इंटरनेट का ज्यादा उपयोग दिमाग के लिए नुकसानदेह, स्मरणशक्ति और एकाग्रता में कमी

  • इंटरनेट पर हमेशा आने वाले नोटिफिकेशन से एक काम पर ध्यान लगाए रखने की क्षमता प्रभावित होती है- रिपोर्ट
  • छोटे बच्चों (उम्र 2 से 5 साल) को प्रतिदिन एक घंटे से ज्यादा स्क्रीन के संपर्क में नहीं रहना चाहिए- डब्ल्यूएचओ

मेलबर्न. इंटरनेट के ज्यादा उपयोग से हमारे दिमाग में बदलाव आ सकता है। इससे ध्यान, स्मरणशक्ति और सामाजिक संपर्क प्रभावित हो सकता है। यह जानकारी ऑस्ट्रेलिया में हुए एक अध्ययन में सामने आई है। वर्ल्ड साइकाइट्री जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, इंटरनेट ज्ञान के विशिष्ट क्षेत्रों में तीव्र और दीर्घकालिक परिवर्तन कर सकता है।

ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड और अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने उन प्रमुख अवधारणाओं को परखा कि इंटरनेट कैसे संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं को बदल सकता है। यह शोध मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सा और न्यूरोइमेजिंग शोध के हालिया निष्कर्षों के आधार पर तैयार किया गया है।

दिमाग के कुछ हिस्से को प्रभावित करता है इंटरनेट

ऑस्ट्रेलिया की वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी के सीनियर रिसर्च फेलो जोसेफ फर्थ ने कहा कि इस रिपोर्ट में मुख्य रूप से यह बात सामने आई कि इंटरनेट के ज्यादा उपयोग से दिमाग के कई हिस्से प्रभावित हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, इंटरनेट से लगातार आने वाले नोटिफिकेशन और सूचनाएं हमारा ध्यान उस ओर लगाए रखने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे किसी एक काम पर ध्यान लगाए रखने की क्षमता प्रभावित होती है।

रिपोर्ट में यह भी दिखाया गया है कि इंटरनेट दिमाग की संरचना, कार्य और संज्ञानात्मक विकास को कैसे प्रभावित कर सकता है। हाल के समय में सोशल मीडिया के साथ-साथ इन ऑनलाइन तकनीकों का व्यापक रूप से अपनाया जाना शिक्षकों और अभिभावकों के लिए भी चिंता का विषय है।

डब्ल्यूएचओ ने दी थी चेतावनी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 2018 में कहा था कि छोटे बच्चों (2-5 वर्ष की आयु) को प्रतिदिन एक घंटे से ज्यादा स्क्रीन के संपर्क में नहीं रहना चाहिए। इस रिपोर्ट में सामने आया कि मस्तिष्क पर इंटरनेट के प्रभावों की जांच करने वाले अधिकांश शोध वयस्कों पर किए गए हैं। इस वजह से युवाओं में इंटरनेट के उपयोग से होने वाले फायदे और नुकसान को निर्धारित करने के लिए अधिक शोध की आवश्यकता है।

बच्चों को डिजिटल डिवाइस से दूर रखने की जरूरत

रिसर्च फेलो जोसेफ फर्थ ने कहा कि बच्चों को इंटरनेट के नकारात्मक प्रभावों से बचाने के लिए शोध की जरूरत है। अभिभावकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके बच्चे डिजिटल डिवाइस पर ज्यादा समय तो नहीं बिता रहे हैं। माता-पिता बच्चों की शारीरिक गतिविधियों पर ज्यादा ध्यान दें।

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