<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>पंजाब Archives - Ravivar Delhi</title>
	<atom:link href="https://ravivardelhi.com/category/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af/%e0%a4%aa%e0%a4%82%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%ac/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://ravivardelhi.com/category/राज्य/पंजाब/</link>
	<description>National Hindi Newspaper &#38; Magazine</description>
	<lastBuildDate>Thu, 09 Jul 2026 13:11:03 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.7.5</generator>

<image>
	<url>https://ravivardelhi.com/wp-content/uploads/2024/04/cropped-ravivar-logo1-32x32.jpg</url>
	<title>पंजाब Archives - Ravivar Delhi</title>
	<link>https://ravivardelhi.com/category/राज्य/पंजाब/</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>सरहद पार की साज़िश और आंतरिक सुरक्षा की नई चुनौतियाँ</title>
		<link>https://ravivardelhi.com/cross-border-conspiracies-and-new-challenges-to-internal-security/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ravivar Delhi]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Jul 2026 20:09:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आलेख]]></category>
		<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Cross-border conspiracies and new challenges to internal security]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://ravivardelhi.com/?p=78047</guid>

					<description><![CDATA[<p>अशोक भाटिया आज की ताजा खबर है कि चंडीगढ़ पुलिस ने सेक्टर-11 के एक दवा स्टोर के कैशियर जानकी दास की हत्या की जांच के दौरान पाकिस्तान समर्थित आईएसआई के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नार्को-टेरर और फेक करेंसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पंजाब के सीमावर्ती जिलों (तरनतारन और अमृतसर) में छापेमारी कर इस &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://ravivardelhi.com/cross-border-conspiracies-and-new-challenges-to-internal-security/">सरहद पार की साज़िश और आंतरिक सुरक्षा की नई चुनौतियाँ</a> appeared first on <a href="https://ravivardelhi.com">Ravivar Delhi</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>अशोक भाटिया</strong></p>



<p>आज की ताजा खबर है कि चंडीगढ़ पुलिस ने सेक्टर-11 के एक दवा स्टोर के कैशियर जानकी दास की हत्या की जांच के दौरान पाकिस्तान समर्थित आईएसआई के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नार्को-टेरर और फेक करेंसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पंजाब के सीमावर्ती जिलों (तरनतारन और अमृतसर) में छापेमारी कर इस सिंडिकेट से जुड़े तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है।</p>



<p>दरअसल अक्सर जो अपराध सतही तौर पर स्थानीय रंजिश या लूटपाट की आम घटना दिखाई देते हैं, उनकी जड़ें देश की सीमाओं के पार तक फैली होती हैं। चंडीगढ़ के सेक्टर-11 में एक दवा स्टोर के कैशियर (जानकी दास) की नृशंस हत्या की जांच के दौरान चंडीगढ़ पुलिस ने जिस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, वह इसी कड़वी हकीकत की तस्दीक करता है। इस हत्याकांड के सुरागों का पीछा करते हुए क्राइम ब्रांच जब पंजाब के सीमावर्ती जिलों—तरनतारन और अमृतसर—तक पहुँची, तो एक ऐसा खौफनाक मंज़र सामने आया जिसने देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है।यह केवल एक साधारण आपराधिक गिरोह नहीं था, बल्कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा पोषित एक बड़ा &#8216;नार्को-टेरर&#8217; (मादक पदार्थ-आतंकवाद) और जाली नोटों का नेटवर्क था। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में मेथामफेटामाइन (नशीला पदार्थ), ₹8 लाख के नकली नोट, और अवैध हथियार बरामद होना यह साबित करता है कि भारत के खिलाफ सीमा पार से जारी &#8216;प्रॉक्सी वॉर&#8217; (छद्म युद्ध) ने अब नया और अधिक घातक रूप अख्तियार कर लिया है।</p>



<p>देखने वाली बात यह है कि पिछले कुछ दशकों में आतंकवाद का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। अब यह केवल बंदूकों और बमों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे &#8216;हाइब्रिड वॉरफेयर&#8217; के रूप में लड़ा जा रहा है। नार्को-टेररिज्म इस रणनीति का सबसे खतरनाक हथियार है।इसके तहत एक तरफ सीमा पार से ड्रग्स भेजकर भारत की युवा पीढ़ी को शारीरिक और मानसिक रूप से खोखला किया जाता है, तो दूसरी तरफ उसी ड्रग्स की बिक्री से मिलने वाले काले धन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों, हथियारों की खरीद और स्लीपर सेल्स को फंडिंग देने के लिए किया जाता है।इस विशिष्ट मामले में नशीले पदार्थों के साथ &#8216;फेक इंडियन करेंसी नोट&#8217; (FICN) की बरामदगी यह दर्शाती है कि दुश्मन देश भारत की आर्थिक संप्रभुता पर भी समानांतर प्रहार कर रहा है। बाजार में नकली नोटों को खपाकर भारतीय मुद्रा की साख को कमजोर करने और महंगाई व अस्थिरता पैदा करने की यह एक सोची-समझी साज़िश है।</p>



<p>चंडीगढ़ पुलिस की जांच में जो सबसे चिंताजनक पहलू सामने आया है, वह है इस नेटवर्क द्वारा सीमा पार से तस्करी के लिए ड्रोन तकनीक का धड़ल्ले से इस्तेमाल। पंजाब की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि कटीले तारों और चौसीस घंटे की बीएसएफ (BSF) की चौकसी के बावजूद, आसमान के रास्ते को पूरी तरह सील करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। पाकिस्तान में बैठे आका रात के अंधेरे में आधुनिक, कम आवाज वाले ड्रोनों के जरिए जीपीएस कोऑर्डिनेट्स का उपयोग कर हेरोइन, मेथामफेटामाइन और जाली नोटों के पैकेट भारतीय सीमा के भीतर गिरा देते हैं।स्थानीय स्तर पर &#8216;ड्रॉप&#8217; उठाने वाले कूरियर सुरक्षा एजेंसियों के रडार से बचने के लिए अत्यधिक एनक्रिप्टेड डिजिटल मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं। इस केस में गिरफ्तार आरोपी—गुरमीत सिंह उर्फ बादशाह, आकाश कुमार और सचिन सिलवेस्टर—इसी कॉपरेटिव नेटवर्क के प्यादे थे, जो तकनीक के सहारे देश विरोधी ताकतों के एजेंडे को जमीन पर उतार रहे थे।</p>



<p>इस पूरे खुलासे का सबसे स्याह और डरावना पहलू यह है कि इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार या रणनीतिकार कोई बाहर घूम रहा अपराधी नहीं, बल्कि जेल की सलाखों के पीछे बंद गैंगस्टर धर्मिंदर सिंह उर्फ गोली है। यह घटना भारतीय कारागारों की सुरक्षा और प्रबंधन पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।एक खूंखार अपराधी जेल के भीतर बैठकर मोबाइल फोन, इंटरनेट और एनक्रिप्टेड ऐप्स के जरिए पाकिस्तान में आईएसआई के हैंडलर्स और बाहर जमीन पर सक्रिय अपने गुर्गों के बीच पुल का काम कर रहा था।जेलों का &#8216;क्राइम हब&#8217; में बदल जाना यह दिखाता है कि तकनीक के इस दौर में हमारे जेल प्रशासन के पास या तो आधुनिक जैमर्स और सर्विलांस उपकरणों की कमी है, या फिर भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि देश की सुरक्षा दांव पर लगा दी जाती है। जब तक जेलों से गैंगस्टरों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त नहीं किया जाएगा, तब तक बाहर सड़क पर पुलिस की हर कामयाबी अधूरी रहेगी।</p>



<p>गौरतलब है कि पंजाब ने अस्सी और नब्बे के दशक में उग्रवाद का एक लंबा और काला दौर देखा है। बड़ी कुर्बानियों के बाद वहां शांति बहाल हुई थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से &#8216;उड़ता पंजाब&#8217; की जो छवि बनी है, वह इसी नार्को-टेरर का परिणाम है।चंडीगढ़ पुलिस द्वारा इन सीमावर्ती जिलों में की गई छापेमारी बताती है कि इन क्षेत्रों में इस नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं। बेरोजगार युवाओं को पैसों का लालच देकर इस दलदल में धकेला जा रहा है।आज का सबसे बड़ा खतरा यह है कि स्थानीय अपराधियों और वैचारिक रूप से प्रेरित आतंकवादियों के बीच की लकीर मिट चुकी है। अपराधी अब केवल फिरौती या डकैती नहीं कर रहे, बल्कि वे विदेशी ताकतों के हाथों के खिलौने बनकर देश के खिलाफ देशद्रोह के मामलों में सीधे शामिल हो रहे हैं।</p>



<p>इस पूरे घटनाक्रम में चंडीगढ़ पुलिस की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही है। एक स्थानीय हत्या के मामले को केवल एक &#8216;ब्लाइंड मर्डर&#8217; मानकर फाइल बंद करने के बजाय, पुलिस ने इसके पीछे छिपे वृहद पैटर्न को समझा। चंडीगढ़ जैसे केंद्र शासित प्रदेश की पुलिस ने पंजाब पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर त्वरित कार्रवाई की। आरोपियों के फोन रिकॉर्ड्स, वित्तीय लेनदेन और कॉल डेटा के विश्लेषण से ही इस सिंडिकेट का पर्दाफाश संभव हो सका। यह आधुनिक पुलिसिंग का एक बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे डेटा और तकनीक का सही इस्तेमाल कर बड़े से बड़े सिंडिकेट को तोड़ा जा सकता है।</p>



<p>इस खुलासे ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने कुछ अनिवार्य और कड़े कदम उठाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है:जैसे देश की सभी संवेदनशील जेलों में &#8216;आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस&#8217; आधारित सर्विलांस, आधुनिक 5G जैमर्स और नियमित औचक निरीक्षण अनिवार्य किए जाएं। जेल के भीतर मोबाइल का मिलना एक अक्षम्य राष्ट्रीय सुरक्षा अपराध माना जाना चाहिए।भारत-पाकिस्तान सीमा पर &#8216;एंटी-ड्रोन सिस्टम&#8217; और लेजर फेंसिंग को बड़े पैमाने पर तैनात करने की गति तेज करनी होगी, ताकि आसमान से होने वाली इस अवैध सप्लाई चेन को हवा में ही नष्ट किया जा सके।इस नार्को-टेरर नेटवर्क की कमर तब तक नहीं टूटेगी जब तक इनके वित्तीय साम्राज्य को नेस्तनाबूद नहीं किया जाता। ईडी और एनआईए जैसी केंद्रीय एजेंसियों को इस सिंडिकेट की संपत्तियों को कुर्क करना चाहिए और हवाला नेटवर्क को ध्वस्त करना चाहिए।ड्रग्स और आतंकवाद का कोई राज्य नहीं होता। इसके लिए पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ को मिलाकर एक संयुक्त, स्थायी &#8216;नार्को-टेरर इंटेलिजेंस ग्रिड&#8217; बनाने की जरूरत है, जहां रीयल-टाइम सूचनाएं साझा की जा सकें।</p>



<p>अब यह चंडीगढ़ पुलिस का यह खुलासा एक गंभीर चेतावनी है। यह हमें याद दिलाता है कि भारत के खिलाफ साजिश रचने वाली ताकतें कभी सोती नहीं हैं; वे लगातार अपनी रणनीतियां बदल रही हैं। सरहद पार बैठे आकाओं के मंसूबों को नाकाम करने के लिए हमारी सुरक्षा एजेंसियों को अपराधियों से दो कदम आगे रहना होगा।दवा स्टोर के कैशियर की जान तो वापस नहीं आ सकती, लेकिन उनकी मौत की जांच से जो सच बाहर आया है, उसने देश को एक बड़े खतरे के प्रति सचेत कर दिया है। अब समय आ गया है कि नार्को-आतंकवाद के खिलाफ &#8216;जीरो टॉलरेंस&#8217; की नीति को केवल बयानों में नहीं, बल्कि जमीन पर अत्यंत आक्रामकता के साथ लागू किया जाए। देश की संप्रभुता, युवाओं के भविष्य और हमारी आर्थिक स्थिरता की रक्षा के लिए इस पूरे नेटवर्क की जड़ों में तेजाब डालना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।</p>
<p><a class="a2a_button_whatsapp" href="https://www.addtoany.com/add_to/whatsapp?linkurl=https%3A%2F%2Fravivardelhi.com%2Fcross-border-conspiracies-and-new-challenges-to-internal-security%2F&amp;linkname=%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%A6%20%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%B6%20%E0%A4%94%E0%A4%B0%20%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%A8%E0%A4%88%20%E0%A4%9A%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A5%8C%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%81" title="WhatsApp" rel="nofollow noopener" target="_blank"></a><a class="a2a_button_facebook" href="https://www.addtoany.com/add_to/facebook?linkurl=https%3A%2F%2Fravivardelhi.com%2Fcross-border-conspiracies-and-new-challenges-to-internal-security%2F&amp;linkname=%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%A6%20%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%B6%20%E0%A4%94%E0%A4%B0%20%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%A8%E0%A4%88%20%E0%A4%9A%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A5%8C%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%81" title="Facebook" rel="nofollow noopener" target="_blank"></a><a class="a2a_button_twitter" href="https://www.addtoany.com/add_to/twitter?linkurl=https%3A%2F%2Fravivardelhi.com%2Fcross-border-conspiracies-and-new-challenges-to-internal-security%2F&amp;linkname=%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%A6%20%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%B6%20%E0%A4%94%E0%A4%B0%20%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%A8%E0%A4%88%20%E0%A4%9A%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A5%8C%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%81" title="Twitter" rel="nofollow noopener" target="_blank"></a><a class="a2a_button_email" href="https://www.addtoany.com/add_to/email?linkurl=https%3A%2F%2Fravivardelhi.com%2Fcross-border-conspiracies-and-new-challenges-to-internal-security%2F&amp;linkname=%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%A6%20%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%B6%20%E0%A4%94%E0%A4%B0%20%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%A8%E0%A4%88%20%E0%A4%9A%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A5%8C%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%81" title="Email" rel="nofollow noopener" target="_blank"></a><a class="a2a_button_linkedin" href="https://www.addtoany.com/add_to/linkedin?linkurl=https%3A%2F%2Fravivardelhi.com%2Fcross-border-conspiracies-and-new-challenges-to-internal-security%2F&amp;linkname=%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%A6%20%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%B6%20%E0%A4%94%E0%A4%B0%20%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%A8%E0%A4%88%20%E0%A4%9A%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A5%8C%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%81" title="LinkedIn" rel="nofollow noopener" target="_blank"></a><a class="a2a_dd addtoany_share_save addtoany_share" href="https://www.addtoany.com/share#url=https%3A%2F%2Fravivardelhi.com%2Fcross-border-conspiracies-and-new-challenges-to-internal-security%2F&#038;title=%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%A6%20%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%B6%20%E0%A4%94%E0%A4%B0%20%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%A8%E0%A4%88%20%E0%A4%9A%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A5%8C%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%81" data-a2a-url="https://ravivardelhi.com/cross-border-conspiracies-and-new-challenges-to-internal-security/" data-a2a-title="सरहद पार की साज़िश और आंतरिक सुरक्षा की नई चुनौतियाँ"></a></p><p>The post <a href="https://ravivardelhi.com/cross-border-conspiracies-and-new-challenges-to-internal-security/">सरहद पार की साज़िश और आंतरिक सुरक्षा की नई चुनौतियाँ</a> appeared first on <a href="https://ravivardelhi.com">Ravivar Delhi</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पंजाब के बड़े राजनैतिक दलों में अस्थिरता का दौर</title>
		<link>https://ravivardelhi.com/a-period-of-instability-among-major-political-parties-in-punjab/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ravivar Delhi]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Jul 2026 19:21:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आलेख]]></category>
		<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[A period of instability among major political parties in Punjab]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://ravivardelhi.com/?p=77717</guid>

					<description><![CDATA[<p>अजय कुमार पंजाब विधान सभा चुनाव की आहट ने प्रदेश का सियासी पारा काफी बढ़ा दिया है।एक तरफ सभी दल चुनाव की तैयारियों में लगे हैं तो दूसरी तरफ कुछ माह पूर्व आम आदमी पार्टी में टूट के बाद अब पंजाब कांग्रेस के नये अध्यक्ष के नाम की घोषणा के बाद जिस तरह से पार्टी &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://ravivardelhi.com/a-period-of-instability-among-major-political-parties-in-punjab/">पंजाब के बड़े राजनैतिक दलों में अस्थिरता का दौर</a> appeared first on <a href="https://ravivardelhi.com">Ravivar Delhi</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>अजय कुमार</strong></p>



<p>पंजाब विधान सभा चुनाव की आहट ने प्रदेश का सियासी पारा काफी बढ़ा दिया है।एक तरफ सभी दल चुनाव की तैयारियों में लगे हैं तो दूसरी तरफ कुछ माह पूर्व आम आदमी पार्टी में टूट के बाद अब पंजाब कांग्रेस के नये अध्यक्ष के नाम की घोषणा के बाद जिस तरह से पार्टी में कलह मची हुई है, वह कई सवाल खड़े कर रहा है,लेकिन यह सवाल किसी नीतिगत बहस या विकास के एजेंडे को लेकर नहीं, बल्कि दो प्रमुख दलों कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के भीतर मची भारी उथल-पुथल को लेकर है। राज्य की सत्ता की सीढ़ियां चढ़ने के लिए जहां कांग्रेस और आप को अपनी संगठनात्मक एकता प्रदर्शित करनी चाहिए थी, वहां ये दल अंदरूनी कलह, असंतोष और बगावत के भंवर में फंसते नजर आ रहे हैं। पंजाब की राजनीति के इतिहास में शायद ही ऐसा कोई दौर रहा हो, जहां प्रमुख विपक्षी दलों के भीतर इतना अधिक अविश्वास और बिखराव देखने को मिला हो, जैसा कि वर्तमान में दिखाई दे रहा है। कांग्रेस पार्टी के भीतर हालिया संगठनात्मक बदलावों ने आग में घी डालने का काम किया है। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीपीसीसी) के अध्यक्ष पद पर बरकरार रखने का आलाकमान का निर्णय पार्टी के एक बड़े धड़े को रास नहीं आया है। इस निर्णय से नाराज पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का मोरिंडा स्थित आवास पर किया गया शक्ति प्रदर्शन केवल एक विरोध नहीं, बल्कि पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुला विद्रोह है। चन्नी का यह कदम दर्शाता है कि कांग्रेस के भीतर सत्ता के अलग-अलग केंद्र बन चुके हैं, जो आपस में तालमेल बिठाने के बजाय एक-दूसरे को नीचा दिखाने में अधिक रुचि रखते हैं। जब एक पूर्व मुख्यमंत्री और दलित चेहरा माने जाने वाले नेता नेतृत्व के फैसलों पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाते हैं, तो इसका सीधा असर जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ता है। यह कलह ऐसे समय में सामने आई है जब पार्टी को एकजुट होकर चुनाव की रणनीति बनानी चाहिए थी, लेकिन अब नेतृत्व का पूरा ध्यान अपने ही नेताओं को मनाने और पार्टी में फूट को रोकने पर केंद्रित हो गया है।</p>



<p>इसी बीच, कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात ने पंजाब के सियासी गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। रंधावा ने इसे व्यक्तिगत या गैर-राजनीतिक मुलाकात करार दिया है, लेकिन राजनीति में गैर-राजनीतिक कुछ भी नहीं होता, विशेषकर चुनाव से ठीक पहले। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की ऐसी मेल-मुलाकातें अक्सर दल-बदल की पटकथा की ओर इशारा करती हैं। रंधावा का यह कदम न केवल पार्टी नेतृत्व के लिए एक संकेत है, बल्कि कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम और संदेह भी पैदा करता है। कांग्रेस पहले से ही पंजाब में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए जूझ रही है, और ऐसी घटनाओं से यह संदेश जा रहा है कि पार्टी के भीतर निष्ठा का संकट गहराता जा रहा है। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी की स्थिति भी इससे भिन्न नहीं है। कुछ माह पूर्व आम आदमी पार्टी के भीतर जो बिखराव देखने को मिला, वह पार्टी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा सहित आठ सांसदों का भाजपा में शामिल होना न केवल पार्टी के संख्याबल को कम करने वाला था, बल्कि यह पार्टी की विचारधारा और नेतृत्व क्षमता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा गया। एक ऐसी पार्टी, जिसने भ्रष्टाचार के विरोध और विकल्प के तौर पर अपनी पहचान बनाई थी, उसके भीतर ही जब इतने बड़े पैमाने पर दल-बदल होता है, तो जनता के बीच यह संदेश जाता है कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व अपने कुनबे को एकजुट रखने में विफल रहा है। भाजपा का यह रणनीतिक कौशल कहा जाएगा कि वह कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों ही दलों के असंतुष्ट नेताओं के लिए एक सुरक्षित ठिकाने के रूप में उभर रही है।</p>



<p>उधर, राजनीतिक विश्लेषकों का एक बड़ा वर्ग इस पूरी स्थिति को भाजपा की सोची-समझी सियासी चाल के रूप में देख रहा है। पंजाब में भाजपा का आधार हमेशा से सीमित रहा है, लेकिन कांग्रेस और आप के भीतर हो रही इस टूट-फूट का लाभ सीधे तौर पर भाजपा को मिल सकता है। भाजपा की रणनीति स्पष्ट है, वह विपक्षी दलों के असंतुष्ट नेताओं को अपनी ओर आकर्षित करके न केवल उन दलों को कमजोर कर रही है, बल्कि खुद को पंजाब में एक मजबूत और विश्वसनीय विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है। जिन नेताओं को लगता है कि उन्हें उनकी वर्तमान पार्टियों में उचित सम्मान या पद नहीं मिल रहा है, वे भाजपा की ओर रुख कर रहे हैं। इससे विपक्ष का वोट बैंक बिखरता है और सत्ता विरोधी लहर का लाभ उठाने का अवसर भाजपा के पास बढ़ जाता है।पंजाब की यह वर्तमान स्थिति इस बात का प्रमाण है कि दलगत निष्ठाएं अब पहले जैसी नहीं रहीं। आज का नेता अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और भविष्य की सुरक्षा को पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा से ऊपर रख रहा है। जब शीर्ष नेतृत्व अपने नेताओं की आकांक्षाओं को साधने में विफल रहता है, तो उसका परिणाम बगावत के रूप में ही सामने आता है। कांग्रेस और आप दोनों ही दल इस समय नेतृत्व के संकट से जूझ रहे हैं।</p>



<p>जहाँ कांग्रेस में एक मजबूत और स्वीकार्य चेहरे का अभाव है जो सभी गुटों को साथ लेकर चल सके, वहीं आम आदमी पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र और संवाद की कमी साफ दिख रही है। चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। पंजाब की जनता को एक स्थिर और विकासोन्मुखी सरकार की आवश्यकता है, लेकिन पार्टियों का पूरा ध्यान केवल सत्ता के गणित को दुरुस्त करने और अपने घर को बचाने पर लगा है। कांग्रेस की आपसी कलह, रंधावा की संदिग्ध मुलाकातें और आप में हुई सेंधमारी यह स्पष्ट करती है कि पंजाब में अगले कुछ महीने बेहद अस्थिर रहने वाले हैं। जो पार्टी इन आंतरिक विरोधाभासों को जल्द से जल्द सुलझा लेगी और जनता के बीच एकजुटता का संदेश दे पाएगी, वही आगामी विधानसभा चुनाव में बाजी मार सकती है। लेकिन फिलहाल, कांग्रेस और आप दोनों ही दल खुद को संभालने के बजाय एक-दूसरे की कमजोरियों का तमाशा देखने और भाजपा द्वारा रची जा रही सियासी बिसात का शिकार होने की ओर अग्रसर दिख रहे हैं। आने वाला समय ही बताएगा कि क्या ये दल संभल पाएंगे या फिर यह आंतरिक कलह उनके लिए चुनावी हार का मुख्य कारण बनेगी।</p>
<p><a class="a2a_button_whatsapp" href="https://www.addtoany.com/add_to/whatsapp?linkurl=https%3A%2F%2Fravivardelhi.com%2Fa-period-of-instability-among-major-political-parties-in-punjab%2F&amp;linkname=%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AC%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%AC%E0%A5%9C%E0%A5%87%20%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%88%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%82%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%20%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A4%BE%20%E0%A4%A6%E0%A5%8C%E0%A4%B0" title="WhatsApp" rel="nofollow noopener" target="_blank"></a><a class="a2a_button_facebook" href="https://www.addtoany.com/add_to/facebook?linkurl=https%3A%2F%2Fravivardelhi.com%2Fa-period-of-instability-among-major-political-parties-in-punjab%2F&amp;linkname=%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AC%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%AC%E0%A5%9C%E0%A5%87%20%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%88%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%82%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%20%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A4%BE%20%E0%A4%A6%E0%A5%8C%E0%A4%B0" title="Facebook" rel="nofollow noopener" target="_blank"></a><a class="a2a_button_twitter" href="https://www.addtoany.com/add_to/twitter?linkurl=https%3A%2F%2Fravivardelhi.com%2Fa-period-of-instability-among-major-political-parties-in-punjab%2F&amp;linkname=%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AC%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%AC%E0%A5%9C%E0%A5%87%20%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%88%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%82%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%20%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A4%BE%20%E0%A4%A6%E0%A5%8C%E0%A4%B0" title="Twitter" rel="nofollow noopener" target="_blank"></a><a class="a2a_button_email" href="https://www.addtoany.com/add_to/email?linkurl=https%3A%2F%2Fravivardelhi.com%2Fa-period-of-instability-among-major-political-parties-in-punjab%2F&amp;linkname=%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AC%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%AC%E0%A5%9C%E0%A5%87%20%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%88%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%82%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%20%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A4%BE%20%E0%A4%A6%E0%A5%8C%E0%A4%B0" title="Email" rel="nofollow noopener" target="_blank"></a><a class="a2a_button_linkedin" href="https://www.addtoany.com/add_to/linkedin?linkurl=https%3A%2F%2Fravivardelhi.com%2Fa-period-of-instability-among-major-political-parties-in-punjab%2F&amp;linkname=%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AC%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%AC%E0%A5%9C%E0%A5%87%20%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%88%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%82%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%20%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A4%BE%20%E0%A4%A6%E0%A5%8C%E0%A4%B0" title="LinkedIn" rel="nofollow noopener" target="_blank"></a><a class="a2a_dd addtoany_share_save addtoany_share" href="https://www.addtoany.com/share#url=https%3A%2F%2Fravivardelhi.com%2Fa-period-of-instability-among-major-political-parties-in-punjab%2F&#038;title=%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AC%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%AC%E0%A5%9C%E0%A5%87%20%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%88%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%82%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%20%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A4%BE%20%E0%A4%A6%E0%A5%8C%E0%A4%B0" data-a2a-url="https://ravivardelhi.com/a-period-of-instability-among-major-political-parties-in-punjab/" data-a2a-title="पंजाब के बड़े राजनैतिक दलों में अस्थिरता का दौर"></a></p><p>The post <a href="https://ravivardelhi.com/a-period-of-instability-among-major-political-parties-in-punjab/">पंजाब के बड़े राजनैतिक दलों में अस्थिरता का दौर</a> appeared first on <a href="https://ravivardelhi.com">Ravivar Delhi</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>क्या पंजाब कांग्रेस में भी बगावत होगी ?</title>
		<link>https://ravivardelhi.com/will-there-be-a-rebellion-within-the-punjab-congress-as-well/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ravivar Delhi]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Jul 2026 19:13:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आलेख]]></category>
		<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Will there be a rebellion within the Punjab Congress as well?]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://ravivardelhi.com/?p=77707</guid>

					<description><![CDATA[<p>अशोक भाटिया भारतीय राजनीति में पंजाब एक ऐसा राज्य रहा है, जहाँ की सियासत कभी भी एक ढर्रे पर नहीं चलती। लेकिन हाल के दिनों में पंजाब कांग्रेस के भीतर जो कुछ भी घटित हो रहा है, उसने यह साफ कर दिया है कि पार्टी के भीतर अंदरूनी असंतोष का ज्वालामुखी एक बार फिर फटने &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://ravivardelhi.com/will-there-be-a-rebellion-within-the-punjab-congress-as-well/">क्या पंजाब कांग्रेस में भी बगावत होगी ?</a> appeared first on <a href="https://ravivardelhi.com">Ravivar Delhi</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>अशोक भाटिया</strong></p>



<p>भारतीय राजनीति में पंजाब एक ऐसा राज्य रहा है, जहाँ की सियासत कभी भी एक ढर्रे पर नहीं चलती। लेकिन हाल के दिनों में पंजाब कांग्रेस के भीतर जो कुछ भी घटित हो रहा है, उसने यह साफ कर दिया है कि पार्टी के भीतर अंदरूनी असंतोष का ज्वालामुखी एक बार फिर फटने की कगार पर है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा किए गए नए सांगठनिक फेरबदल और चुनावी समितियों के गठन ने पंजाब कांग्रेस की पुरानी दरारों को फिर से चौड़ा कर दिया है।</p>



<p>पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर के मौजूदा सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के गुट द्वारा पार्टी हाईकमान के खिलाफ खोला गया मोर्चा कोई तात्कालिक गुस्सा नहीं, बल्कि सत्ता की महत्वाकांक्षा, जातीय समीकरणों की अनदेखी और नेतृत्व की खींचतान का एक लंबा और पेचीदा सिंड्रोम है। सवाल यह उठता है कि क्या कांग्रेस आलाकमान इतिहास से सबक लेने में पूरी तरह नाकाम रहा है? क्या पार्टी एक बार फिर 2022 के उस आत्मघाती दौर की ओर बढ़ रही है, जिसने हंसते-खेलते सूबे को आम आदमी पार्टी की झोली में डाल दिया था?</p>



<p>बताया जाता है कि विवाद की तात्कालिक शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब विधानसभा चुनावों के मद्देनजर अपनी प्रमुख कमेटियों की घोषणा की। उम्मीद जताई जा रही थी कि जमीनी कार्यकर्ताओं की मांग और पिछले कुछ समय से चल रही सुगबुगाहट को देखते हुए चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष बनाया जाएगा। लेकिन हाईकमान ने &#8216;यथास्थिति&#8217; बनाए रखने का फैसला किया। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा गया और प्रताप सिंह बाजवा को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की कमान सौंपे रखी गई। चन्नी को संतुष्ट करने के लिए उन्हें केवल चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।यह फैसला चन्नी और उनके समर्थकों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा साबित हुआ। चन्नी गुट का मानना है कि प्रचार समिति का प्रमुख बनाना महज एक कागजी औहदा है, जबकि संगठन की असली चाबी और टिकट वितरण का अधिकार राजा वड़िंग के हाथों में ही रहेगा। इसी असंतोष के चलते चन्नी ने मोरिंडा में अपने आवास पर एक आपातकालीन बैठक बुलाई। इस बैठक में ५ मौजूदा विधायकों, पूर्व सांसदों, पूर्व मंत्रियों और जिला अध्यक्षों समेत करीब 65 वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि बगावत की जड़ें बहुत गहरी हो चुकी हैं।</p>



<p>चन्नी समर्थकों ने सीधे तौर पर वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की कार्यशैली और लोकप्रियता पर हमला बोला है। मोरिंडा की बैठक में पूर्व विधायक दर्शन सिंह बराड़ और तरसेम सिंह डीसी जैसे वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा कि राजा वड़िंग के नेतृत्व में कांग्रेस पंजाब में दोबारा सरकार नहीं बना सकती। उनके अनुसार, जनता के बीच वड़िंग की स्वीकार्यता कम हुई है और कार्यकर्ता उनके तहत काम करने में असहज महसूस कर रहे हैं।चन्नी खेमे की दलील है कि यदि पार्टी को पंजाब में सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठाकर वापसी करनी है, तो उसे एक ऐसे चेहरे को आगे करना होगा जिसकी स्वीकार्यता राज्य के हर वर्ग में हो। उनके मुताबिक चन्नी ही वह एकमात्र चेहरा हैं जो दलित समाज के साथ-साथ आम जनता को पार्टी से जोड़ सकते हैं।</p>



<p>पंजाब की सियासत को बिना जातिगत और क्षेत्रीय गणित के नहीं समझा जा सकता। पंजाब में लगभग 32 से 34 प्रतिशत आबादी दलित (अनुसूचित जाति) समुदाय की है, जो देश के किसी भी राज्य में सबसे अधिक अनुपात है।राजा वड़िंग और प्रताप सिंह बाजवा दोनों ही जाट सिख समुदाय से आते हैं। कांग्रेस की मौजूदा संरचना में दोनों शीर्ष पदों पर जाट सिखों का कब्जा है। चन्नी समर्थकों का आरोप है कि आलाकमान ने पंजाब की एक-तिहाई से अधिक दलित आबादी की भावनाओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है।2021 में जब कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाया गया था, तब कांग्रेस ने चन्नी को पंजाब का पहला दलित मुख्यमंत्री बनाकर एक बड़ा दांव खेला था। हालांकि, अंदरूनी कलह (विशेषकर नवजोत सिंह सिद्धू की हठधर्मिता) के कारण वह प्रयोग विफल रहा। अब चन्नी समर्थक उसी &#8216;अधूरे नैरेटिव&#8217; को दोबारा भुनाना चाहते हैं। उनका दावा है कि दलित मतदाता चन्नी के अपमान को बर्दाश्त नहीं करेगा और यदि चन्नी को चेहरा नहीं बनाया गया, तो यह बड़ा वोट बैंक पूरी तरह कांग्रेस से छिटक जाएगा।</p>



<p>मोरिंडा में जुटी राजनीतिक भीड़ ने केवल प्रस्ताव पारित नहीं किए, बल्कि दिल्ली दरबार को सीधे चुनौती दी है। चन्नी गुट ने एक विशेष कमेटी का गठन कर कांग्रेस आलाकमान को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए 7 दिनों का सख्त अल्टीमेटम दिया है। दबाव की रणनीति को और धार देने के लिए चन्नी के वफादारों ने सामूहिक इस्तीफे की धमकी दी है। रणनीति यह है कि यदि एक सप्ताह के भीतर दिल्ली से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिलता, तो कई पदाधिकारी और पूर्व विधायक पार्टी के पदों से सामूहिक रूप से त्यागपत्र देकर सांगठनिक संकट खड़ा कर देंगे।यह स्थिति कांग्रेस के लिए बेहद असहज करने वाली है। एक तरफ संसद में विपक्ष के रूप में पार्टी मजबूत हो रही है, वहीं दूसरी तरफ पंजाब जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में गृहयुद्ध जैसी स्थिति बन गई है।</p>



<p>पंजाब कांग्रेस की यह कलह केवल चन्नी बनाम राजा वड़िंग तक सीमित नहीं है। असंतोष की लहरें पार्टी के अन्य कोनों तक भी पहुंच रही हैं।आनंदपुर साहिब से वरिष्ठ सांसद और देश के जाने-माने नेता मनीष तिवारी ने भी चुनावी समितियों के गठन के बाद सोशल मीडिया (X) पर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका यह कहना कि वे खुद को उपेक्षित और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, दिखाता है कि पार्टी के भीतर हिंदू नेताओं का एक वर्ग भी सांगठनिक फैसलों से खुश नहीं है। वहीँ पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा की हाल ही में दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात ने सियासी गलियारों में तूफान ला दिया है। हालांकि रंधावा ने इसे एक शिष्टाचार और गैर-राजनीतिक भेंट करार दिया है, लेकिन पंजाब की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इस मुलाकात के कई अर्थ निकाले जा रहे हैं। क्या भाजपा पंजाब में कांग्रेस के असंतुष्ट धड़े पर डोरे डाल रही है? यह सवाल अब हवा में तैर रहा है।</p>



<p>गौरतलब है कि पंजाब कांग्रेस का इतिहास आंतरिक गुटबाजी और बगावत की कहानियों से भरा पड़ा है। राजिंदर कौर भट्ठल के दौर से लेकर कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच चली लंबी जंग तक, पार्टी ने हमेशा अंतर्कलह के कारण अपनी बनी-बनाई सरकारें और जनाधार गंवाया है।वर्ष 2021-22 का घटनाक्रम इसका सबसे ताजा और जीवंत उदाहरण है। उस समय नवजोत सिंह सिद्धू की महत्वाकांक्षाओं को हवा देकर आलाकमान ने कैप्टन अमरिंदर सिंह जैसी मजबूत राजनीतिक शख्सियत को बाहर का रास्ता दिखाया। परिणाम यह हुआ कि पार्टी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई और आम आदमी पार्टी ने तीन-चौथाई बहुमत के साथ सत्ता पर कब्जा कर लिया। आज एक बार फिर वही स्क्रिप्ट दोहराई जाती दिख रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार किरदारों के नाम बदल गए हैं, लेकिन रंगमंच और त्रासदी वही पुरानी है।</p>



<p>कांग्रेस आलाकमान के सामने अब &#8216;आगे कुआं, पीछे खाई&#8217; जैसी स्थिति है। यदि वह चन्नी गुट के दबाव में आकर राजा वड़िंग को हटाता है, तो इससे पार्टी के भीतर यह संदेश जाएगा कि ब्लैकमेलिंग और बगावत के आगे आलाकमान झुक जाता है। इसके अलावा, जाट सिख लॉबी में भी नाराजगी फैल सकती है। इसके विपरीत, यदि आलाकमान चन्नी की मांगों को पूरी तरह खारिज कर देता है, तो पार्टी में एक बड़ा विभाजन तय है। चन्नी समर्थकों की सामूहिक बगावत न केवल आगामी चुनावों में कांग्रेस की संभावनाओं को मटियामेट कर देगी, बल्कि राज्य के बड़े दलित वोट बैंक में भी नकारात्मक संदेश भेजेगी।</p>



<p>पंजाब में शिरोमणि अकाली दल अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए संघर्ष कर रहा है, भाजपा लगातार अपना आधार बढ़ाने की कोशिश में है, और आम आदमी पार्टी सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है। ऐसे स्वर्णिम अवसर पर कांग्रेस के पास वापसी का सबसे बेहतरीन मौका था। लेकिन अंदरूनी कलह ने पार्टी को बैकफुट पर धकेल दिया है।</p>



<p>देखा जाय तो पंजाब कांग्रेस के भीतर मची यह रार केवल पदों की लड़ाई नहीं, बल्कि आत्मघाती राजनीति का चरम है। राजनीति का यह बुनियादी नियम है कि जो दल आपस में लड़ते हैं, जनता उन पर राज्य सौंपने का भरोसा कभी नहीं करती। मोरिंडा की बैठक से निकला ७ दिनों का अल्टीमेटम अब दिल्ली में बैठे मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता की परीक्षा लेगा। यदि समय रहते इस असंतोष की आग को नहीं बुझाया गया, तो पंजाब कांग्रेस का यह जहाज 2027 के चुनावी समंदर में उतरने से पहले ही आंतरिक विस्फोट से डूब जाएगा।</p>
<p><a class="a2a_button_whatsapp" href="https://www.addtoany.com/add_to/whatsapp?linkurl=https%3A%2F%2Fravivardelhi.com%2Fwill-there-be-a-rebellion-within-the-punjab-congress-as-well%2F&amp;linkname=%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%20%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AC%20%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%20%E0%A4%AD%E0%A5%80%20%E0%A4%AC%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A4%20%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80%20%3F" title="WhatsApp" rel="nofollow noopener" target="_blank"></a><a class="a2a_button_facebook" href="https://www.addtoany.com/add_to/facebook?linkurl=https%3A%2F%2Fravivardelhi.com%2Fwill-there-be-a-rebellion-within-the-punjab-congress-as-well%2F&amp;linkname=%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%20%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AC%20%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%20%E0%A4%AD%E0%A5%80%20%E0%A4%AC%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A4%20%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80%20%3F" title="Facebook" rel="nofollow noopener" target="_blank"></a><a class="a2a_button_twitter" href="https://www.addtoany.com/add_to/twitter?linkurl=https%3A%2F%2Fravivardelhi.com%2Fwill-there-be-a-rebellion-within-the-punjab-congress-as-well%2F&amp;linkname=%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%20%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AC%20%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%20%E0%A4%AD%E0%A5%80%20%E0%A4%AC%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A4%20%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80%20%3F" title="Twitter" rel="nofollow noopener" target="_blank"></a><a class="a2a_button_email" href="https://www.addtoany.com/add_to/email?linkurl=https%3A%2F%2Fravivardelhi.com%2Fwill-there-be-a-rebellion-within-the-punjab-congress-as-well%2F&amp;linkname=%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%20%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AC%20%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%20%E0%A4%AD%E0%A5%80%20%E0%A4%AC%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A4%20%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80%20%3F" title="Email" rel="nofollow noopener" target="_blank"></a><a class="a2a_button_linkedin" href="https://www.addtoany.com/add_to/linkedin?linkurl=https%3A%2F%2Fravivardelhi.com%2Fwill-there-be-a-rebellion-within-the-punjab-congress-as-well%2F&amp;linkname=%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%20%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AC%20%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%20%E0%A4%AD%E0%A5%80%20%E0%A4%AC%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A4%20%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80%20%3F" title="LinkedIn" rel="nofollow noopener" target="_blank"></a><a class="a2a_dd addtoany_share_save addtoany_share" href="https://www.addtoany.com/share#url=https%3A%2F%2Fravivardelhi.com%2Fwill-there-be-a-rebellion-within-the-punjab-congress-as-well%2F&#038;title=%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%20%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AC%20%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%20%E0%A4%AD%E0%A5%80%20%E0%A4%AC%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A4%20%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80%20%3F" data-a2a-url="https://ravivardelhi.com/will-there-be-a-rebellion-within-the-punjab-congress-as-well/" data-a2a-title="क्या पंजाब कांग्रेस में भी बगावत होगी ?"></a></p><p>The post <a href="https://ravivardelhi.com/will-there-be-a-rebellion-within-the-punjab-congress-as-well/">क्या पंजाब कांग्रेस में भी बगावत होगी ?</a> appeared first on <a href="https://ravivardelhi.com">Ravivar Delhi</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>

<!--
Performance optimized by W3 Total Cache. Learn more: https://www.boldgrid.com/w3-total-cache/?utm_source=w3tc&utm_medium=footer_comment&utm_campaign=free_plugin

Page Caching using Disk: Enhanced 

Served from: ravivardelhi.com @ 2026-07-12 05:41:00 by W3 Total Cache
-->