हसीना ने बांग्लादेश में लोकतंत्र बहाल करने की पांच-बिंदु योजना पेश की

Hasina presents five-point plan to restore democracy in Bangladesh

रत्नज्योति दत्ता

नई दिल्ली: बांग्लादेश की हटाई गई प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश में लोकतंत्र बहाल करने के लिए पांच-बिंदु योजना पेश की। उन्होंने मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को हटाने और उनके निर्वासन के पीछे की घटनाओं की निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच कराने की मांग की। यह घोषणा उस दिन आई जब 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनावों का प्रचार शुरू हुआ।

हसीना, जो 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश छोड़कर भारत में रह रही हैं, ने यह संदेश दिल्ली में प्रतिष्ठित फॉरेन करेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (FCC) में आयोजित पत्रकार सम्मेलन कार्यक्रम में रिकॉर्डेड भाषण के जरिए दिया। कार्यक्रम का आयोजन उनके समर्थकों ने किया और इसमें वरिष्ठ अवामी लीग नेता भी शामिल हुए, जिनमें पूर्व विदेश मंत्री ए.के. अब्दुल मोमेन ऑनलाइन जुड़े।

अपने दस मिनट के भाषण में हसीना ने यूनुस प्रशासन पर लोकतांत्रिक वैधता की कमी, अराजकता, हिंसा और भ्रष्टाचार चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने बांग्लादेशियों से हिम्मत न हारने और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने का आह्वान किया।

हसीना ने कहा कि लोकतंत्र बहाल करने की शुरुआत यूनुस प्रशासन को हटाने से होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “जब तक यह अंतरिम सरकार सत्ता में रहेगी, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं होंगे।’’ इसके हटने के बाद ही अवामी लीग सहित सभी राजनीतिक दलों को शामिल कर सत्ता जनता को वापस दी जा सकती है।

दूसरे बिंदु में उन्होंने दैनिक सड़क हिंसा रोकने और कानून-व्यवस्था बहाल करने की मांग की, ताकि नागरिक सेवाएं सामान्य रूप से चल सकें और अर्थव्यवस्था मजबूत हो सके। तीसरे बिंदु में उन्होंने धार्मिक अल्पसंख्यकों, महिलाओं और कमजोर समूहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

चौथे बिंदु में हसीना ने राजनीतिक रूप से प्रेरित “कानून का दुरुपयोग” पर चिंता व्यक्त की और कहा कि अधिकारियों द्वारा पत्रकारों, विपक्षी नेताओं और अवामी लीग सदस्यों को डराने और जेल में डालने के लिए कानून का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने न्यायपालिका में भरोसा बहाल करने और राज्य संस्थाओं के दुरुपयोग को रोकने का आह्वान किया।

पाँचवे बिंदु में हसीना ने संयुक्त राष्ट्र से जुलाई–अगस्त 2024 की घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह किया, जिससे सच्चाई सामने आए और देश में मेल-मिलाप और सुधार संभव हो।

हसीना ने अपने पिता और बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि देश कट्टरपंथी ताकतों और विदेशी हस्तक्षेप से गंभीर खतरे में है। उन्होंने नागरिकों से संविधान की रक्षा करने और लोकतांत्रिक शासन पुनर्जीवित करने का आह्वान किया।

उनका यह भाषण उस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच आया, जो शिक्षा और सरकारी नौकरी कोटे को लेकर शुरू हुए छात्र आंदोलन से पैदा हुई थी और बाद में पूरे देश में फैल गई। इसके बाद उन्हें बांग्लादेश छोड़ना पड़ा और अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने उन्हें जुलाई–अगस्त 2024 की कार्रवाई के लिए मृत्युदंड सुनाया।