बिना रजिस्ट्री करोड़ों की जमीन की बिक्री, राज्य सरकार को राजस्व में भारी नुकसान

Sale of land worth crores without registration, causing huge loss in revenue to the state government

हरीश शर्मा

मथुरा जिले के एक गांव पचहरा तहसील मांट में जमीन कारोबार से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन बिना कानूनी रजिस्ट्री कराए ही बेच दी गई। इस अवैध प्रक्रिया के चलते राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क का नुकसान हुआ है।

सूत्रों के अनुसार तहसील मांट के गांव पचहरा में सियाराम नाम के व्यक्ति ने जमीन की खरीद–फरोख्त एग्रीमेंट टू सेल, पावर ऑफ अटॉर्नी (POA) और अन्य अनौपचारिक दस्तावेजों के माध्यम से अपनी जमीन बेच दी है गई। खरीदार को कब्जा तक सौंप दिया गया, और लोगों ने जमीन पर क़ब्ज़ा लेकर मकान बना लिए हैं।लेकिन नियमों के अनुसार आवश्यक रजिस्ट्री जानबूझकर नहीं कराई गई। इससे सरकारी खजाने में जाने वाला राजस्व सीधे तौर पर प्रभावित हुआ।ये खुलासा दसको पहले भी मीडिया में किया गया था लेकिन जाँच के दौरान गांव प्रधान ने रिपोर्ट में ऐसा कुछ नहीं बताया था।

इस मामले में ग्राम प्रधान ने सीयाराम के साथ मिल कर कन्या पाठशाला की जमीन जो कि खसरा नंबर 991 में थी उसे भी बेच दिया और नक्शा में कन्या पाठशाला की जगह को खसरा नंबर 992 में निशान लगवा दिया ।

विशेषज्ञों का कहना है कि बिना रजिस्ट्री के जमीन की बिक्री न केवल गैरकानूनी है, बल्कि इससे काले धन को बढ़ावा मिलता है। स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस राज्य सरकार की आय का बड़ा स्रोत होती है, और ऐसे मामलों में सरकार को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

गांव के लोगों में मामले के उजागर होने के बाद सनसनी फैल गई है ।यदि इसकी जांच की जाएगी तो जांच में इस पूरे प्रकरण में बिचौलियों और प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत पाई जाएगी । इस मामले की फिर से जाँच की जाने की जरूरत है,यदि आरोप सही पाए गए तो संबंधित पक्षों पर भारी जुर्माना, पिछली तारीख से शुल्क वसूली और आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है।
प्रशासनिक अधिकारियों को ऐसे सभी सौदों की फिर से जांच की जानी चाहिए जिनमें लंबे समय से रजिस्ट्री लंबित है, लेकिन जमीन का उपयोग या कब्जा बदला जा चुका है।