12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के उद्घाटन सत्र में राज्यसभा के उपसभापति का स्वागत भाषण, वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए संसदीय सहयोग पर दिया जोर
प्रमोद शर्मा
नई दिल्ली : राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाना आज के समय की मांग है। दुनिया भर के नागरिक संसदों से आर्थिक अनिश्चितता, तकनीकी बदलाव, जलवायु परिवर्तन, सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों और सामाजिक असमानताओं जैसी चुनौतियों का प्रभावी समाधान तलाशने की अपेक्षा करते हैं। ऐसे में संसदों और विधानमंडलों को अधिक सतर्क, उत्तरदायी, गतिशील और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा।
हरिवंश नई दिल्ली स्थित भारतीय संसद के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के उद्घाटन सत्र में स्वागत भाषण दे रहे थे। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष एवं मंच के अध्यक्ष ओम बिरला, विभिन्न ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों तथा अन्य गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया।
विश्व की 49.5 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करता है ब्रिक्स
ब्रिक्स की वैश्विक भूमिका का उल्लेख करते हुए हरिवंश ने कहा कि विश्व की लगभग 49.5 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाला यह समूह वैश्विक और क्षेत्रीय महत्व के मुद्दों पर विचार-विमर्श, परामर्श और सहयोग का एक प्रभावी बहुपक्षीय मंच बन गया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों के बीच संसदीय संवाद से साझा चुनौतियों को समझने और उनके समाधान के लिए सहयोग बढ़ाने के अवसर मिलते हैं।
भारत की अध्यक्षता में जन-केंद्रित दृष्टिकोण पर जोर
हरिवंश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान भारत ने ‘जन-केंद्रित’ और ‘मानवता सर्वप्रथम’ दृष्टिकोण पर आधारित परिकल्पना प्रस्तुत की। इसी सोच से प्रेरित होकर ब्रिक्स प्रक्रिया में ‘लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और सततता के लिए निर्माण’ विषय को प्रमुखता दी गई है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स के विस्तार की वकालत करते हुए वैश्विक दक्षिण की आवाज और विश्वास को मजबूत करने पर जोर दिया। उनके अनुसार, भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता वैश्विक शासन में सुधार और अधिक संतुलित, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।
ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष का किया उल्लेख
भारतीय संसद के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष का उल्लेख करते हुए हरिवंश ने कहा कि यह कक्ष भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का महत्वपूर्ण साक्षी रहा है। उन्होंने भारत की सभ्यतागत विरासत, ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विविधता का जिक्र करते हुए विश्वास जताया कि विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधि भारत की समृद्ध विरासत और लोकतांत्रिक परंपराओं की सुखद स्मृतियां लेकर लौटेंगे।
संसदीय अनुभव साझा करने का अवसर
हरिवंश ने कहा कि ब्रिक्स संसदीय मंच की चर्चाएं सदस्य देशों को अपने अनुभव साझा करने, एक-दूसरे की कार्यप्रणाली से सीखने और ऐसे संसदीय उपायों की पहचान करने का अवसर प्रदान करती हैं, जिनसे आम नागरिकों के जीवन में सार्थक सुधार लाया जा सके।
उन्होंने सभी प्रतिनिधियों को मंच की सफल कार्यवाही और सार्थक चर्चा के लिए शुभकामनाएं देते हुए भारत में उनके सुखद एवं स्मरणीय प्रवास की कामना की।





