यूपी कांग्रेस ने 2027 तैयारी तेज की, मनरेगा-एसआईआर और पंचायत चुनाव पर जोर

UP Congress steps up preparations for 2027, focusing on MNREGA-SIR and Panchayat elections

अजय कुमार

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन राजनीतिक हलचल तेज हो चुकी है। कांग्रेस पार्टी ने अपनी कमर कस ली है और लखनऊ के प्रदेश मुख्यालय में हुई पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी की बैठक में चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दिया गया। इस बैठक में पार्टी के शीर्ष नेता जुटे और मनरेगा, एसआईआर जैसे ज्वलंत मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने साफ कहा कि हर कार्यकर्ता मैदान में उतरेगा और सरकार को घेरने की पूरी तैयारी है। बैठक की शुरुआत महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई, जो पार्टी की गांधीवादी विरासत को याद दिलाती है। यहां से निकले पांच सूत्रीय संकल्प ने साफ कर दिया कि कांग्रेस अब सड़क से पंचायत तक आंदोलन तेज करेगी।

बैठक में प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय, अजय राय समेत सभी वरिष्ठ नेता, सांसद और विधायक मौजूद रहे। चर्चा का केंद्र रहा मिशन 2026, जो पंचायत चुनावों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। पार्टी ने फैसला लिया कि संविधान संवाद महापंचायत के जरिए संवैधानिक मूल्यों की रक्षा पर जोर दिया जाएगा, जबकि मनरेगा बचाओ संग्राम से ग्रामीण रोजगार के मुद्दे पर योगी सरकार को कटघरे में खड़ा किया जाएगा। अजय राय ने कहा कि मनरेगा पर 100 दिनों का विशेष कार्यक्रम शुरू होगा, क्योंकि भाजपा सरकार इसे खत्म करने पर तुली है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि कई महीनों से मजदूरों को मानदेय नहीं मिला है और लाखों परिवार प्रभावित हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत 2025 में यूपी में सिर्फ 40 प्रतिशत लक्ष्य ही हासिल हो पाया, जबकि केंद्र ने फंड में 20 प्रतिशत की कटौती की है। कांग्रेस इसे महात्मा गांधी की सोच का अपमान बता रही है और वादा कर रही है कि सत्ता में आने पर हर मजदूर को काम दिलाएगी।

एसआईआर (स्पेशल इनटेंसिव रिवीजन) के मुद्दे पर भी बैठक में तीखी चर्चा हुई। अजय राय ने चुनाव आयोग और भाजपा पर साजिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जल्दबाजी में लिए गए फैसलों से दर्जनों बीएलओ की मौत हो गई, जिनमें हार्ट अटैक और ब्रेन हेमरेज के मामले शामिल हैं। आंकड़े बताते हैं कि एसआईआर प्रक्रिया में यूपी में 1.5 करोड़ से ज्यादा नाम कटे, जिनमें ज्यादातर गरीब और अल्पसंख्यक वोटर हैं। कांग्रेस इसे लोकतंत्र पर हमला बता रही है और मांग कर रही है कि मृत बीएलओ के परिवारों को मुआवजा दिया जाए। राय ने कहा कि चुनाव आयोग को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी, वरना जनता सड़क पर उतरेगी। पार्टी ने ओबीसी डिपार्टमेंट के तहत बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला लिया, जिसमें प्रियंका गांधी का जन्मदिन पूरे प्रदेश में धूमधाम से मनाया जाएगा। 12 जनवरी से शुरू होने वाला परिवर्तन प्रतिज्ञा अभियान पूरे साल चलेगा, जिसमें ओबीसी मोर्चा की भूमिका अहम होगी।

कांग्रेस की यह तैयारी सिर्फ बैठक तक सीमित नहीं है। पार्टी ने फैसला लिया कि लखनऊ के रमाबाई मैदान में एक विशाल महारैली आयोजित की जाएगी, जिसमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जैसे राष्ट्रीय नेता शामिल हो सकते हैं। इससे पहले, जनवरी से फरवरी तक पूरे यूपी में 17 से ज्यादा रैलियां होंगी, जो वाराणसी से शुरू होकर गाजियाबाद और लखनऊ तक पहुंचेंगी। वाराणसी में 8 फरवरी को संविधान से जुड़ी महारैली का आयोजन होगा, जहां अजय राय खुद संगठन सृजन और जनता से संवाद पर जोर देंगे। यह रैलियां पंचायत चुनावों को ध्यान में रखकर हैं, जहां कांग्रेस अकेले लड़ने का ऐलान कर चुकी है। लोकसभा चुनाव 2024 में यूपी में 6 सीटें जीतने के बाद पार्टी का हौसला बढ़ा है और अब 403 विधानसभा सीटों पर तैयारी चल रही है। सांसद इमरान मसूद ने साफ कहा कि कांग्रेस अपनी ताकत पर भरोसा कर रही है और किसी से सीटें मांगने की जरूरत नहीं।

पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि प्रियंका गांधी फिर से यूपी की कमान संभाल सकती हैं। हाल ही में दिल्ली में हुई बैठक में उनके साथ यूपी नेताओं की तस्वीरों ने इसकी पुष्टि की। 2022 के चुनाव में प्रियंका ने लड़की हूं, लड़ सकती हूं कैंपेन चलाया था, जिसने महिलाओं में उत्साह भरा। अब 2027 में भी वैसा ही कुछ देखने को मिल सकता है। कांग्रेस का फोकस ग्रामीण इलाकों पर है, जहां मनरेगा जैसे मुद्दे सीधे लोगों से जुड़े हैं। आंकड़ों के मुताबिक, यूपी में मनरेगा के तहत 2025 में सिर्फ 2.5 करोड़ जॉब कार्ड धारकों को काम मिला, जबकि लक्ष्य 4 करोड़ का था। कांग्रेस इसे भाजपा की विफलता बता रही है और मनरेगा बचाओ चौपाल जैसे कार्यक्रमों से गांव-गांव पहुंचेगी। मऊआइमा में हाल ही हुई चौपाल में पार्टी ने भाजपा पर मतदाता सूची से नाम हटाने की साजिश का आरोप लगाया।

बैठक में कांग्रेस के 140 साल के इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने का भी फैसला हुआ। पार्टी कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग दी जाएगी कि कैसे बलिदान की गाथा को लोगों तक पहुंचाया जाए। इसके लिए डिजिटल कैंपेन के साथ-साथ सड़क पर आंदोलन होंगे। अविनाश पांडेय ने कहा कि जनवरी से दो महीनों में 17 सार्वजनिक सभाएं होंगी, जो संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करेंगी। पार्टी ने साफ कर दिया कि 2027 में इंडिया गठबंधन के साथ लड़ सकती है, लेकिन अपनी शर्तों पर। अखिलेश यादव ने भी हाल ही में कहा कि सपा कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी, जो विपक्षी एकता को मजबूत करेगा। लेकिन कांग्रेस की अपनी तैयारी देखकर लगता है कि वह किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहती।

यूपी की सियासत में 2026 में चार बड़े चुनाव हैं- राज्यसभा, एमएलसी, पंचायत और दो विधानसभा उपचुनाव। ये सभी 2027 के लिए सेमीफाइनल जैसे हैं। कांग्रेस इन्हें जीतकर अपनी ताकत दिखाना चाहती है। राज्यसभा में यूपी से 10 सीटें खाली होंगी और विधायकों की संख्या के आधार पर चुनाव होगा। फिलहाल यूपी विधानसभा में 403 सीटें हैं, जिनमें भाजपा के पास बहुमत है। लेकिन लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने 43 सीटें जीतीं, जो भाजपा को 33 पर रोक दिया। यह आंकड़ा कांग्रेस को उम्मीद दे रहा है कि 2027 में बड़ा उलटफेर हो सकता है। पार्टी ने संविधान संवाद-100 दिन की कार्ययोजना शुरू की, जिसमें हर ग्राम प्रधान और मनरेगा मजदूर तक राहुल गांधी की चिट्ठी पहुंचेगी।

लखनऊ बैठक में शामिल नेताओं में प्रमोद तिवारी, केएल शर्मा, अजय कुमार लल्लू, सुप्रिया श्रीनेत, इमरान मसूद जैसे चेहरे थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि कांग्रेस अब कमजोर नहीं है। पार्टी का फोकस ओबीसी, दलित और अल्पसंख्यकों पर है, जो यूपी की 80 प्रतिशत आबादी हैं। मनोज यादव ने बताया कि प्रियंका गांधी के जन्मदिन से अभियान शुरू होगा, जिसमें हजारों कार्यकर्ता जुटेंगे। कांग्रेस की यह रणनीति भाजपा को बैकफुट पर ला सकती है, क्योंकि मनरेगा और एसआईआर जैसे मुद्दे सीधे गरीबों से जुड़े हैं। यूपी में बेरोजगारी दर 7.5 प्रतिशत है और ग्रामीण इलाकों में यह 10 प्रतिशत से ज्यादा। कांग्रेस इसे भुनाना चाहती है।

कुल मिलाकर, कांग्रेस की यह बैठक सिर्फ एक मीटिंग नहीं, बल्कि चुनावी बिगुल है। पार्टी ने साफ कर दिया कि वह सत्ता विरोधी आंदोलनों को तेज करेगी और हर स्तर पर सरकार को चुनौती देगी। 2027 में यूपी की सियासत दिलचस्प होगी, जहां कांग्रेस अपनी पुरानी ताकत वापस लाने की कोशिश में है। कार्यकर्ताओं का उत्साह देखकर लगता है कि आने वाले दिन विपक्ष के लिए बेहतर होंगे। लेकिन भाजपा भी चुप नहीं बैठेगी, उसकी अपनी रणनीति है। फिलहाल, कांग्रेस की तैयारी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।