हिंदुत्व व राष्ट्रवाद की मिश्री-मलाई कर पाएगी भाजपा का बेड़ा पार यूपी में

संदीप ठाकुर

महंगाई,काेराेना,बेरोजगारी सहित कई अहम् मुद्दे उत्तर प्रदेश चुनाव से
लगभग गायब से हैं। यदि गूंज रहा है ताे अयोध्या और काशी विश्वनाथ
कॉरिडाेर। गोदी मीडिया ने भी इन्ही दो को मुद्दा बनाने में कोई कोर कसर
नहीं रख छोड़ी है। चुनावी चर्चा के लिए अलग अलग चैनल अलग अलग जगहों पर जो
महापंचायत बैठा रहे हैं उनमें भी धर्म और आस्था को ही मुख्य मुद्दा बनाने
का प्रयास किया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या धर्म की राजनीति इस बार भी
भाजपा का बेड़ा पार लगा पाएगी ? शायद नहीं। यही वजह है कि भाजपा में
भगदड़ मची हुई है। जाति में बंटे उत्तर प्रदेश में छोटी छोटी जातियों की
नुमाइंदगी करने वाले दल और उसके नेता अपने फायदे के लिए किसी भी पार्टी
में जाने के लिए तैयार बैठे हैं।

योगी सरकार के विकेट लगातार गिरते जा रहे हैं। अभी तक 3 मंत्री और 11
विधायक साथ छोड़ चुके हैं। लेकिन यह कोई चौंकाने वाली घटना नहीं है। ये
ताे होना ही था। दरअसल भाजपा ने जो बोया है वही ताे वह काटेगी। 2017 में
चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने थोक के भाव में वैसे नेताओं को पार्टी में
शामिल कर चुनाव लड़ाया था जिनका पार्टी की आइडियोलॉजी से दूर दूर तक कोई
लेना देना नहीं था। भाजपा के 312 विधायकों में से 54 ऐसे थे जो चुनाव से
ऐन पहले पार्टी में शामिल हुए थे। कोई सपा का था ताे बसपा का। कोई
कांग्रेस का था ताे काेई किसी अन्य छोटी पार्टी का। पार्टी ने कुल 67
आयातित नेताओं को टिकट दिया था। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपने
जिन 162 विधायकाें काे फिर से चुनाव लड़ाया था,उनमें से केवल 12 प्रतिशत
चुनाव जीत पाए थे। अधिकांश नए चेहरे थे जाे विधानसभा पहुंचे थे। दूसरे
शब्दों में कहा जाए ताे विधानसभा पहुंचने वाले 78 प्रतिशत नेता नए थे।
महज 26 विधायक ऐसे थे जो तीसरी बार या उससे अधिक बार चुनाव जीत पाए थे।
चर्चा है कि इस बार भी पार्टी 20 प्रतिशत विधायकों का टिकट काटेगी। भगदड़
मचने की यह भी एक वजह हो सकती है। एक अन्य वजह मोदी-योगी की कथित
‘दादागिरी’ का उत्पीड़न भी बताया जा रहा है। इनसे उत्पीड़ित विधायक जाे
दूसरे दल से आए थे,माैका देख भाजपा छाेड़ कर जा रहे हैं।

नेशनल कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार ने करीब बीस
विधायकों के भाजपा छोड़ने की भविष्यवाणी की है। यहां यह उल्लेखनीय है कि
नेशनल कांग्रेस पार्टी ने उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी
पार्टी के साथ गठबंधन की घोषणा की है और सपा ने उन्हें एक सीट दी है।
यूपी की सत्तारूढ़ योगी सरकार के जिन 14 विधायकाें जिनमें कुछ मंत्री भी
हैं ने अपना त्यागपत्र सौंपा है उनमें स्वामी प्रसाद मौर्य, भगवती सागर,
रोशनलाल वर्मा, अवतार सिंह भाड़ाना, दारा सिंह चौहान, विनय शाक्य, बृजेश
प्रजापति, मुकेश वर्मा, राकेश राठौर, आर के शर्मा, जय चौबे, आर के शर्मा,
माधुरी वर्मा और धर्म सिंह सैनी शामिल हैं। सवाल यह है कि जो नेता भाजपा
छाेड़ कर गए या जाने वाले हैं उनका यूपी चुनाव पर क्या असर पड़ेगा ?
जानकारों का मानना है कि तस्वीर साफ होगी तभी कुछ कहा जा सकता है। लेकिन
कमाेवेश 100 से अधिक सीटों पर इसका असर पड़ सकता है। पिछड़े वोटों की
यूपी की राजनीति में काफी अहमियत है। 2017 का चुनाव भी भाजपा पिछड़े
समुदाय काे एकजुट कर ही जीत पाई थी। लेकिन इस बार मामला गड़बड़ है। विकास
के नाम पर यूपी में कुछ खास हुआ नहीं है। विकास विज्ञापनों में अधिक जमीन
पर कम दिख रहा है। बेरोजगारी बेतहाशा बढ़ी है। महंगाई चरम पर है। ऐसे में
अयोध्या और काशी भाजपा को कितनी मदद कर पाएगा यह ताे चुनाव परिणाम आने के
बाद ही पता चल पाएगा।

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