विश्व खाद्य दिवस: चुनौतियाँ, समाधान और भविष्य की राह

World Food Day: Challenges, solutions and the way forward

सुनील कुमार महला

विश्व से भुखमरी दूर करने, खाद्य सुरक्षा को बनाए रखने और धरती के हर व्यक्ति को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 16 अक्टूबर को विश्व खाद्य दिवस मनाया जाता है। दरअसल, यहां पर यह कहना ग़लत नहीं होगा कि भोजन मानव का मूल अधिकार है, क्योंकि पर्याप्त और पौष्टिक भोजन के बिना स्वस्थ जीवन, शिक्षा और कार्यक्षमता प्रभावित होती है। हमें यह भी अपने जेहन में रखना चाहिए कि खाद्य सुरक्षा का अर्थ केवल भोजन की उपलब्धता मात्र ही नहीं है, बल्कि इसमें भोजन तक नियमित पहुँच, उसे खरीदने की क्षमता, उसकी गुणवत्ता और पोषण को भी शामिल किया जाता हैं। वास्तव में, भूख और कुपोषण अलग-अलग समस्याएँ हैं तथा किसान खाद्य सुरक्षा की आधारशिला हैं।पाठक जानते हैं कि जलवायु परिवर्तन खाद्य उत्पादन को प्रभावित करता है, जहाँ सूखा, बाढ़, अनियमित वर्षा और बढ़ता तापमान फसलों की पैदावार तथा किसानों की आजीविका पर असर डाल सकते हैं। आज खाद्य बर्बादी और भूख का साथ-साथ बने रहना एक बड़ी विडंबना है। वास्तव में, भोजन का उचित भंडारण, परिवहन और वितरण इस समस्या को कम करने में सहायक हो सकता है। इसके अलावा मौसम की जानकारी, बेहतर सिंचाई, फसल प्रबंधन, भंडारण और खाद्य आपूर्ति की आधुनिक प्रणालियाँ कृषि को अधिक प्रभावी बना सकती हैं।

इस दिवस को मनाने के कारण व इस वर्ष की थीम:-

विश्व खाद्य दिवस मनाने के पीछे कई प्रमुख उद्देश्य हैं। इनमें क्रमशः संपूर्ण विश्व से भूख और कुपोषण का उन्मूलन करना (जिसमें बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर वर्गों के पोषण पर विशेष ध्यान देना शामिल है), किसानों की आय बढ़ाना, सिंचाई और आधुनिक कृषि तकनीक को बढ़ावा देना, तथा छोटे किसानों को संसाधन उपलब्ध कराना शामिल है। इसके साथ ही पौष्टिक और संतुलित आहार की उपलब्धता सुनिश्चित करना, खाद्य पदार्थों की बर्बादी (होटलों, रेस्टोरेंटों, ढाबों, तथा घरों में) रोकना, मिट्टी, जल और जैव विविधता को बचाना तथा विश्व में ऐसी कृषि पद्धतियाँ अपनाने पर बल देना प्रमुख उद्देश्य हैं, जो कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी खाद्य उत्पादन सुनिश्चित कर सकें। हमें यह याद रखना चाहिए कि भोजन केवल और केवल हमारे जीवन की ही आवश्यकता नहीं है, अपितु यह प्रत्येक व्यक्ति के सम्मानपूर्ण जीवन का भी आधार है। आज दुनिया में पर्याप्त खाद्यान्न उत्पादन होता है, लेकिन बहुत ही दुखद है कि इसके बावजूद भी दुनिया में बहुत से लोगों को दो जून की रोटी तक नसीब नहीं हो पाती है और आज भी दुनिया में लाखों नहीं करोडों लोग भूख, कुपोषण और पौष्टिक भोजन की कमी से लगातार जूझ रहे हैं। दूसरी ओर, खाद्य पदार्थों की बर्बादी, जलवायु परिवर्तन, गरीबी और संसाधनों का असमान वितरण इस समस्या को और गंभीर तथा संवेदनशील बनाते हैं। इस वर्ष विश्व खाद्य दिवस 2026 की थीम-‘आज नवाचार करें, कल का पोषण सुनिश्चित करें।’ रखी गई है। वास्तव में इसका साफ संदेश यह है कि आधुनिक विज्ञान, नई तकनीक और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय से सभी के लिए पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन सुनिश्चित किया जाए तथा भविष्य के लिए प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा की जाए।

भोजन को सुलभ, किफायती और पौष्टिक बनाना भी आवश्यक:-

हाल फिलहाल विश्व खाद्य दिवस के संदर्भ में यदि हम आँकड़ों की बात करें तो संयुक्त राष्ट्र की पाँच एजेंसियों द्वारा जुलाई 2026 में जारी ‘विश्व में खाद्य सुरक्षा एवं पोषण की स्थिति’ रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में दुनिया भर में लगभग 64.5 करोड़ लोग भूख से प्रभावित थे, जो वैश्विक आबादी का लगभग 7.8 प्रतिशत है। इसी अवधि में लगभग 210 करोड़ लोग मध्यम या गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 270 करोड़ लोग स्वस्थ आहार का खर्च उठाने में असमर्थ थे। हालाँकि, वैश्विक स्तर पर भूख से प्रभावित लोगों की संख्या में लगातार तीसरे वर्ष कमी दर्ज की गई, लेकिन यह सुधार सभी क्षेत्रों में समान नहीं रहा। ये आँकड़े स्पष्ट करते हैं कि दुनिया में खाद्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ भोजन को सुलभ, किफायती और पौष्टिक बनाना भी आवश्यक है। हमारे देश भारत में भुखमरी और कुपोषण आज भी बड़ी चुनौती हैं। वर्ष 2023 में देश में लगभग 17.21 करोड़ लोग अल्पपोषण से प्रभावित थे। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019–21) के अनुसार, पाँच वर्ष से कम उम्र के 35.5 प्रतिशत बच्चे ठिगनेपन, 32.1 प्रतिशत कम वजन और 19.3 प्रतिशत दुबलेपन से प्रभावित थे। यहाँ पाठकों को बताता चलूं कि भारत सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत देश की लगभग 80.67 करोड़ आबादी को रियायती खाद्यान्न उपलब्ध कराने की व्यवस्था कर रही है। इस योजना के अंतर्गत पात्र प्राथमिकता वाले परिवारों को प्रति व्यक्ति प्रतिमाह 5 किलोग्राम तथा अंत्योदय अन्न योजना के परिवारों को प्रति परिवार प्रतिमाह 35 किलोग्राम खाद्यान्न निःशुल्क दिया जाता है। यह व्यवस्था देश की लगभग दो-तिहाई आबादी को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाई गई है। इतना ही नहीं, सरकार विद्यालयों में पीएम पोषण योजना और आँगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों तथा महिलाओं के पोषण के लिए भी सहायता उपलब्ध कराती है।

प्रमुख विद्यमान चुनौतियां:-

आज विश्व खाद्य दिवस पर संपूर्ण विश्व के समक्ष अनेक प्रकार की चुनौतियाँ विद्यमान हैं। इनमें क्रमशः पूरी दुनिया से भुखमरी और कुपोषण को समाप्त करना, हर व्यक्ति को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना, गरीबी के कारण भोजन की कमी और स्वस्थ आहार की बढ़ती लागत को कम करना, खाद्य पदार्थों की बर्बादी रोकना और जरूरतमंदों तक भोजन पहुँचाना शामिल है। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन, सूखा और बाढ़ से कृषि उत्पादन की रक्षा करना, किसानों की आय बढ़ाना और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना तथा खाद्यान्न का समान वितरण सुनिश्चित कर वर्ष 2030 तक शून्य भुखमरी के लक्ष्य को प्राप्त करना आदि को भी इसमें शामिल किया जा सकता है।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्य सुरक्षा:-

सार्वजनिक वितरण प्रणाली देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और गरीब परिवारों को भुखमरी से बचाने का एक महत्त्वपूर्ण आधार है। इसके माध्यम से पात्र परिवारों को उचित मूल्य की दुकानों से निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लगभग 80 करोड़ लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने की व्यवस्था है, जो यह सुनिश्चित करती है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भोजन के लिए संघर्ष न करना पड़े। विश्व खाद्य दिवस हमें याद दिलाता है कि भोजन केवल जीवन की आवश्यकता नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति का सम्मानपूर्ण जीवन जीने का आधार है। हालाँकि, खाद्य सुरक्षा का उद्देश्य केवल पेट भरना नहीं, बल्कि हर व्यक्ति तक पौष्टिक और संतुलित आहार पहुँचाना भी है। इसके लिए खाद्यान्न का पारदर्शी वितरण, बर्बादी पर रोक, किसानों को प्रोत्साहन और कुपोषण का उन्मूलन आवश्यक है। वास्तविक खाद्य सुरक्षा तभी सार्थक होगी, जब देश का कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए और प्रत्येक नागरिक को पर्याप्त, सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो।

अंत में यही कहूंगा कि विश्व खाद्य दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन मात्र ही नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा और भुखमरी के प्रति जागरूक होने का एक सशक्त संदेश है। इस आलेख में ऊपर चर्चा कर चुका हूं कि भोजन हर मनुष्य का मौलिक अधिकार है, फिर भी दुनिया भर में लाखों लोग कुपोषण और भुखमरी से जूझ रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए एक ओर जहाँ टिकाऊ कृषि, जल-संसाधनों के संरक्षण और हमारे अन्नदाताओं (किसानों) के कल्याण को प्राथमिकता देना आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर व्यक्तिगत स्तर पर भोजन की बर्बादी रोकना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। ‘जीरो हंगर’ यानी कि शून्य भुखमरी के लक्ष्य को प्राप्त करना केवल सरकार या अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए पूरे समाज और हर नागरिक के सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। जब हम भोजन का सम्मान करेंगे और पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाएंगे, तभी एक स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध भविष्य का निर्माण संभव हो सकेगा।