जेल से बाहर आते ही बदले तेज प्रताप के तेवर, क्या फिर करीब आएंगे ‘कृष्ण-अर्जुन’?

Tej Pratap’s demeanor changes immediately upon release from jail; will ‘Krishna-Arjun’ come close again?

प्रीति पाण्डेय

बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। NEET पेपर लीक के विरोध और 25 जुलाई के बिहार बंद के दौरान गिरफ्तार जनशक्ति जनता दल (JJD) के प्रमुख तथा लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव मंगलवार शाम बेउर केंद्रीय कारागार से रिहा हो गए। जेल से बाहर निकलते ही उनका सियासी अंदाज और उसके बाद पारिवारिक आवास पहुंचकर तेजस्वी यादव से मुलाकात ने नए राजनीतिक संकेत दे दिए हैं।

जेल से निकलते ही सत्ता पर तंज

रिहाई के बाद तेज प्रताप ने सोशल मीडिया पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को संबोधित करते हुए लिखा कि जेल भेजकर उन्हें जनता के बीच और मजबूत होने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि वह संघर्ष से डरने वाले नहीं हैं और जनता की आवाज़ उठाना उनका कर्तव्य है। संदेश के अंत में उन्होंने सावन और भगवान भोलेनाथ का भी उल्लेख करते हुए श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं।

तेज प्रताप का यह संदेश साफ संकेत देता है कि वह अपनी गिरफ्तारी को राजनीतिक नुकसान नहीं, बल्कि जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने का अवसर मान रहे हैं।

समर्थकों का स्वागत, सीधे पहुंचे घर

बेउर जेल के बाहर समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। बांकीपुर उपचुनाव की प्रत्याशी वीणा मानवी ने उन्हें खीर खिलाकर बधाई दी। इसके बाद तेज प्रताप बिना मीडिया से बातचीत किए सीधे कौटिल्य नगर स्थित पारिवारिक आवास पहुंचे।

घर पहुंचते ही उन्होंने मां राबड़ी देवी का आशीर्वाद लिया। वहीं छोटे भाई तेजस्वी यादव पहले से मौजूद थे। दोनों भाइयों की यह मुलाकात इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि आरजेडी से निष्कासन और अलग पार्टी बनाने के बाद पिछले करीब दो महीनों से उनके बीच कोई सार्वजनिक संवाद नहीं हुआ था।

क्या बदल रहे हैं राजनीतिक समीकरण?

खुद को ‘कृष्ण’ और तेजस्वी को ‘अर्जुन’ कहने वाले तेज प्रताप की यह मुलाकात कई सवाल खड़े कर रही है। जेल जाने से पहले वह आरजेडी और तेजस्वी के करीबी नेताओं पर लगातार हमलावर थे, लेकिन रिहाई के बाद उनके तेवर कुछ बदले हुए नजर आए।

एक ओर सत्ता पक्ष पर उनका तीखा तंज, दूसरी ओर तेजस्वी के साथ बंद कमरे में मुलाकात—इन दोनों घटनाओं ने बिहार की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। क्या यह सिर्फ पारिवारिक मुलाकात थी या विधानसभा चुनाव से पहले लालू परिवार में नई राजनीतिक समझ की शुरुआत? इसका जवाब आने वाले दिनों में सामने आएगा।