उत्तराखंड में बारिश का कहर, ऋषिकेश में खतरे के निशान के करीब गंगा

गंगा के किनारे बसे गांवों में दहशत का माहौल है. मौसम विभाग ने उत्तराखंड में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट पहले ही जारी कर दिया है

उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के कारण गंगा नदी का जलस्तर बढ़ गया है. ऋषिकेश में गंगा नदी खतरे के निशान के पास 338.05 मीटर पर बह रही है. गंगा के किनारे बसे गांवों में दहशत का माहौल है. बता दें, मौसम विभाग ने उत्तराखंड में बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया था. इसके बाद से ही पूरे उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश हो रही है.

उत्तराखंड में पहाड़ों से लेकर मैदान तक पानी ही पानी दिखाई दे रहा है. बीती रात से राजधानी देहरादून में लगातार बारिश हो रही है जिसके चलते सड़कों से लेकर गली मोहल्लों में जबदस्त जल जमाव हो रहा है. सड़कें जलमग्न हो चुकी हैं. इससे लोगों को आवाजाही में भी खासी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं.

दो दिन से लगातार हो रही बारिश ने उत्तराखंड के लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं. सड़कों पर दरिया बह रहा है तो गली मोहल्ले जलमग्न हैं. सड़कों पर जमा पानी घरों में घुसने लगा है. रात से हो रही मूसलाधार बारिश ने पूरे शहर में ऐसा जलभराव किया कि सड़कें जाम हो गईं. पानी घरों के आंगन तक में पहुंच गया तो नदियां नाले उफान मारने लगे हैं. आम तौर पर शांत और सूखी रहने वाली रिस्पना अपने उफान पर है. लोग नदियों और नालों से डरे हुए हैं तो वहीं पुलिस ने भी नदियों और नालों के पास रहने वालों को वहां से दूर चले जाने के साथ सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं. मौसम विभाग ने अभी एक हफ्ते की भारी बारिश रहने की चेतावनी दी है. इससे साफ है कि उत्तराखंड में अभी कुछ दिन और मुसीबत की बारिश होने वाली है.

जलभराव पर नगर निगम हर साल की तरह इस बार भी अपना वही राग अलाप रही है. देहरादून के मेयर का कहना है कि अधिकतर नाले मई माह में ही साफ कर दिए गए हैं जिसके लिए बाहर से लोग बुलाए गए. कुछ जगहों पर काम चल रहा है और कहीं से अगर समस्या आती है तो उसके लिए टीम समय समय पर अपना काम करती रहती है.

नगर प्रशाशन हर बार की तरह इस बार भी दावे कर रहा है लेकिन पहली बारिश ने ही उनके दावों की हवा निकाल दी है. मौसम विभाग ने अभी एक सप्ताह पूरे प्रदेश में भारी बारिश की आशंका जताई है. ऐसे में आने वाले दिन राजधानी के लोगों के लिए आसान नहीं होने वाले हैं. हालांकि प्रशासन की ओर से लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है. खासतौर पर नदी नालों के किनारे रहने वाले लोगों के लिए सुरक्षित स्थानों पर रहने का निर्देश दिया गया है.

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