किसानों के लिए लाभदायक साबित हो रही है जैविक खेती

रविवार दिल्ली नेटवर्क

रायपुर : राज्य शासन की कृषि क्षेत्र में संचालित योजनाएं किसानों के लिए लाभदायक साबित हो रही है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना ने आज कृषि को किसानों के लिए वरदान बन गया है। चाहे वह फसल विविधिकरण से मिलने वाला मुनाफा हो या राज्य शासन की ओर से मिलने वाली आदान राशि। आज किसानों को फसल विविधिकरण के माध्यम से अच्छा दाम मिल रहा है, जिससे किसान नगद एवं व्यावसायिक कृषि की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

विकासखंड बरमकेला के ग्राम बनवासपाली निवासी श्री ईश्वर सिदार के पास 6 हेक्टेयर सिंचित रकबा है। जिसमें श्री सिदार धान की फसल लेते हैं। कृषक श्री ईश्वर सिदार को कृषि विभाग द्वारा खरीफ वर्ष 2021-22 में राजीव गांधी किसान न्याय योजनान्तर्गत धान के बदले दलहन, तिलहन, मक्का और अन्य फसल (उद्यानिकी फसल) को लगाने प्रोत्साहित किया गया। धान के बदले कोई अन्य फसल लेने पर प्रति एकड़ 10 हजार रूपए की आर्थिक सहायता एवं अन्य लाभ के बारे में जानकारी दी गई। जिसके उपरान्त कृषक श्री सिदार के द्वारा धान के बदले 2 हेक्टेयर में उद्यानिकी फसल में परिवर्तित करने की सहमती जताई। इस योजनान्तर्गत उद्यान विभाग की तरफ से केला, ड्रैगनफू्रट और आम का पौधा प्रदाय किया गया। जिसमें कृषक के द्वारा 1.60 हेक्टेयर में केला, 0.280 हेक्टेयर में आम और 0.120 हेक्टेयर में ड्रैगनफू्रट का फसल लगाया गया।

कृषक ईश्वर सिदार द्वारा धान फसल के बदले में उद्यानिकी फसलों की खेेती करने से धान फसल की तुलना में उद्यानिकी फसल से आय में वृद्धि हुयी है। उन्हें उद्यानिकी फसल लगाने में प्रथम वर्ष काश्त लागत 1 लाख से 2 लाख रूपए तक आयी। जिसमें अभी प्रथम वर्ष मात्र केला फसल का विक्रय कर लाभ 6-7 लाख रूपए प्राप्त हो चुका है। इस परिवर्तित फसल उत्पादन के दौरान कृषक को बहुत फायदा हुआ है। श्री सिदार ने योजना से बढ़ी हुई आमदनी को लेकर प्रसन्नता जताई है। उनके द्वारा धान के बदले उद्यानिकी फसल की खेती किये जाने से अन्य कृषकों पर भी परिवर्तित फसल को लेकर काफी उत्साह है। अन्य कृषकों के द्वारा भी भविष्य में इस योजनान्तर्गत धान के बदले में अन्य फसल को लेने हेतु सहमती जताई है।

कृषि एवं उद्यान विभाग के मार्गदर्शन में विभागीय अधिकारियों के परामर्श पर श्री सिदार द्वारा खेतों की जुताई कर रोपण करने की सही विधि, उचित समय में रोपण करने के लिये कहा गया, समय पर रोपण/उगाने से और उचित मात्रा में खाद उर्वरक, जिंक, बोरान जैसे अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व भी प्रदान किया गया साथ ही खाद में जैविक खाद (केचुआ खाद) का अधिक से अधिक उपयोग करने को कहा गया। कीट प्रबंधन के लिए विभाग से नीम तेल दवा (नीमेक्स) भी प्रदाय किया गया, जिसे श्री सिदार द्वारा छिड़काव किया गया। उर्वरकों और कीटनाशकों का छिड़काव शाम के समय करने की भी सलाह दी। इन सभी विभागीय मार्गदर्शन के द्वारा उद्यानिकी फसल की खेेती करने से फसल पर रोग एवं कीट कम हुए और पौध संरक्षण पर आने वाली लागत में कमी आयी और उत्पादन में भी वृद्धि हुयी।