संजय सक्सेना
पाकिस्तान की जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की हालत को लेकर हाल ही में कई तरह की चिंताएँ और सवाल उठे हैं। देश-विदेश में इस बात को लेकर गहरा संदेह है कि वह सुरक्षित हैं या नहीं, और कहीं उनके जीवन को कोई गंभीर खतरा तो नहीं है। इस तरह की अफवाहें तब और बढ़ीं जब उनसे मिलने वाले लोगों को रोका गया और उनकी कोई भी लाइव वीडियो जारी नहीं हुई। इमरान खान, जो कभी पाकिस्तान की सत्ता के शीर्ष पर थे, अब जेल की सजा काट रहे हैं। जेल प्रशासन ने उनके मिलने-जुलने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। कोई भी उनसे मिलने जेल नहीं जा सकता, न ही उनसे बातचीत का कोई आधिकारिक माध्यम मौजूद है। पाकिस्तान के अंदर और बाहर राजनीतिक समर्थकों के मन में इस बात को लेकर डर पैदा हो गया कि अगर उनसे कोई संपर्क तक नहीं हो पा रहा, तो कई तरह की अफवाहें क्यों फैल रही हैं। इन अफवाहों में यह भी कहा जा रहा है कि इमरान की जान को गंभीर खतरा है और उनका स्वास्थ्य गिरता जा रहा है।
असल में, यह डर इस लिए भी पैदा हुआ क्योंकि पाकिस्तान की जेलों का इतिहास ठीक-ठाक नहीं है। राजनीतिक कैदियों के साथ नायाब या न्यायपूर्ण व्यवहार के अभाव के कारण वहां की परिस्थितियाँ अक्सर गंभीर हो जाती हैं। इमरान के साथ भी ठीक यही हो रहा है। जेल में उनकी सुरक्षा और इस बात की जानकारी जिस तरह सीमित रखी गई है, इससे उनके करीबी और समर्थकों में बड़ा असमंजस दिख रहा है। उनकी कोई भी स्पष्ट तस्वीर या वीडियो सामने नहीं आना इस बात का प्रमाण समझा जा रहा है कि वहां कुछ छुपाया जा रहा है।इमरान खान के खिलाफ जो साजिशें और दबाव बनाए जा रहे हैं, उनका मुख्य उद्देश्य उन्हें चुप कराना और राजनीतिक रूप से कमजोर करना है। पाकिस्तान के राजनीतिक माहौल में इमरान खान की ताकत और समर्थन एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जाता है। इसलिए उन्हें जेल में इतना कठोर और अलग-थलग रखने का कदम उठाया गया है। उनके समर्थकों का मानना है कि सरकार और जोतनावर क्षेत्रीय ताकतें उन्हें दबाने की पूरी कोशिश कर रही हैं ताकि उनका राजनीतिक प्रभाव खत्म हो जाए।
इमरान पर अत्याचार और उनके हालात के लिए जिम्मेदार कौन है, यह सवाल भी महत्वपूर्ण है। इस संबंध में पाकिस्तान की वर्तमान सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को सबसे ज्यादा दोषी माना जा रहा है। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को खत्म करने के लिए उनके खिलाफ जो भी कदम उठाए जा रहे हैं, वे मानवाधिकारों और न्याय की सीमा से बाहर हैं। जेलों में उनकी चिकित्सा सेवा का अभाव और उनसे मिलने-जुलने की मनाही इस बात की गवाही देती है कि उनके साथ न्याय नहीं किया जा रहा। कुछ विश्लेषक यह भी मानते हैं कि मुनीर नामक किसी व्यक्ति या गुट ने इमरान के खिलाफ साजिश रची है, जिसके कारण उनकी सुरक्षा खतरे में आ गई। ऐसे आरोपों के पीछे ज्यादातर राजनीतिक रंजिश और निजी स्वार्थ छिपे हैं। मुनीर या किसी अन्य के कारण अगर इमरान का यह हाल है, तो यह पाकिस्तान की राजनीति की कठोरता और सत्ता संघर्ष की बर्बरता को दर्शाता है। हालांकि, इस मामले में सटीक तथ्यों की कमी है, लेकिन घटनाओं की गुत्थी से साफ है कि इमरान के खिलाफ किसी बड़ी साजिश का हाथ जरूर है।
इमरान खान की जिंदगी और उनकी राजनीतिक विरासत को लेकर जनमानस में गहरा विश्वास है। लोग चाहते हैं कि उनके साथ हो रहे अत्याचारों को रोका जाए और उन्हें न्याय मिले। उनके समर्थक लगातार आवाज उठा रहे हैं कि सरकार उन्हें जान से मारने जैसी परिस्थितियों में न डालें, बल्कि उचित स्वास्थ्य सेवाएं और मानवीय अधिकार मुहैया कराएं। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन भी इस मामले पर नज़र बनाए हुए हैं और पाकिस्तान की जेल में बंद राज्य नेताओं के प्रति न्याय की मांग कर रहे हैं।इमरान की बंदी और उनकी सुरक्षा को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता ने पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिरता पर भी असर डाला है। इससे वहां की जनता में असंतोष की लहर फैल रही है, जो आगे जाकर बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल का कारण बन सकती है। यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यह पूरे देश के न्याय और लोकतंत्र के सवाल को खड़ा कर रहा है।
ऐसे समय में, जब इमरान खान से मिलने का कोई साधन नहीं है और उनकी कोई स्पष्ट सूचना नहीं मिल रही, उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ती ही जा रही है। उनकी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी ताकतें उन्हें खत्म करने के लिए सारी चालें आज़मा रही हैं। उनकी परिस्थिति पर पर्दा डालने के प्रयासों को देखकर लगता है कि सच को जनता से छुपाने की कोशिश की जा रही है।इमरान खान के नाम पर फैल रही अफवाहें, घटनाओं के बीच निर्मित नकारात्मक माहौल और सरकार के कठोर रवैये से यह स्पष्ट होता है कि वे किसी खतरे में जरूर हैं। समाज और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस पर बनी हुई हैं कि पाकिस्तान में लोकतंत्र और मानवाधिकारों का कितना सम्मान होता है। इस पूरी स्थिति में इमरान के समर्थक और सामाजिक संगठन लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं। वे आवाज उठाते हैं कि इमरान को सुरक्षित रखा जाए और उनके साथ किसी भी तरह के अत्याचार को रोका जाए। साथ ही, वे चाह रहे हैं कि सरकार पारदर्शिता दिखाए और उनकी स्थिति का सही विवरण सार्वजनिक करे, ताकि अफवाहों और आशंकाओं को समाप्त किया जा सके पाकिस्तान के अंदर और बाहर यह मामला एक बड़ी राजनीतिक और मानवीय चुनौती बन चुका है। इमरान खान की वर्तमान स्थिति यह दिखाती है कि सत्ता की दौड़ में यदि किसी को समाप्त करने का फैसला कर लिया जाए तो उसे रोक पाना आसान नहीं होता। इसीलिए पूरी दुनिया और खासकर जो लोग पाकिस्तान के लोकतंत्र और मानवाधिकारों की चिंता करते हैं, इमरान के मामले को गंभीरता से देख रहे हैं और उनके सम्मान और सुरक्षा के लिए आवाज उठा रहे हैं।





