कोटा–चंबल में क्रूज पर्यटन: विकास और संरक्षण का नया संगम

Cruise tourism in Kota-Chambal: A new confluence of development and conservation

गोपेन्द्र नाथ भट्ट

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा कोटा–चंबल नदी में क्रूज सेवा शुरू करने के प्रयासों की घोषणा ने राजस्थान के पर्यटन मानचित्र पर एक नई संभावनाओं की रेखा खींच दी है। चंबल नदी को लंबे समय तक बीहड़ों, दुर्दांत डकैतों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों से जोड़कर देखा जाता रहा, लेकिन अब वही चंबल अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता और शांत प्रवाह के कारण विकास के नए अध्याय की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। कोटा जैसे शिक्षा और औद्योगिक शहर के लिए यह पहल पर्यटन के क्षेत्र में एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम साबित हो सकती है।

चंबल नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि उत्तर भारत की सबसे स्वच्छ नदियों में से एक मानी जाती है। यह नदी घड़ियाल, मगरमच्छ, कछुए और दुर्लभ गंगा डॉल्फिन जैसी प्रजातियों का सुरक्षित आश्रय है। चंबल नेशनल सैंक्चुअरी के रूप में इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान भी मिली है। ऐसे में क्रूज पर्यटन की योजना तभी सार्थक मानी जाएगी, जब विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखा जाए। ओम बिरला ने भी स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह की पर्यटन गतिविधि में पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान न पहुंचे, इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा।

कोटा पहले से ही देशभर में शिक्षा नगरी के रूप में प्रसिद्ध है। हर वर्ष लाखों छात्र यहां पढ़ाई के लिए आते हैं, लेकिन पर्यटन के लिहाज से शहर की पहचान अपेक्षाकृत सीमित रही है। चंबल में क्रूज सेवा शुरू होने से कोटा की छवि केवल कोचिंग हब तक सीमित न रहकर एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में उभर सकती है। इससे शहर की अर्थव्यवस्था को नया बल मिलेगा और होटल, परिवहन, गाइड, हस्तशिल्प तथा स्थानीय उत्पादों से जुड़े लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

क्रूज पर्यटन का अर्थ केवल मनोरंजन नहीं होता, बल्कि यह क्षेत्र की संस्कृति, इतिहास और प्राकृतिक धरोहर को दर्शाने का एक प्रभावी माध्यम भी है। चंबल के किनारे बसे गांवों की लोक संस्कृति, मेले, पारंपरिक भोजन और हस्तशिल्प को यदि इस योजना से जोड़ा जाए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है। यह पहल ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को भी आगे बढ़ाएगी।

हालांकि इस महत्वाकांक्षी योजना के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। चंबल नदी संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्र है, जहां मोटर चालित नौकाओं, शोर और प्रदूषण से वन्यजीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए क्रूज संचालन के लिए आधुनिक, कम-ध्वनि और प्रदूषण रहित तकनीक का उपयोग अनिवार्य होगा। साथ ही, यात्रियों की संख्या, समय और मार्ग को लेकर सख्त नियम बनाने होंगे। पर्यावरण विशेषज्ञों, वन विभाग और स्थानीय समुदाय की सहभागिता के बिना यह योजना सफल नहीं हो सकती।

ओम बिरला का यह दृष्टिकोण उल्लेखनीय है कि विकास केवल कंक्रीट और ढांचों से नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर ही टिकाऊ हो सकता है। केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से यदि यह परियोजना आगे बढ़ती है, तो यह राजस्थान के लिए एक मॉडल परियोजना बन सकती है, जिसे अन्य नदियों और क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकेगा। इससे ‘सस्टेनेबल टूरिज्म’ की अवधारणा को मजबूती मिलेगी।

कुल मिलाकर, कोटा–चंबल में क्रूज सेवा शुरू करने का प्रस्ताव सिर्फ एक पर्यटन योजना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास, रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन साधने का प्रयास है। यदि यह पहल सावधानी, पारदर्शिता और दीर्घकालिक दृष्टि के साथ लागू की जाती है, तो चंबल नदी का यह नया सफर न केवल कोटा बल्कि पूरे राजस्थान के लिए समृद्धि और पहचान का प्रतीक बन सकता है।