झुकता है नेता झुकाने वाला चाहिए

संदीप ठाकुर

ऐसी धारणा बना दी गई है कि केंद्र सरकार यानी मोदी सरकार एक बार जो फैसले
कर लेती है,फिर उसे वापस नहीं लेती। मोदी समर्थक आप को कहते हुए मिल
जाएंगे कि मोदी है ताे मुमकिन है। फैसला वापस नहीं हाेगा। वगैरह वगैरह..।
लेकिन यह सच नहीं है। सरकार किसी की हो। नेता कोई भी हाे। वह झुकता ही
नहीं बल्कि गिड़गिड़ाता भी है ,बस चुनाव आने चाहिए। चुनाव के समय नेताओं
की सारी हेकड़ी घरी की घरी रह जाती है। नेता पांच साल तक क्षेत्र में नजर
न आए लेकिन चुनाव से ऐन पहले वह इलाके में दिखने लगता है। आने वाले
महीनों में उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव हैं।
पिछले दो महीने में भारत की सरकार चार बार झुकी है। उसने
किसानों,डॉक्टर्स,व्यापारियाें के संस्थागत विरोध के आगे चार बार सरेंडर
करते हुए इस उक्ति को चरितार्थ कर दिया है कि झुकती है दुनिया, झुकाने
वाला चाहिए।

किसान आंदाेलन। देश में चला सबसे लंबा आंदाेलन। किसान एक साल से भी अधिक
समय तक दिल्ली की सभी सीमाओं पर जाड़ा,गर्मी,बरसात डटे रहे। केंद्र सरकार
ने मनमाने तरीके से तीन कृषि कानून पास कराए थे और उसे लागू करने पर अड़
गई थी। पंजाब के किसानों ने इसका विरोध शुरू किया और देखते ही देखते
आंदोलन देश की राजधानी दिल्ली तक आ पहुंचा। किसानों ने चारों तरफ से
दिल्ली काे घेर लिया। आने जाने के रास्ते बंद कर दिए। सरकार अड़ी रही।
दूसरी ओर किसान भी इसके विरोध में एक साल तक आंदोलन पर बैठे रहे। इस बीच
पांच राज्यों के चुनाव आ गए। फिर क्या था। 56 इंच सीने वाली सरकार के
पसीने छूटने लगे और नतीजा यह हुआ है कि सरकार को तीनों कानून वापस लेने
पड़े। गोदी मीडिया ने इस के लिए सरकार को बचाने और किसानों को ही कटघरे
में खड़ा करने की कोशिश की। लेकिन चुनाव निकट हैं। इसलिए मीडिया और
सरकार दोनों ने चुप्पी साधने में ही अपनी भलाई समझी। यह मोदी सरकार की
पहली बड़ी हार है। इसके बाद से केंद्र सरकार कई मामलों में कई बार झुकी।
झुकने का सिलसिला आज भी जारी है।

दूसरा मामला मदर टेरेसा की मिशनरीज ऑफ चैरिटी का विदेशी चंदा लेने वाले
एफसीआरए लाइसेंस का है। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने मदर टेरेसा की
इस संस्था का एफसीआरए लाइसेंस रिन्यू नहीं किया था। मंत्रालय की ओर से
कहा गया था कि उसके आवेदन की जांच के दौरान ‘एडवर्स इनपुट’ मिला था,
जिसकी वजह से लाइसेंस रिन्यू नहीं किया गया। इसका लाइसेंस गत वर्ष 31
दिसंबर को खत्म हो गया था। सरकार ने बताया नहीं कि क्या ‘एडवर्स इनपुट’
मिला था। लेकिन जब देश में और देश के बाहर विरोध शुरू हुआ, ओडिशा के
मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने आगे बढ़ कर मिशनरीज ऑफ चैरिटी को अपना काम
जारी रखने के लिए लाखों रुपए की मदद दी, तो मोदी सरकार पीछे हट गई और
लाइसेंस रिन्यू कर दिया। लाइसेंस रिन्यू तो कर दिया लेकिन आज तक यह नहीं
बताया कि ‘एडवर्स इनपुट’ का क्या हुआ। ‘एडवर्स इनपुट कैसे पॉजिटिव इनपुट
में बदल गया ?

कुछ समय पहले दिल्ली के डॉक्टरों ने हड़ताल करके नीट-पीजी की काउंसिलिंग
के मामले में सरकार से सरेंडर कराया। केंद्र सरकार ने पिछले साल 26 नवंबर
को सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि जब तक ओबीसी आरक्षण और ईडब्ल्यूएस आरक्षण
के लिए आय की सीमा का मामला नहीं निपट जाता है तब तक काउंसलिंग पर रोक
लगनी चाहिए। लेकिन जब दिल्ली के डॉक्टरों ने हड़ताल शुरू किया और टकराव
बढ़ा तो केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि देशहित में काउंसिलिंग
जल्दी होनी चाहिए। सो, अब 12 जनवरी से काउंसलिंग होने जा रही है। सरकार
के इस आश्वासन पर डॉक्टरों ने अपना आंदोलन वापस लिया। देश भर के कपड़ा
व्यापारियों ने सरकार को फैसला स्थगित करने पर मजबूर किया। सरकार ने
कपड़े के ऊपर जीएसटी को पांच से बढ़ाकर 12 फीसदी कर दिया था। एक जनवरी से
यह लागू होने वाला था लेकिन उससे पहले देश भर के कपड़ा व्यापारियों ने
प्रदर्शन शुरू कर दिया। आसन्न चुनाव और व्यापारियों में बढ़ते राेष काे
देखते हुए सरकार ने एक जनवरी को ही जीएसटी काउंसिल की आपात बैठक बुला कर
जीएसटी बढ़ाने का फैसला टाल दिया।

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