हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय, जयपुर का तृतीय दीक्षांत समारोह

3rd Convocation of Haridev Joshi University of Journalism, Jaipur

  • सबसे पहले नहीं, सबसे सही बताने की होड़ में रहें पत्रकार-विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी
  • संसदीय पत्रकारिता को पाठ्यक्रम में शामिल करें- श्री देवनानी

गोपेन्द्र नाथ भट्ट

जयपुर : राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने पत्रकारों से सरकार और समाज के बीच सेतु बन सत्य, निष्पक्षता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का आह्वान किया है । उन्होंने युवा पत्रकारों से कहा कि वे “सबसे पहले नहीं, सबसे सही बताने की होड़ में रहें।”

देवनानी बुधवार को जयपुर में हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने पत्रकारों से विश्व के समक्ष आसन्न वर्तमान संकट में अपनी जिम्मेदारियों को समझने और राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ पत्रकारिता धर्म निभाने की अपील की। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित इस गरिमामय समारोह की अध्यक्षता राजस्थान के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने की। राज्य के उप मुख्यमंत्री एवं उच्च-तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ प्रेम चंद बैरवा समारोह के विशिष्ट अतिथि थे। समारोह में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. नन्दकिशोर पाण्डेय सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

विधानसभाध्यक्ष देवनानी ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, जो सरकार और समाज के बीच सेतु का कार्य करता है। उन्होंने 1975 में देश में लगाए गए आपातकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में प्रेस ने सेंसरशिप के विरोध में अपने संपादकीय कॉलम को काले बॉर्डर में खाली छोड़कर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा का साहसिक उदाहरण प्रस्तुत किया था। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि “ आप अपनी कलम की ताकत को पहचानिए, क्योंकि यह केवल शब्द नहीं लिखती, बल्कि इतिहास रचती है।”

देवनानी ने कहा कि आज सूचना का प्रवाह अत्यंत तेज हो गया है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई ) के दौर में पत्रकारिता का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। हालांकि, इसके साथ “फेक न्यूज़” और “दुष्प्रचार” और “मिथ्या प्रचार” जैसी गंभीर चुनौतियां भी सामने आई हैं। ऐसे में मीडिया की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि एक गलत खबर समाज के विश्वास को गहरा आघात पहुंचाती है।

स्वतंत्रता आंदोलन में पत्रकारों की भूमिका को रेखांकित करते हुए देवनानी ने श्री गणेश शंकर विद्यार्थी, श्री बाल गंगाधर तिलक, राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी और संविधान निर्माता डॉ.भीमराव आंबेडकर जैसे महान नेताओं का जो पत्रकार भी थे,उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौर में पत्रकारिता जनजागरण और स्वतंत्रता आंदोलन का सशक्त माध्यम थी। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पत्रकारिता से जुड़े होने का जिक्र किया। विशेष कर आकाशवाणी पर प्रसारित किए जाने वाले प्रधानमंत्री श्री मोदी के “मन की बात” कार्यक्रम का उल्लेख किया । उन्होंने राजस्थान में पत्रकारिता को आगे बढ़ाने में विजय सिंह पथिक, कर्पूर चंद कुलिश और श्री नारायण बारहट जैसे मुर्घन्य पत्रकारों के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि ये सभी सत्य पर टिके रह कर और निष्पक्ष भाव से अपनी पत्रकारिता के माध्यम से राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनें।

विधानसभाध्यक्ष देवनानी ने कहा कि आज “मोबाइल जर्नलिज्म”, “सिटिजन जर्नलिज्म” और “सोशल मीडिया” के बढ़ते प्रभाव के बीच प्रशिक्षित पत्रकार की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक केवल माध्यम है, जबकि पत्रकारिता की असली ताकत उसकी विश्वसनीयता और नैतिकता में निहित है। देवनानी ने पत्रकारों से कहा कि समाज को केवल नकारात्मक खबरों की नहीं, बल्कि सकारात्मक और समाधान आधारित पत्रकारिता की आवश्यकता है। मीडिया ऐसी खबरें प्रस्तुत करनी चाहिए जो समाज को जोड़ें, उसे जागरूक करें और नागरिकों को प्रेरणा दें।

देवनानी ने पत्रकारिता विश्वविद्यालयों को सुझाव दिया कि वे संसदीय पत्रकारिता को भी अपने पाठ्यक्रम में शामिल करें ताकि भावी पत्रकार लोकतन्त्र के प्रहरी बन कर विधायी कार्यवाही के कवरेज और जन प्रतिनिधियों द्वारा संसदीय मंचों पर उठाई जाने वाली आवाज एवं जनहित के मुद्दों को जनता के सामने सही ढंग से प्रस्तुत करने में सक्षम बन सकें।

समारोह में अतिथियों द्वारा वर्ष 2024 और 2025 में फाइनल परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले 271 पत्रकारिता के विद्यार्थियों को स्नातक और स्नातकोत्तर एवं विद्या वाचस्पति डिग्रियां प्रदान की गई। इसके अलावा, 35 छात्रों को मेरिट सर्टिफिकेट और 12 को गोल्ड मेडल दिए गए। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुल सचिव श्री लक्ष्मीनारायण शर्मा ने आभार व्यक्त किया।