ईस्टर हमले से उबर रहे श्रीलंका में सैलानियों के लिए बड़ा ऑफर, घूमने का मौका

श्रीलंका में हुए सीरियल बम धमाकों ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था. श्रीलंका में 21 अप्रैल को  गिरजाघरों और  लग्जरी होटलों में आत्मघाती हमले हुए थे. इन हमलों में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और 500 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे. हमलों के बाद श्रीलंका का पर्यटन उद्योग प्रभावित हुआ था.

श्रीलंका का पर्यटन उद्योग एक बार फिर स्थापित होने की कोशिश कर रहा है. विदेशी पर्यटकों को रिझाने के लिए अब स्थानीय होटलों ने अब पर्यटकों के लिए होटल के किराए में कटौती करनी शुरू कर दी है. श्रीलंका के सकल घरेलू उत्पाद का 5 फीसदी हिस्सा पर्यटन से आता है. श्रीलंका ने पर्यटन के प्रचार करने के लिए रूस जैसे बड़े बाजारों को चुना है.

श्रीलंका में 21 अप्रैल को ईस्टर के मौके पर तीन गिरजाघरों और तीन लग्जरी होटलों में आत्मघाती हमले हुए थे. इन हमलों में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और 500 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे. इस हमले की जिम्मेदीरी आईएसआईएस ने ली थी. इसके बाद ही श्रीलंका का पर्यटन उद्योग थम सा गया था.

इग्लैंड, भारत और अमेरिका जैसे देशों ने श्रीलंका जाने वाले यात्रियों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की थी. श्रीलंका दुनिया के सबसे खूबसूरत और विविधतापूर्ण द्वीपों में से एक है. श्रीलंका अपने खूबसूरत समुद्र तट, बीच, पुराने बौद्ध मंदिरों के लिए जाना जाता है.

पर्यटकों को श्रीलंका दोबारा खींचने के लिए कई इंटरनेशनल स्पोर्टिंग इवेंट्स आयोजित कर रहा है, वहीं स्थानीय होटलों के लिए न्यूनतम रेट का नियम को स्थगित किया गया है. अब होटल की दरें 50 फीसदी तक रणनीति के तहत कम की जा रही हैं.

राज्य के स्वामित्व वाली श्रीलंकन एयरलाइंस पर्यटकों के लिए विशेष फेयर की सुविधा दे रही है. वहीं श्रीलंका के सरकारी टूरिज्म बोर्ड भी पर्यटन के प्रयासरत है. श्रीलंका के कुछ होटल एयरपोर्ट से यात्रियों को होटल तक लाने के लिए फ्री पिकअप की सुविधा दे रहे हैं.

श्रींलका में सामान्य तौर पर 1,400 से 1,500 विदेशी पर्यटक इन दिनों आ रहे हैं. श्रीलंका टूरिज्म ब्यूरो के मुताबिक ईस्टर के मौके पर हुए हमलों के तत्काल बाद 1,000 लोग श्रीलंका आए थे. ये आंकड़े पिछले साल के आंकड़ों से 4,500 कम है. वहीं भारत और चीन जैसे देशों ने अब श्रीलंका पर जारी की गई ट्रैवेल एडवाइडरी वापस ले ली है.

पर्यटन ब्यूरो का कहना है कि हमारा उद्योग जल्द ही पटरी पर लैटेगा लेकिन कितना वक्त इसमें लगेगा, यह कहना मुश्किल है.

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