
शिशिर शुक्ला
आखिरकार ऑनलाइन गेमिंग के प्रचार और विनियमन विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई। इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार की त्वरित एवं दूरदर्शितापूर्ण कार्यवाही का ही नतीजा है कि ऑनलाइन गेमिंग बिल के रूप में एक प्रभावी अंकुश उस जाल पर लग गया है, जो लाखों करोड़ों युवाओं एवं किशोरों को अपनी गिरफ्त में लिए हुए था। न जाने कितने युवाओं ने केवल और केवल इस ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के भरोसे अल्प समय में ही अरबपति बनने का सपना संजो रखा था। लेकिन शायद वे सभी इस बात से अनभिज्ञ हैं कि यह एक ऐसा जंजाल है, जिसमें अगर एक बार फंस गए तो फिर बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है। नए ऑनलाइन गेमिंग कानून में यह प्रावधान किया गया है कि जो भी कंपनियां इस तरह की सेवाएं प्रदान करेंगी, उन पर तीन वर्ष की कैद अथवा एक करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। ऑनलाइन गेमिंग के प्लेटफार्म का विज्ञापन अथवा प्रचार करने पर भी दो साल की सजा एवं पचास लाख रुपए तक के अर्थदंड का प्रावधान किया गया है। कानून की प्रभाविता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बहुत सारी ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों ने देश में चलाए जा रहे अपने मनी गेमिंग के नेटवर्क को समेटकर किनारा कर लिया है। कानून के अंतर्गत यह भी प्रावधान किया गया है कि जो इस कानून का उल्लंघन करेगा उस पर भी तीन वर्ष की कैद एवं एक करोड़ का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अतिरिक्त ऐसे बैंक जो इस संबंध में लेनदेन की प्रक्रिया से जुड़े होंगे, उन पर भी सख्ती बरती जाएगी। ऑनलाइन गेमिंग से होने वाली क्षति से संबंधित आंकड़ों पर अगर दृष्टिपात किया जाए तो निस्संदेह बहुत ही चौंकाने वाले तथ्य सामने आते हैं। उदाहरण के तौर पर, अभी तक देश में 1800 गेमिंग स्टार्टअप चल रहे थे। वैश्विक स्तर पर यदि बात करें तो ऑनलाइन गेमिंग का 3240 करोड़ का वैश्विक बाजार मौजूद है। इसके अतिरिक्त 45 करोड़ लोग ऑनलाइन गेमिंग से प्रतिवर्ष नुकसान में चले जाते हैं। वहीं खास बात यह है कि विगत पांच वर्षों में सरकार ने गेमिंग से 2600 करोड़ रुपए कमाए हैं। जाहिर सी बात है कि ऑनलाइन गेमिंग पर अंकुश लगने से सरकार की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान होगा। किंतु संभवतः यह इतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना कि युवाओं एवं किशोरों का भविष्य। बिल के पूर्णतया अमल में आ जाने पर लोग गूगल प्ले स्टोर के माध्यम से पैसे से जुड़े हुए किसी भी ऑनलाइन गेमिंग एप को डाउनलोड नहीं कर पाएंगे। आज की स्थिति यह है कि ऑनलाइन गेमिंग के चक्कर में फंसकर लोग प्रतिवर्ष बीस हजार करोड़ का नुकसान उठाते हैं। इतनी बड़ी मात्रा में आर्थिक क्षति का दुष्परिणाम यह होता है कि लोग या तो मानसिक अवसाद की दशा में चले जाते हैं अथवा आत्महत्या जैसा गंभीर कदम उठाने पर विवश हो जाते हैं। हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा गेमिंग डिसऑर्डर के नाम से एक नई बीमारी का वर्गीकरण किया गया है जो अंतिम रूप से कहीं न कहीं चिंता, मानसिक अवसाद, अनिद्रा एवं समाज से अलग होने का कारण बनती है। स्पष्ट सी बात है कि जब अध्ययन एवं कैरियर निर्माण के विषय में सोचने के स्थान पर किशोर एवं युवा वर्ग ऑनलाइन गेमिंग के भंवरजाल में फंस जाएगा, तो कहीं न कहीं वह लक्ष्य से भटकते हुए ऐसी दिशा में चला जाएगा जो उसे शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक क्षरण की ओर अग्रसर करेगी। कितनी शर्मनाक बात है कि आज का युवा ऑनलाइन गेमिंग की लत के दुष्प्रभाव की वजह से अपनी जीवन लीला को भी समाप्त कर ले रहा है। यह बड़ी विडंबनापूर्ण बात है कि एक तरफ हम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सतत रूप से आगे बढ़ रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ देश का युवावर्ग ऑनलाइन गेमिंग जैसी बुरी लत में फंसकर अपना एवं अपने परिवार का नुकसान करने पर तुला हुआ है। देश का युवा यदि बर्बाद होता है तो उसका सीधा सा अर्थ है कि हम भविष्य के मानव संसाधन एवं उसकी गुणवत्ता को खत्म कर रहे हैं। ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां युवाओं को पहले आकर्षक तरीके से झांसा देती हैं और अपने जाल में फंसाती हैं। उसके बाद वे प्रत्येक गेम के लिए ग्राहकों से सब्सक्रिप्शन शुल्क वसूलती हैं, और इसके बाद आर्थिक दोहन का सिलसिला शुरू हो जाता है जो युवाओं की बर्बादी पर जाकर ही खत्म होता है। विगत वर्ष प्रवर्तन निदेशालय ने एक गेमिंग कंपनी पर छापेमारी कर 68 करोड रुपए की राशि जब्त की थी। कंपनी पर आरोप था कि उसने अनेक युवाओं से धोखाधड़ी करके पैसा लिया एवं उस धन को विदेश भेजा। रिपोर्ट के अनुसार कंपनी ने 2850 करोड़ रुपए गेमिंग ऐप के माध्यम से जुटाए और उसमें से 2265 करोड़ रुपए भारत के बाहर भेज दिए। एक और बात जो बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण है, वो यह कि बड़ी-बड़ी हस्तियां जिनमें अनेक फिल्मी सितारे भी शामिल हैं, इन ऑनलाइन गेमिंग एप्स का प्रचार करते हैं। नतीजा यह होता है कि युवा एवं किशोर वर्ग उनकी तरफ बड़ी तेजी से आकर्षित होता है। नए कानून में यह प्रावधान किया गया है कि जो लोग गेम खेल रहे हैं एवं दुर्भाग्यवश नुकसान उठा रहे हैं, उन्हें पीड़ित मानते हुए उन पर किसी तरह की कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी। कार्यवाही केवल और केवल उन पर होगी जो खेलने के लिए मंच उपलब्ध करा रहे हैं अथवा लेनदेन संबंधी प्रक्रिया में शामिल हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में ऑनलाइन गेमिंग अकाउंट से जुड़ी हुई 84 हजार लोगों की जानकारी वर्ष 2024 में लीक हुई है। यह दावा साइबर सिक्योरिटी कंपनी कैस्परस्की ने किया है।
रिपोर्ट बताती है कि पूरे विश्व में सर्वाधिक डाटा थाईलैंड एवं सबसे कम डाटा सिंगापुर के लोगों का चोरी हुआ है। आंकड़ों के अनुसार एशिया प्रशांत क्षेत्र में 180 करोड़ गेमर हैं। जाहिर सी बात है कि एक बड़ी मात्रा में डाटा इन प्लेटफॉर्मों पर उपलब्ध है। हैकर्स इन्हीं प्लेटफॉर्मों के जरिए डाटा चोरी करते हैं और उसके बाद गंभीर आर्थिक धोखाधड़ी की गतिविधियों को अंजाम देते हैं।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि विगत वर्ष कुल 1.1 करोड़ गेमिंग अकाउंट का डाटा लीक हुआ है। वर्ष 2004 के बाद से हर दिन 4.67 लाख वायरस हमले हो रहे हैं। निश्चित रूप से ये आंकड़े चिंताजनक हैं। ऑनलाइन गेमिंग एक प्रकार से युवाओं का शौक बनती जा रही है। युवा वर्ग अपना बेशकीमती समय एक ऐसी लत के पीछे बर्बाद कर दे रहा है जिसका कोई परिणाम निकलने वाला नहीं है। खास बात तो यह है कि युवावर्ग शायद इस बात से भी अनभिज्ञ है कि खेल में उसका सामना बड़ी कुशलता के साथ प्रोग्रामिंग किए गए सॉफ्टवेयर के साथ होता है। सॉफ्टवेयर की खासियत यह है कि वह शुरुआत में युवाओं को विजय श्री का मुंह दिखाता है और धीरे-धीरे पराजय के गड्ढे में धकेल देता है। खेल के आरंभ में ही छोटी सी जीत का चस्का लग जाने से युवा हार न मानने जैसा कदम उठाता है और ऐसा करते-करते वह गंभीर नुकसान की चपेट में आ जाता है। एक बात विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि केवल और केवल ऑनलाइन गेमिंग बिल के अस्तित्व में आ जाने मात्र से ही समस्या का हल होने वाला नहीं है। इसके लिए युवाओं एवं किशोरवर्ग की विशेष काउंसलिंग करने की भी आवश्यकता है ताकि उन्हें खुद यह आभास हो कि क्या गलत है और क्या सही। निस्संदेह आज डिजिटल क्रांति का युग है। शिक्षा, चिकित्सा, व्यवसाय आदि प्रत्येक क्षेत्र डिजिटल माध्यमों पर निर्भर हो चुका है। ऑनलाइन गेमिंग जैसे व्यसन इस डिजिटल क्रांति का ही एक पार्श्वप्रभाव हैं।
डिजिटल तकनीकी के इस युग में युवाओं की ऊर्जा, समय एवं रचनात्मकता को सही दिशा में मोड़कर विकास के लिए प्रेरित करना अपने आप में एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। रोमांच की लालसा में एक अल्प अवधि का ऑनलाइन गेम युवाओं के कितने घंटे लील ले लेता है, उन्हें खुद भी नहीं पता चल पाता। आज आवश्यकता है कि शिक्षा प्रणाली में भी इस तरह से सकारात्मकता का समावेश किया जाए कि युवावर्ग पथभ्रमित होने से बच सके। इसके अतिरिक्त समाज, परिवार एवं राष्ट्र को संयुक्त रूप से कदम आगे बढ़ाते हुए किशोरों एवं युवाओं को दिशाहीनता की तरफ मुड़ने से बचाना होगा। ऑनलाइन गेमिंग विधेयक निश्चित रूप से युवाओं के अनर्गल शौक पर प्रभावी अंकुश लगाने का एक बेहतरीन माध्यम साबित होगा। यह उन कंपनियों के मुंह पर भी एक जोरदार तमाचा है जो युवाओं को पथभ्रष्ट करने का उद्देश्य लेकर ही अस्तित्व में आती हैं एवं अंततः उनको बर्बाद करके ही छोड़ती हैं। आज का युवा कल के भारत का कर्णधार है। हमें हर हाल में जीतोड़ प्रयास करते हुए युवावर्ग को एक सार्थक दिशा देने का प्रयास करना चाहिए। इस हेतु यह नितांत आवश्यक है कि दुर्व्यसनों से युवाओं का दूर दूर तक कोई संबंध न रहे।