मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांगेराम त्यागी ने उठाया वैश्य समाज एवं व्यापारियों के उत्पीड़न का मुद्दा

By writing a letter to the Chief Minister, Mangeram Tyagi raised the issue of harassment of the Vaishya community and traders

दीपक कुमार त्यागी

वैश्य समाज एवं व्यापारियों पर कानून की आड़ में हो रहे प्रशासनिक शोषण व उत्पीड़न को रोकने हेतु मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर के किया मांगेराम त्यागी ने आगाह।

मुजफ्फरनगर : त्यागी समाज के वरिष्ठ नेता और समाजसेवी मांगेराम त्यागी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय त्यागी भूमिहार ब्राह्मण समाज समिति (रजि०) ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पत्र लिखकर वैश्य समाज व व्यापारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाया है। पत्र में उन्होंने कहा है कि जब भी राष्ट्र पर आर्थिक संकट आता है, तब-तब वैश्य समाज / व्यपारी समाज अपने व्यापार और कमाई की परवाह किए बिना देश के लिए अपने खजाने खोलता है। यही समाज भारत की आर्थिक रीढ़ है, लेकिन आज उसी रीढ़ को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान में, जीएसटी, ट्रेड लाइसेंस और अन्य करों की आड़ में व्यापारी वर्ग को इस प्रकार कुचला जा रहा है मानो वे देश के निर्माणकर्ता नहीं, बल्कि कोई अपराधी हों। छोटे-बड़े व्यापारियों को प्रशासनिक दबाव में लाकर भय का वातावरण बनाया जा रहा है, जिससे उनका व्यापार करना भी कठिन होता जा रहा है। यह स्थिति न केवल निंदनीय है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी घातक है। यदि यही रवैया जारी रहा तो वैश्य समाज / व्यपारी को हाशिए पर धकेलने की यह नीति देश के आर्थिक ताने-बाने को ही कमजोर कर देगी।

मांगेराम त्यागी ने कहा कि हम, त्यागी भुमिहार ब्राह्मण समाज समिति, आपसे विनम्र अनुरोध करते हैं कि व्यापारियों के शोषण और अपमान पर तत्काल रोक लगाने हेतु प्रशासन को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं। कर कानूनों को सरल और व्यापारी हितैषी बनाया जाए। जो भी व्यक्ति या वर्ग वैश्य समाज को अपमानित करता है, उस पर कठोर कार्रवाई हो। व्यापारी वर्ग के लिए विशेष सहायता प्रकोष्ठ (Helpline/Support Cell) की स्थापना की जाए।

मांगेराम त्यागी ने कहा कि वैश्य समाज कर भी देता है और दान भी। इन्हें “करदाता” मानिए, “अपराधी” नहीं। अगर इस समाज का मनोबल टूट गया, तो राष्ट्र की आर्थिक गति भी ठहर सकती है। उन्होंने इस गंभीर विषय पर मुख्यमंत्री से संवेदनशीलता से विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय करने की आशा की है।