पहलवान रवि कुमार दहिया ने भारत को गौरवान्वित किया

रविवार दिल्ली नेटवर्क

  • राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने रवि कुमार दहिया को उनके प्रदर्शन के लिए बधाई दी।
  • खेल मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने रवि कुमार दहिया को बधाई देते हुए कहा, आपका जोशीला प्रदर्शन हर भारतीय के लिए बेहद गर्व की बात है।

पहलवान रवि कुमार दहिया ने 57 किग्रा वर्ग में पुरुषों की फ्रीस्टाइल कुश्ती में आज रूस के दो बार के विश्व चैंपियन जावुर युगुएव से 4-7 से हारने के बाद टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीता है। इस प्रकार 23 वर्षीय खिलाड़ी ओलंपिक में कुश्ती में पहलवान सुशील कुमार के बाद रजत पदक जीतने वाले भारत के दूसरे पुरुष पहलवान बन गए हैं। यह टोक्यो ओलंपिक में मीराबाई चानू, पी वी सिंधु, लवलीना बोरगोहेन और पुरुष हॉकी टीम द्वारा जीते गए पदकों के बाद भारत का पांचवां पदक है। राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, खेल मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर और देश भर के लोगों ने रजत पदक विजेता पहलवान रवि कुमार दहिया को बधाई दी है।

राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीतने पर पहलवान रवि कुमार दहिया को बधाई दी। श्री कोविंद ने ट्वीट किया, “टोक्यो 2020 में कुश्ती का रजत पदक जीतने के लिए रवि दहिया पर देश को गर्व है। आपने खासे मुश्किल हालात से मुकाबलों में वापसी की और जीत हासिल की। एक असली चैंपियन की तरह, आपने अपनी आंतरिक शक्ति का भी प्रदर्शन किया। शानदार जीत और भारत को गौरवान्वित करने के लिए बधाई।”

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पहलवान रवि कुमार को बधाई दी और ट्वीट किया, “रवि कुमार दहिया असाधारण पहलवान हैं! उनकी संघर्ष की भावना और दृढ़ता शानदार है। टोक्यो 2020 में रजत पदक जीतने के लिए उनको बधाई। भारत को उनकी उपलब्धियों पर गर्व है।”

खेल मंत्री श्री अनुराग ठाकुर ने पहलवान रवि कुमार दहिया को बधाई दी और ट्वीट किया, “भारत की जीत हुई! रवि आपने कर दिखाया! आपके जोशीले प्रदर्शन पर हर भारतीय को गर्व है!”

रवि कुमार दहिया हरियाणा के सोनीपत जिले के नहरी गांव के रहने वाले हैं। वह एक कृषि परिवार से आते हैं और उनके पिता उनके गांव में धान के खेतों में काम करते थे। उन्होंने 10 साल की उम्र से कुश्ती शुरू कर दी थी। 2017 में सीनियर नेशनल के दौरान उनके घुटने में चोट लग गई थी। इस वजह से उन्हें कोई प्रायोजक नहीं मिला और अपनी चोट से उबरने के लिए उन्हें अपने शुभचिंतकों पर निर्भर रहना पड़ा।

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