प्राकृतिक आपदाओं के बीच मानवता की उम्मीद: एनडीआरएफ की भूमिका और योगदान

Humanity's Hope in the Midst of Natural Disasters: The Role and Contribution of the NDRF

सुनील कुमार महला

19 जनवरी को राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) स्थापना दिवस मनाया जाता है, क्यों कि वर्ष 2006 में इसी दिन एनडीआरएफ का गठन किया गया था।यह बल प्राकृतिक व मानव-निर्मित आपदाओं में राहत और बचाव कार्य के लिए जाना जाता है। पाठकों को बताता चलूं कि एनडीआरएफ का आदर्श वाक्य ‘आपदा सेवा सदैव सर्वत्र’ है, जिसका अर्थ है-‘किसी भी आपदा में, हमेशा और हर जगह सेवा के लिए तत्पर।’ पाठक जानते होंगे कि प्राकृतिक व मानव-निर्मित आपदाएं वे घटनाएँ हैं जो व्यापक स्तर पर जीवन, संपत्ति और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाती हैं।भूकंप, बाढ़, सूखा, चक्रवात, तूफान, भूस्खलन, हिमस्खलन, जंगल की आग, सुनामी, बादल फटना, लू और शीत लहर आदि प्राकृतिक आपदाएं तथा औद्योगिक दुर्घटनाएं, रासायनिक/गैस रिसाव, परमाणु दुर्घटनाएं, आग लगना, इमारत या पुल गिरना, तेल रिसाव, खनन हादसे, रेल-सड़क-हवाई दुर्घटनाएं, आतंकवादी हमले और युद्ध मानव-निर्मित आपदाएं हैं। वास्तव में प्राकृतिक आपदाएं प्रकृति की प्रक्रियाओं के कारण होती हैं, जिन पर मानव का सीधा नियंत्रण नहीं होता, वहीं दूसरी ओर मानव-निर्मित आपदाएं मानवीय गतिविधियों, लापरवाही या तकनीकी विफलताओं के कारण उत्पन्न होती हैं।संक्षेप में कहें तो जहां एक ओर प्राकृतिक आपदाएं प्रकृति से आती हैं, वहीं दूसरी ओर मानव-निर्मित आपदाएं मानव की गलतियों या क्रियाओं का परिणाम होती हैं, और दोनों ही हमारे समाज,देश व अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डालती हैं।

वास्तव में आपदा प्रबंधन राष्ट्रीय प्राथमिकता है और भारत सरकार ने देश में आपदाओं से निपटने की व्यवस्था को आधुनिक और मजबूत बनाने के उद्देश्य से अगस्त 1999 में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया, और बाद में गुजरात भूकंप की विभीषिका को देखते हुए एक राष्ट्रीय समिति भी बनाई। इन समितियों का मुख्य लक्ष्य केवल राहत कार्य तक सीमित न रहकर, भविष्य की आपदाओं के लिए ठोस पूर्व-तैयारी करना और नुकसान को कम करने के लिए एक प्रभावी सरकारी ढांचा तैयार करना था। संक्षेप में कहें तो इन पहलों का उद्देश्य भारत में आपदा प्रबंधन को एक व्यवस्थित और वैज्ञानिक रूप देना था ताकि जान-माल की क्षति को न्यूनतम किया जा सके। यहां पाठकों को बताता चलूं कि दसवीं पंचवर्षीय योजना (2002-07) के दस्तावेज़ में पहली बार, आपदा प्रबंधन पर एक विस्तृत अध्याय जारी किया गया था और अंततः 23 दिसंबर, 2005 को भारत सरकार द्वारा ‘आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005’ को अधिनियमित किया गया, जिसके तहत ‘राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण’ (एन.डी.एम.ए.) एवं ‘राष्ट्रीय आपदा मोचन बल’ (एन.डी.आर.एफ.) का गठन किया गया। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) भारत में आपदा प्रबंधन के लिए गठित एक सर्वोच्च संस्था है, जिसकी स्थापना ‘आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005’ के अंतर्गत की गई थी। भारत के प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कार्य करने वाला यह निकाय देश में आपदाओं से निपटने के लिए मुख्य नीतियां, योजनाएं और दिशा-निर्देश तैयार करने हेतु उत्तरदायी है। इसका प्राथमिक उद्देश्य एक ऐसी एकीकृत और रणनीतिक प्रणाली विकसित करना है, जो संकट के समय समय पर और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित कर जान-माल के नुकसान को न्यूनतम कर सके। वास्तव में इस संस्था का मुख्य लक्ष्य आधुनिक तकनीक और सभी वर्गों की भागीदारी के माध्यम से भारत को आपदाओं के प्रति सुरक्षित और सक्षम बनाना है। यह केवल संकट आने का इंतज़ार करने के बजाय पहले से सतर्क रहने (प्रो-एक्टिव) और विकास कार्यों को आपदा-रोधी बनाने की रणनीति पर ज़ोर देती है। इसका उद्देश्य समाज में एक ऐसी संस्कृति विकसित करना है जहाँ आपदाओं को रोकने, उनकी पूर्व-तैयारी करने और उनके प्रभाव को कम करने (शमन) को प्राथमिकता दी जाए, ताकि देश का विकास टिकाऊ बना रहे।

बहरहाल, जानकारी देना चाहूंगा कि वर्तमान में एनडीआरएफ में कुल 16 बटालियन हैं। शुरुआत में इसकी 8 बटालियन थीं, जिन्हें समय के साथ देश की संवेदनशीलता को देखते हुए बढ़ाया गया है। प्रत्येक बटालियन में लगभग 1,149 कर्मी होते हैं। दरअसल, एनडीआरएफ एक विशेषज्ञ बल है जिसमें भारत के विभिन्न केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (सीएपीएफ) से जवानों को प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर लिया जाता है। दूसरे शब्दों में कहें तो एनडीआरएफ में सीधी भर्ती नहीं होती। इसके जवान सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एसएसबी और असम राइफल्स जैसे केंद्रीय सशस्त्र बलों से डेप्युटेशन पर आते हैं और विशेष प्रशिक्षण के बाद तैनात किए जाते हैं।वर्तमान में इसके संयोजन की बात करें तो इसमें सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) से 03 बटालियन,​केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) से 03 बटालियन, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआइएसएफ) से 02 बटालियन,​भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) से 02 बटालियन, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) से 03 बटालियन तथा असम राइफल्स (एआर) से 03 बटालियन शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि इन सभी बटालियनों को बाढ़, भूकंप, चक्रवात और जैविक/रासायनिक आपदाओं से निपटने के लिए आधुनिक उपकरणों और विशेष प्रशिक्षण से लैस किया गया है।​एनडीआरएफ के पास हाई-टेक सर्च कैमरे,थर्मल इमेजिंग डिवाइस,अंडरवॉटर रेस्क्यू इक्विपमेंट, प्रशिक्षित खोजी कुत्ते जैसे उपकरण होते हैं, जो मलबे में दबे लोगों को खोजने में मदद करते हैं।ये बटालियनें देश के अलग-अलग रणनीतिक हिस्सों (जैसे गुवाहाटी, कोलकाता, कटक, गांधीनगर आदि) में तैनात हैं ताकि आपदा के समय कम से कम समय में प्रतिक्रिया दी जा सके।

यदि हम यहां पर आपदा प्रबंधन में एनडीआरएफ की भूमिका की बात करें तो, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) देश में किसी भी बड़ी प्राकृतिक या मानव-जनित आपदा के समय तुरंत मदद पहुँचाने वाला विशेष बल है। इसका मुख्य काम लोगों की जान बचाना और राहत कार्यों को तेज़ व सुरक्षित तरीके से पूरा करना होता है। देश के किसी भी भाग में कोई भी आपदा आने पर एनडीआरएफ के प्रशिक्षित जवान खोज-बचाव, घायलों को सुरक्षित निकालने और राहत सामग्री पहुँचाने में प्रशासन की मदद करते हैं। यहां पाठकों को बताता चलूं कि कई बार संभावित खतरे को देखते हुए आपदा से पहले ही इसकी(एनडीआरएफ )तैनाती कर दी जाती है, ताकि नुकसान कम किया जा सके।एनडीआरएफ अन्य एजेंसियों जैसे राज्य प्रशासन, पुलिस, सेना और स्वास्थ्य सेवाओं के साथ मिलकर काम करता है, जिससे राहत और बचाव कार्य बेहतर ढंग से हो सके। इतना ही नहीं, एनडीआरएफ रेडियोलॉजिकल, जैविक, नाभिकीय और रासायनिक जैसी गंभीर आपदाओं से निपटने में भी सक्षम है। कहना ग़लत नहीं होगा कि एनडीआरएफ केवलरेस्क्यू फोर्स नहीं, बल्कि यह मल्टी-डिज़ास्टर स्पेशलिस्ट है।इस तरह, आपदा के समय यह बल देश की सुरक्षा और जन-जीवन की रक्षा में अहम भूमिका निभाता है।एनडीआरएफ को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ आपदा बलों में गिना जाता है।यह विश्व का सबसे संगठित और तेज़ प्रतिक्रिया देने वाला आपदा राहत बल है। बहुत कम लोग ही यह बात जानते होंगे कि एनडीआरएफ गोल्डन आवर’ पर विशेष फोकस करता है, जैसा कि आपदा के बाद पहले 24–72 घंटे को ‘गोल्डन आवर’ माना जाता है। एनडीआरएफ को इस तरह तैनात किया जाता है कि वह सबसे पहले घटनास्थल पर पहुँचे, क्योंकि इसी समय जीवन बचाने की संभावना सबसे अधिक होती है।साल 2021 में एनडीआरएफ ने अपनी पहली महिला बचाव दल (आल वूमेन टीम) को तैनात किया। अब महिला कर्मी भी बाढ़ और अन्य आपदाओं में रेस्क्यू ऑपरेशन का नेतृत्व कर रही हैं। ख़ासतौर पर महिलाओं और बच्चों से जुड़े राहत कार्यों में उनकी भूमिका बेहद अहम होती है।एनडीआरएफ केवल आपदा के बाद नहीं, बल्कि आपदा से पहले जागरूकता अभियान, मॉक ड्रिल और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाकर (स्कूलों, गांवों और शहरों में)लोगों को तैयार भी करती है। यह ‘आपदा मित्र’ और ‘आपदा सखी’ कार्यक्रम चलाता है,जिसके तहत लोगों को प्रशिक्षित करता है ताकि आपदा के समय स्थानीय लोग पहले रिस्पॉन्डर बन सकें। एनडीआरएफ न केवल हमारे देश में बल्कि विदेशी मिशनों में भी सक्रिय हैं। यह बल केवल भारत तक सीमित नहीं है। इसने 2011 में जापान के सुनामी और फुकुशिमा परमाणु संकट, 2015 में नेपाल के भूकंप और हाल ही में ‘ऑपरेशन दोस्त’ के तहत तुर्की-सीरिया भूकंप में जाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता का लोहा मनवाया है।

अंत में निष्कर्षत: यही कहूंगा कि 19 जनवरी 2006 को आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत स्थापित एनडीआरएफ का उद्देश्य देश में प्राकृतिक और मानव-निर्मित आपदाओं के दौरान त्वरित, प्रशिक्षित और प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करना है। एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) स्थापना दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि आपदा के समय त्वरित, संगठित और मानवीय प्रतिक्रिया कितनी आवश्यक है। अत्याधुनिक प्रशिक्षण, अनुशासन और समर्पण के बल पर एनडीआरएफ ने बाढ़, भूकंप, चक्रवात, भूस्खलन और अन्य आपदाओं में असंख्य जीवन बचाए हैं। यह बल न केवल राहत और बचाव का प्रतीक है, बल्कि आपदा प्रबंधन में जागरूकता, तैयारी और लचीलेपन की राष्ट्रीय क्षमता को भी सुदृढ़ करता है। एनडीआरएफ का योगदान सुरक्षित, सक्षम और संवेदनशील भारत के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है और एनडीआरएफ का स्थापना दिवस भारत की उस अदम्य इच्छाशक्ति का उत्सव है, जो यह सुनिश्चित करती है कि देश किसी भी विपदा के सामने घुटने नहीं टेकेगा, बल्कि और अधिक मजबूती से उठ खड़ा होगा।