संसद टीवी पर दिया गया गृह मंत्री अमित शाह का इंटरव्यू फकत ‘माेदी चालीसा’

संदीप ठाकुर

नरेंद्र मोदी के 7 अक्टूबर को पब्लिक ऑफिस में 20 साल पूरे करने के अवसर
पर संसद टीवी के साथ एक विशेष इंटरव्यू के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने
जिस श्रद्धा के साथ माेदी चालीसा पढ़ा उसी श्रद्धा के साथ इंटरव्यू करने
वाले वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह ने उसे सुना। पत्रकार के सवाल और उनकी
बॉडी लैंग्वेज साफ साफ बता रही थी कि सब कुछ पहले से तय था। यू ट्यूब पर
मौजूद इस इंटरव्यू पर जितनी प्रतिक्रिया है उनमें से अधिकांश देखने सुनने
वालों ने इस साक्षात्कार काे बकवास और बोरिंग करार दिया है। कमेंट करने
वालों में एक ने कहा है कि गृह मंत्री से सवाल करने के लिए साहसी पत्रकार
होना चाहिए था न कि पपेट (कठपुतली) पत्रकार,जिसने तोते की तरह रटे रटाए
सवाल पूछ सबका समय बर्बाद किया। कुछ लाेगाें ने टिप्पणी की कि इंटरव्यू
गृह मंत्री का, बातें प्रधानमंत्री के बारे में …संभवत: ऐसा पहली बार
हुआ है।

इंटरव्यू की शुरुआत प्रधानमंत्री माेदी का एक स्वयंसेवक से लेकर
प्रधानमंत्री तक के सफर के सवाल के साथ होती है। राजनीति में अमित शाह आए
ही थे 1987 में और माेदी भी इसी साल गुजरात भाजपा में संगठन मंत्री बने
थे। मंत्री ने बिना लाग लपेट के कहा कि माेदी से पहले भाजपा गुजरात में
कुछ भी नहीं थी। गुजरात में जो भी हुआ वह मोदी जी के बाद ही हुआ। चालीसा
सुनने के बाद पत्रकार ने दूसरा सवाल दागा कि देश में मीडिया और
बुद्धिजीवियों का एक वर्ग माेदी काे अधिनायकवादी या तानाशाह मानता है।
गृहमंत्री ने इसका खंडन करते हुए कहा कि बिल्कुल नहीं। यह विरोधियों का
कु-प्रचार मात्र है इस समय मोदी सरकार जितने लोकतांत्रिक ढंग से काम कर
रही है, अब तक किसी अन्य सरकार ने नहीं किया। मोदी सबकी बात बहुत धैर्य
से सुनते हैं। किसी भी मीटिंग में वे बाेलते बहुत कम हैं और सुनते अधिक
हैं। सवाल कर्ता तटस्थ भाव से जवाब सुनते रहे। कोई क्रॉस सवाल नहीं।
लेकिन तीन दशकों तक टेनिस की दुनिया में अपना दबदबा कायम रखने वाली मशहूर
टेनिस प्लेयर मार्टिना नवरातिलोवा ने अमित शाह की माेदी प्रशंसा काे एक “
चुटकुला ” करार देते हुए इसका जमकर मजाक उड़ाया है। मार्टिना नवरातिलोवा
ने अपने ट्विटर अकाउंट पर इस खबर को शेयर करते हुए लिखा है कि और यह मेरा
अगला जोक है। वैसे देखा जाए ताे इंदिरा गांधी के बाद माेदी दूसरे
प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने प्रधानमंत्री की ताकत को केंद्रीकृत किया और
अब इसे अपने हाथों में लेकर इस पर अमल कर रहे हैं। सबको पता है कि सरकार
के अंदर कोई भी राजनेता या नौकरशाह प्रधानमंत्री कार्यालय की हरी झंडी
मिले बिना कुछ भी नहीं कर सकता। और प्रधानमंत्री कार्यालय में इन दिनों
गुजरात कैडर के कुछ उन चुनिंदा अफसरों का दबदबा है जिन्होंने गुजरात में
भी मोदी के साथ काम किया है। आज किसी मंत्री की हिम्मत नहीं कि वह अपने
स्तर पर एक इंटरव्यू भी दे दे।

वैसे इस इंटरव्यू ने यह ताे साबित कर दिया कि नेताओं के साथ ऑफिसियल
बातचीत करने में पत्र व पत्रकार इस देश में स्वतंत्र नहीं हैं। किससे क्या पूछना है,कितना
पूछना है,बीच में टोका टोकी करना है या नहीं आदि सब पहले से तय होता है।
एक अन्य सवाल के जवाब में अमित शाह ने कहा कि मोदी जी जोखिम लेने में
हिचकते नहीं हैं। नोटबंदी , जीएसटी, अनुच्छेद 370 को निरस्त करना और तीन
तलाक पर प्रतिबंध लगाना पीएम मोदी के कुछ साहसिक फैसले हैं। इस साहसिक
फैसले से देश काे क्या हासिल हुआ,यह पूछने का साहस पत्रकार महोदय नहीं
जुटा पाए। मंत्री ने कहा कि गरीब के जीवन में विगत 70 साल में गुणात्मक
परिवर्तन कभी नहीं आया। परिवर्तन आया ताे माेदी जी के समय। गिना डाला
शौचालय निर्माण से लेकर उज्ज्वला योजना और गांव गांव में बिजली के खंभे
से लेकर घर घर बिजली। किसानाें काे जितना मोदी जी ने दिया उतना किसी ने
नहीं दिया। वरिष्ठ पत्रकार चुपचाप सुनते रहे। कुल मिला प्रधानमंत्री की
ऐसी तस्वीर पेश की गई कि माेदी से पहले न कुछ हुआ था और न आगे हाेगा।
अमित शाह ने ऐसे कई कदम गिनाए, जो मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री और भारत
के प्रधानमंत्री रहते हुए उठाए और उन अपूर्व कदमों से लोक-कल्याण संपन्न
हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *