मोदी सुनामी होने का पार्टी की ओर से दावा किया जा रहा था. यह सुनामी आजमगढ़ संसदीय सीट पर बेअसर रही. सपा मुखिया और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुलायम सिंह की संसदीय सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया. उनका यह फैसला सही ठहरा. उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी दिनेश लाल यादव निरहुआ के खिलाफ जीत दर्ज की. अखिलेश यादव को कुल 6,21,578(60.4%) वोट पड़े, वहीं निरहुआ को 3,61,704(35%) मत पड़े. मोदी लहर में भी अखिलेश भारी अंतर से चुनाव जीतने में सफल हो गए.

गाजीपुर

गाजीपुर की सीट बीजेपी हार चुकी है. अफजाल अंसारी को 5,66,082 वोट मिले हैं वहीं मनोज सिन्हा को 4,46,690 वोट मिले हैं. इस सीट से 2014 में मनोज सिन्हा को जीत मिली थी. सपा-बसपा और रालोद गठबंधन के प्रत्याशी अफजाल अंसारी इस सीट से जीतने में कामयाब हो चुके हैं. मनोज सिन्हा केंद्रीय मंत्री भी हैं. मनोज सिन्हा ने सपा प्रत्याशी शिवकन्या कुशवाहा को 32,452 मतों के अंतर से हराया था. मनोज सिन्हा को 2014 के चुनाव में 3,06,929 वोट मिले जबकि दूसरे स्थान पर रही शिवकन्या को 2,74,477 (27.82 फीसदी) वोट हासिल हुए थे.

घोसी

घोसी लोकसभा सीट में भी सपा-बसपा गठबंधन ने सेंध मार ली. बसपा के अतुल कुमार सिंह को 5,73,829(50.3%) वोट मिले वहीं बीजेपी प्रत्याशी और मौजूदा सांसद हरिनारायण को कुल 4,51,261(39.56%) मत मिले. यह सीट कभी बीजेपी के खाते में नहीं रही. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पहली बार इस सीट से जीत हासिल की. बीजेपी की ओर से हरिनारायण राजभर ने बसपा के दारा सिंह चौहान को मात दी थी. हरिनारायण राजभर को इस सीट पर कुल 3,79797 वोट मिले थे वहीं बसपा के दारा सिंह को 2,33,782 वोट मिले थे. हरिनारायण ने यह चुनाव 1,46,015 मतों के अंतर से जीता था.

जौनपुर

पूर्वांचल की सबसे महत्वपूर्ण सीटों में से एक जौनपुर सीट पर भी मोदी सुनामी का असर नहीं पड़ा. इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी श्याम सिंह यादव को जीत मिली. जौनपुर सीट से श्याम सिंह यादव को 5,21,128 वोट मिला, वहीं बीजेपी के कृष्ण प्रताप सिंह को 4,40,192 मत पड़े. 2014 के मोदी लहर में बीजेपी ने इस सीट पर कब्जा किया था. बीजेपी के कृष्ण प्रताप सिंह ने बहुजन समाज पार्टी के सुभाष पांडे को 1,46,310 मतों के अंतर से हराया था. कृष्ण को 3,67,149 (36.45%) मत मिले जबकि सुभाष पांडे को 2,20,839 (21.93%) मत मिले थे. इस बार पार्टी की ओर से कहा जा रहा था कि मोदी लहर अब सुनामी में तब्दील हो चुकी है लेकिन यहां सुनामी गठबंधन की बांध के आगे बेबस नजर आई.

पूर्वांचल के अंतर्गत कुल 26 लोकसभा सीटें आती हैं. इन सीटों में कुशीनगर, गोरखपुर, देवरिया, बांसगांव, फैजाबाद, बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा, डुमरियागंज, महराजगंज, अंबेडकरनगर, बस्ती, संत कबीर नगर, आजमगढ़, घोसी, सलेमपुर, बलिया, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली, वारणसी, भदोही, मिर्जापुर, फूलपुर, इलाहाबाद और प्रतापगढ़ सीटें इसमें शामिल हैं.

मोदी सुनामी भी पूर्वांचल की 3 महत्वपूर्ण सीटें नहीं बचा सकी. सपा-बसपा गठबंधन इन सीटों पर मोदी लहर पर भारी पड़ा. बीजेपी भले ही सोच रही थी कि ये सभी सीटें बीजेपी के खाते में आएंगी क्योंकि पीएम मोदी की संसदीय सीट से इनकी नजदीकी है लेकिन गठबंधन फैक्टर के आगे मोदी मौजिक इन सीटों पर फीका पड़ता नजर आया.

2014 के चुनाव में बीजेपी के खाते में अकेले उत्तर प्रदेश से 71 सीटें आईं, 2 सीटें सहयोगी अपना दल को मिलीं. 2014 में मुरली मनोहर जोशी अपनी संसदीय सीट नरेंद्र मोदी के लिए खाली कर दी थी. भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) के शीर्ष नेतृत्व ने यह फैसला यूं ही नहीं किया था. मोदी लहर में पार्टी के नेताओं को भरोसा था कि अगर मोदी खुद पूर्वांचल के किसी सीट से चुनाव लड़ते हैं तो इससे इस क्षेत्र के आसपास की कई सीटें बीजेपी के खाते में आसानी से चली जाएंगी.

2014 में आजमगढ़ संसदीय सीट को छोड़ दिया जाए तो पूर्वांचल की सभी सीटों बीजेपी ने जीत दर्ज की थी. आजमगढ़ लोकसभा सीट से 2014 में उस समय के समाजवादी पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह चुनाव लड़े. उनके सामने बीजेपी के रमाकांत यादव चुनाव लड़े. मुलायम सिंह ने रमाकांत यादव को चुनाव तो हरा दिया लेकिन जीत का अंतर केवल 63,204 रख पाए. इसे मोदी लहर का असर भी कहा जा सकता था कि मुलायम सिंह जैसे दिग्गज नेता के जीत का अंतर इतना कम रहा हो. लेकिन इस बार अखिलेश यादव के आ जाने की वजह से बीजेपी के खिलाफ जीत का अंतर और ज्यादा बड़ा हो गया. मोदी की सुनामी में भी 3 सीटें गठबंधन छीनने में सफल हो गया.

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