ब्लैक स्वान : अनिश्चितता के युग में असंभव का सत्य

Black Swan: The Truth of the Impossible in an Age of Uncertainty

रविकान्त राऊत

दुनिया अक्सर उन घटनाओं से हिल जाती है जिनकी कल्पना किसी ने नहीं की होती। सब कुछ सामान्य लगता है, और तभी एक अज्ञात विस्फोट, न किसी गणित में, न किसी योजना में दर्ज, सब बदल देता है। यही है “ब्लैक स्वान”, नसीम निकोलस तालेब की उस गूढ़ अवधारणा का नाम, जिसने मानव सभ्यता के आत्मविश्वास पर सबसे गहरा प्रश्नचिह्न लगाया।

तालेब के अनुसार, “ब्लैक स्वान” ऐसी घटना है जो तीन गुणों से पहचानी जाती है, वह अत्यंत दुर्लभ होती है, घटने पर उसका प्रभाव विनाशकारी या निर्णायक होता है, और घटने के बाद लोग उसे “तर्कसंगत” ठहराने की कोशिश करते हैं। मनुष्य की यही आदत, असंभव को घट जाने के बाद उसे कहानी में बदल देने की, इतिहास की सबसे बड़ी बौद्धिक विडंबना है।

मानव सभ्यता का हर मोड़ किसी न किसी ब्लैक स्वान से जुड़ा है। 1914 में एक ऑस्ट्रियाई राजकुमार की हत्या ने दो विश्वयुद्धों की भूमिका रच दी। 1945 में हिरोशिमा पर गिरा बम विज्ञान की शक्ति को भय में बदल गया। 1989 में बर्लिन की दीवार गिरी तो किसी ने नहीं सोचा था कि शीत युद्ध एक रात में खत्म हो जाएगा। और फिर 2008 आया, जब विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कुछ महीनों में घुटनों पर थी। इन सभी घटनाओं का साझा सूत्र यही था, इन्हें किसी ने आते नहीं देखा।

मनुष्य भविष्य का गणित गढ़ने में इतना मग्न है कि वह “अज्ञात की सच्चाई” भूल चुका है। अर्थशास्त्रियों ने बाजार के संतुलन के सिद्धांत बनाए, राजनेताओं ने स्थिरता की नीतियाँ बनाईं, वैज्ञानिकों ने “सटीक भविष्यवाणी” का दावा किया, पर इतिहास बार-बार साबित करता रहा कि सबसे बड़ी घटनाएँ सांख्यिकीय रूप से असंभव थीं। कोविड-19 इसका सबसे ताज़ा उदाहरण है, एक वायरस ने दुनिया की अर्थव्यवस्था, राजनीति, जीवन और मृत्यु के अर्थ को ही पुनर्लेखित कर दिया।

ब्लैक स्वान का दर्शन केवल आपदाओं की कथा नहीं है, यह उस “मानवीय अंधेपन” का भी विश्लेषण है जिसमें हम जी रहे हैं। हम वही देखते हैं जो हमारे विचारों से मेल खाता है, इसे तालेब “कन्फर्मेशन बायस” कहते हैं। हम हर असफलता को किसी ज्ञात कारण से जोड़ने की कोशिश करते हैं ताकि यह भ्रम बना रहे कि हम नियंत्रण में हैं। पर सच यह है कि जीवन का सबसे बड़ा हिस्सा हमारे नियंत्रण में कभी था ही नहीं।

ब्लैक स्वान केवल राजनीति, अर्थशास्त्र या विज्ञान की घटना नहीं, यह अस्तित्व का रूपक है। एक व्यक्ति का जीवन भी ऐसे ही अनिश्चितताओं का जाल है। किसी दुर्घटना, किसी अवसर या किसी आकस्मिक मिलन से जीवन की दिशा पलट जाती है। हर व्यक्ति के जीवन में कहीं न कहीं एक ब्लैक स्वान घटता है, और फिर वह अपने अतीत को इस तरह पुनर्गठित करता है मानो सब कुछ पूर्वनियोजित था। यही आत्मवंचना का आरंभ है।

तालेब ने अपनी किताब में यह भी बताया कि हमें ब्लैक स्वान से डरना नहीं चाहिए, बल्कि उसके लिए तैयार रहना चाहिए। जो व्यक्ति या समाज अनिश्चितता को स्वीकार करता है, वही वास्तव में टिकता है। यूनानी दार्शनिक हेराक्लिटस ने कहा था, “जीवन में परिवर्तन ही एकमात्र स्थायित्व है।” तालेब इसी विचार को आधुनिक रूप में सामने लाते हैं, वे कहते हैं कि हमें “fragile” नहीं, बल्कि “antifragile” बनना चाहिए, यानी संकट से टूटना नहीं, बल्कि हर झटके से और मजबूत होना।

आज की डिजिटल सभ्यता एक अत्यंत “Extremistan” की अवस्था में जी रही है, एक ट्वीट अरबों डॉलर कंपनियों का मूल्य गिरा सकता है, एक ऐप पूरी उद्योग-व्यवस्था को नष्ट या पुनर्जन्म दे सकता है, एक वैज्ञानिक खोज मानवीय चेतना की परिभाषा बदल सकती है। यह दुनिया औसत के नियमों पर नहीं, बल्कि चरम घटनाओं पर चल रही है। और जो इस चरमता को समझता है, वही भविष्य का वास्तुकार बनता है।

हमारे समाज में अक्सर कहा जाता है कि “योजना बनाओ, लक्ष्य तय करो, और नियंत्रित रहो।” पर ब्लैक स्वान कहता है, “असंभव को भी जगह दो।” अपने जीवन, अपने कार्य और अपने विचारों में कुछ ऐसा अवकाश रखो जहाँ अज्ञात प्रवेश कर सके। नवाचार, कला, प्रेम, खोज, ये सब ब्लैक स्वान की संतानें हैं। इन्हें कभी पूर्वनिर्धारित नहीं किया जा सकता।

शायद इसलिए दुनिया के सबसे बड़े बदलाव हमेशा अप्रत्याशित रहे हैं। बौद्ध ने सिंहासन छोड़ा, न्यूटन पर सेब गिरा, गांधी दक्षिण अफ्रीका की किसी रेलगाड़ी में अपमानित हुए, इंटरनेट का बीज सैन्य प्रयोगशाला में पड़ा, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज हमारी चेतना का प्रतिबिंब बन रही है। यह सब योजनाओं के परिणाम नहीं, आकस्मिकताओं के चमत्कार हैं।

ब्लैक स्वान हमें यह सिखाता है कि अराजकता में ही नया क्रम जन्म लेता है। जब हम अनिश्चितता को शत्रु नहीं, बल्कि शिक्षक की तरह देखने लगते हैं, तभी विकास संभव होता है। दुनिया का हर सृजन, हर खोज, हर प्रेम और हर क्रांति इसी अज्ञात की कोख से निकली है।

नसीम तालेब की पुस्तक कोई वित्तीय विश्लेषण नहीं, बल्कि एक दार्शनिक चेतावनी है, कि मनुष्य चाहे जितनी भी तकनीक, डेटा और भविष्यवाणी का गर्व कर ले, वह कभी भी “पूरा ज्ञाता” नहीं बन सकता। ज्ञान की विनम्रता ही जीवित रहने की एकमात्र शर्त है।

जीवन के समंदर में ब्लैक स्वान वह लहर है जो हमें याद दिलाती है, दिशा जितनी भी तय हो, भाग्य के किनारे हमेशा अधूरे रहते हैं। हमें सिर्फ इतना करना है कि नाव मज़बूत रखी जाए, पतवार हाथ में रहे, और हृदय में यह साहस कि जब अगला तूफ़ान आए, तो हम उसे डर की नहीं, खोज की दृष्टि से देखें।