आखरी कार्यदिवस पर भावुक हुए भारत मे मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई

Chief Justice of India B R Gavai gets emotional on his last working day

प्रमोद कुमार

नई दिल्ली : भारत मे मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई ने अपने विदाई भाषण मे कहा, हर पद सत्ता का नही, लेकिन राष्ट्र की सेवा करने का है। आज मै जिस मुकाम पर हुं वह केवल संविधान, डा अम्बेडकर और मेरे पिता के मार्गदर्शन के कारण सम्भव हो सका है। मै एक नगर पालिका के स्कूल में जमीन पर बैठकर पढने वाला लडका इस पद तक पहुंचना सोचने के लिए भी मुश्किल था।

बी आर गवई ने कहा कि वह लगभग चार दशक से अपने कानूनी एवं न्यायिक यात्रा के अंत मे इस सतुष्टी के साथ विदाई ले रहा हूं कि मुझसे जो भी देश के लिए सेवा हो सकता था, काफी जाबवदेही के साथ किया। मै 23 नवम्बर 2025 को इस न्याय के संस्था को एक छात्र के रुप में छोड रहा हूं।

इस पीठ मे सी जे आई नामित और जस्टिस के विनोद चन्द्रन भी शामिल थे। सी जे आई गबई ने विदाई मे कहा आप सभी की बातों को सुनकर समारोह मे और खासकर अटार्नी जनरल आर वेक्टरमनी की हार्दिक भावनाओं और कपिल सिब्बल की कविताए से मेरी आवाज थम सी गई है। विदाई समारोह मे सी जे आई गवई के बारे मे ज्सटिस सूर्यकांत ने कहा वो मेरे सिर्फ सहकर्मी ही नही बल्कि वो मेरे भाई के समान भी है। विदाई समारोह के समय एक पल ऐसा भी आया जब एक वकील जया सुकिन ने फूल बरसाने के कोशिश की। उसने पैकेट जैसे की खोला और कुछ पंखुडियां हाथ मे ले ली तब तुरन्त सी जे आई देखते ही बोले आप इसे मत फेकिएं, इसे किसी को दे दिजीए, ये बातें सुनकर अदालत कक्ष में हंसी गुज उठीं।

सीजेआई गवई का कार्यकाल 6 महीने व 10 दिनों का रहा। सी जे आई गवई इस संविधानिक पद पर 14 मई को आसीन हुए । वे इस पद पर पहले बौद्ध एवं दूसरे दलित रहे।