सुनील कुमार महला
स्वामी विवेकानंद जी ने यह बात कही है कि-‘पुस्तकें वह दीपक हैं जो अज्ञान के अंधकार को दूर करती हैं।’वास्तव में सच तो यह है कि पुस्तकें मनुष्य की सबसे सच्ची मित्र होती हैं, जो बिना कुछ कहे हमें जीवन का सही मार्ग दिखाती हैं। अच्छी किताबें ज्ञान का भंडार होती हैं और अज्ञान के अंधकार को दूर कर सोचने-समझने की शक्ति विकसित करती हैं। वे अनुभवों, विचारों और संस्कारों से हमें समृद्ध बनाती हैं तथा जीवन भर हमारा साथ निभाती हैं। सच ही कहा गया है कि पढ़ने की आदत मनुष्य के व्यक्तित्व को निखारती है और उसे बेहतर इंसान बनाती है। वहीं पर पुस्तक मेला ज्ञान, विचारों और संस्कृति के आदान-प्रदान का जीवंत मंच होता है, जहां पाठकों को नई-पुरानी पुस्तकों, लेखकों और प्रकाशकों से सीधे जुड़ने का अवसर मिलता है। यह पठन-पाठन की रुचि को बढ़ावा देकर समाज में बौद्धिक चेतना को मजबूत करता है। साथ ही, पुस्तक मेला साहित्य, शिक्षा और रचनात्मकता को जन-जन तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाता है। इस क्रम में,हाल ही में नई दिल्ली के भारत मंडपम (प्रगति मैदान) में आयोजित दिल्ली विश्व पुस्तक मेला–2026 (53वां संस्करण) दुनिया के सबसे बड़े पुस्तक मेलों में से एक है। यह भव्य आयोजन 10 जनवरी 2026 से 18 जनवरी 2026 तक, कुल 9 दिनों के लिए आयोजित किया जा रहा है। इस विशाल साहित्यिक उत्सव का आयोजन भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था राष्ट्रीय पुस्तक ट्रस्ट (एनबीटी) द्वारा भारतीय व्यापार संवर्धन संगठन (आईटीपीओ) के सहयोग से किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि न्यू दिल्ली वर्ल्ड बुक फेयर का 53वां संस्करण भी शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय पुस्तक ट्रस्ट की ओर से ही आयोजित किया गया है।पाठकों को बताना चाहूंगा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 10 जनवरी 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में न्यू दिल्ली वर्ल्ड बुक फेयर 2026 का विधिवत उद्घाटन किया। उद्घाटन अवसर पर उन्होंने पुस्तक ‘द सागा ऑफ कुडोपाली: 1857 की अनकही कहानी’ का विमोचन किया, जिसे हिंदी सहित कई भारतीय भाषाओं और स्पेनिश भाषा में प्रकाशित किया गया है। यह पुस्तक ओडिशा के संबलपुर क्षेत्र में वीर सुरेंद्र साई के नेतृत्व में हुए ऐतिहासिक विद्रोह और शहीदों के बलिदान को सम्मानित करती है। इस वर्ष का पुस्तक मेला कई मायनों में विशेष है, क्योंकि पहली बार प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है। मेले में 30 से अधिक देशों के 1000 से ज्यादा प्रकाशक और लगभग 3000 स्टॉल शामिल हैं, जहाँ हिंदी, अंग्रेज़ी सहित अन्य भारतीय और विदेशी भाषाओं की पुस्तकों का विशाल संग्रह उपलब्ध है। इस बार मेले की मुख्य थीम -‘भारतीय सैन्य इतिहास: वीरता और बुद्धिमत्ता @75’ (इंडियन मिलिट्री हिस्ट्री:वेलोर एंड विज्डम) रखी गई है, जिसके अंतर्गत भारतीय सशस्त्र बलों के शौर्य, इतिहास और योगदान को साहित्य और प्रदर्शनी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।थीम मंडप लगभग 1000 वर्ग मीटर में फैला एक अत्याधुनिक इमर्सिव (त्रि-आयामी) अनुभव प्रदान करता है, जहाँ भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के 75 वर्षों के गौरवशाली इतिहास को जीवंत रूप में दर्शाया गया है। यहाँ अर्जुन टैंक, आईएनएस विक्रांत और एलसीए तेजस के आदमकद मॉडल प्रदर्शित किए गए हैं, जो मेले के प्रमुख आकर्षण हैं। साथ ही, देश के 21 परमवीर चक्र विजेताओं को विशेष श्रद्धांजलि भी दी गई है।इस पुस्तक मेले में 600 से अधिक साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम, लेखक संवाद, कवि सम्मेलन तथा बच्चों के लिए विशेष गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं, जिससे यह मेला लेखकों, प्रकाशकों और पाठकों के लिए एक भव्य साहित्यिक उत्सव बन गया है। आज के डिजिटल, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में जब पुस्तकों के प्रति रुचि कम होती जा रही है, ऐसे समय में यह मेला विशेष रूप से युवाओं (जेन-जेड) और बच्चों में पठन संस्कृति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।मेले में कला और संस्कृति, इतिहास, सिनेमा, व्यक्तित्व और जीवनियाँ, भूमि और लोग, गांधीवादी साहित्य तथा बाल साहित्य जैसे विविध विषयों पर पुस्तकें उपलब्ध हैं। प्रीमियम पुस्तकों की श्रेणी में ‘राष्ट्रपति भवन श्रृंखला’, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के चयनित भाषण, महात्मा गांधी की रचनाएँ तथा पंडित मदन मोहन मालवीय की रचनाएँ विशेष रूप से शामिल हैं। पुस्तकों के समृद्ध संग्रह के साथ-साथ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का प्रकाशन विभाग भी मेले में अपनी प्रसिद्ध पत्रिकाएँ योजना, कुरुक्षेत्र, आजकल और बाल भारती प्रदर्शित कर रहा है। इसके अतिरिक्त, आगंतुक यहाँ से रोजगार समाचार की वार्षिक सदस्यता भी खरीद सकते हैं। कहना ग़लत नहीं होगा कि नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला एक अत्यंत लोकप्रिय और प्रतिष्ठित आयोजन है, जिसमें देश-विदेश के नामचीन प्रकाशक भाग लेते हैं। यहाँ पुस्तक विमोचन, लेखक से मिलने के कार्यक्रम, युवाओं और बच्चों के लिए विशेष गतिविधियाँ तथा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ आयोजित की जाती हैं, जिनका आगंतुक भरपूर आनंद लेते हैं। कालजयी कृतियों से लेकर समकालीन लेखन, बाल साहित्य, अनुवाद और विचारोत्तेजक चर्चाओं तक, यह मेला प्रकाशकों, लेखकों और पाठकों को एक जीवंत मंच पर एकत्र करता है।वास्तव में, पुस्तकें ज्ञान की वाहक होती हैं, जो पीढ़ियों को जोड़ती हैं, सभ्यताओं की स्मृतियों को संजोती हैं और समाज को दिशा देती हैं। इसी कारण किसी भी पुस्तक मेले का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत व्यापक होता है। पिछले कई वर्षों से दिल्ली में आयोजित यह पुस्तक मेला विश्वभर के प्रकाशकों के लिए एक प्रतिष्ठित और विश्वसनीय मंच बन चुका है। जानकारी के अनुसार, इस बार मेले में करीब 20 लाख से अधिक पाठकों के आने की उम्मीद है।इस मेले का प्रमुख उद्देश्य ज्ञान का लोकतंत्रीकरण करना है, ताकि निःशुल्क प्रवेश के माध्यम से आर्थिक स्थिति किसी के पठन और शिक्षा के मार्ग में बाधा न बने। साथ ही, डिजिटल और पारंपरिक पठन के संगम को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय के माध्यम से डिजिटल रीडिंग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मेले में लगाए गए डिजिटल कियोस्क से पाठक 6000 से अधिक निःशुल्क ई-बुक्स क्यूआर कोड स्कैन कर सीधे अपने मोबाइल फोन में डाउनलोड कर सकते हैं।इस वर्ष कतर को ‘अतिथि देश’ (गेस्ट आफ आनर) बनाया गया है, जिसका पवेलियन कतर की पारंपरिक वास्तुकला पर आधारित है, जबकि स्पेन को ‘फोकस कंट्री’ के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जहाँ स्पेनिश साहित्य और नवाचार पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके अलावा, ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष और सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में विशेष प्रदर्शनियाँ भी लगाई गई हैं। वहीं पीएम-युवा 3.0 योजना के अंतर्गत 22 भारतीय भाषाओं के युवा लेखकों को मेंटरशिप और अपनी पुस्तकों के प्रदर्शन का अवसर प्रदान किया जा रहा है। अंत में यही कहूंगा कि दिल्ली पुस्तक मेला 2026 साहित्य, संस्कृति और पठन-परंपरा के क्षेत्र में एक सफल, प्रेरक और ऐतिहासिक आयोजन के रूप में उभरा है। भारत मंडपम में आयोजित किए जा रहे इस पुस्तक मेले में देश-विदेश के प्रकाशकों, लेखकों और पाठकों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिल रही है। निःशुल्क प्रवेश की व्यवस्था ने सभी वर्गों के लोगों को पुस्तकों से जोड़ने का अवसर दिया है, जिससे पाठक संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कुल मिलाकर, दिल्ली पुस्तक मेला 2026 न केवल पुस्तक उद्योग को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है, बल्कि समाज और युवाओं में पठन संस्कृति को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।





