प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पद्म अवार्ड्स को “पीपल्स पद्म” का स्वरूप दिया
गोपेन्द्र नाथ भट्ट
भारत सरकार ने 77 वें गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर कुल 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की है।
इनमें 5 पद्म विभूषण,13 पद्म भूषण और 113 पद्मश्री अवॉर्ड्स शामिल हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा कालांतर में राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले देश के कुल 131 विभूतियों को कला, सामाजिक सेवा, विज्ञान, खेल, उद्योग आदि विभिन्न क्षेत्रों में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कार पाने वालों में 19 महिलाएं हैं, जबकि इस सूची में विदेशी नागरिकों, अनिवासी भारतीयों (एनआरआई ), भारतीय मूल के व्यक्तियों (पीआईओ) और भारत के प्रवासी नागरिकों (ओसीआई) की श्रेणी में छह लोग भी शामिल हैं, साथ ही मशहूर फिल्म अभिनेता दिवंगत धर्मेन्द्र सहित 16 लोगों को मरणोपरांत सम्मानित किया गया है।
राजस्थान के भपंग वाद्ययंत्र के उत्कृष्ट पारंपरिक कलाकार गफरुद्दीन मेवाती जोगी (भरतपुर) और अल्गोज़ा (परंपरावत वाद्य) के ओजस्वी कलाकार तागाराम भील (जैसलमेर) को पद्मश्री अवॉर्ड् के लिए चुना गया है। विज्ञापन जगत के दिग्गज राजस्थान मूल के पीयूष पांडे (जयपुर) को भी पद्म भूषण दिया गया है।
केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा की है। गृह मंत्रालय द्वारा इस बारे में आधिकारिक विज्ञप्ति जारी की है। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता वी. एस. अच्युतानंदन और दिग्गज फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र को वर्ष 2026 के लिए देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से मरणोपरांत सम्मानित किया जाएगा। लोक कार्यों के क्षेत्र में योगदान के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश के. टी. थॉमस, कला के क्षेत्र में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्रख्यात गायिका और वायलिन वादक एन. राजम, तथा साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में वरिष्ठ मलयालम पत्रकार पी. नारायणन को भी पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाएगा। पद्म भूषण पाने वालों में प्रसिद्ध पार्श्व गायिका अलका याग्निक, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, मशहूर अभिनेता मम्मूटी और उद्योगपति-बैंकर उदय कोटक प्रमुख हैं। विज्ञापन जगत के दिग्गज पीयूष पांडे, झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन और भाजपा नेता वी. के. मल्होत्रा को भी पद्म भूषण दिया गया है। वहीं अभिनेता और हास्य कलाकार सतीश शाह को पद्मश्री से मरणोपरांत सम्मानित किया जाएगा। टेनिस जगत के दिग्गज विजय अमृतराज को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। वहीं क्रिकेटर रोहित शर्मा, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर और हॉकी खिलाड़ी सविता पुनिया को पद्मश्री प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एम. जगदीश कुमार, प्रसार भारती के पूर्व सीईओ शशि शेखर वेम्पति तथा अभिनेता आर. माधवन और प्रोसेनजीत चटर्जी भी पद्मश्री से सम्मानित होने वालों में शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक हैं, जो तीन श्रेणियों में प्रदान किए जाते हैं। जिनमें पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री होता है। पद्म विभूषण असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाता है, जबकि पद्म भूषण उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा के लिए प्रदान किया जाता है और पद्म श्री किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवाओं के लिए प्रदान किया जाता है। नरेन्द्र मोदी सरकार ने 2014 में सत्ता में आने के बाद पद्म पुरस्कारों की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण और सकारात्मक बदलाव किए है। सबसे बड़ा परिवर्तन यह रहा कि पद्म अवार्ड्स को पीपल्स पद्म का स्वरूप दिया गया। अब कोई भी नागरिक स्वयं या किसी योग्य व्यक्ति का नामांकन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से कर सकता है। पहले यह प्रक्रिया सीमित और बंद मानी जाती थी,लेकिन अब इसे पारदर्शी, सरल और लोकतांत्रिक बनाया गया है। आवेदन की स्पष्ट समय-सीमा तय की गई और समाज के हर वर्ग ग्रामीण, आदिवासी, महिला और गुमनाम कर्मयोगियों को सम्मान देने पर विशेष जोर दिया गया। इससे पद्म पुरस्कार सचमुच जनभागीदारी वाला सम्मान बन सके।
पद्म पुरस्कारों की स्थापना 1954 में हुई थी। इनका उद्देश्य राजनीति से परे रहकर कला, साहित्य, विज्ञान, शिक्षा, खेल, चिकित्सा, सामाजिक कार्य, लोकसेवा, व्यापार, उद्योग और जनजातीय एवं लोक कलाओं जैसे विविध क्षेत्रों में असाधारण योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करना है। 2026 में भी यह मूल भावना यथावत दिखाई देती है “राष्ट्र निर्माण में मूक लेकिन निर्णायक योगदान” को सामने लाने की कोशिश है।भारत सरकार द्वारा प्रदान किए जाने वाले पद्म अवार्ड पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री—देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल हैं। वर्ष 2026 के पद्म अवार्ड न केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों के सम्मान का प्रतीक हैं, बल्कि यह बदलते भारत की प्राथमिकताओं, सामाजिक मूल्यों और समावेशी विकास की सोच को भी प्रतिबिंबित करते हैं। इस वर्ष के पद्म अवार्डों का विश्लेषण करने पर स्पष्ट होता है कि यह सम्मान परंपरा और परिवर्तन, दोनों के बीच संतुलन स्थापित करता है।
पद्म अवार्ड 2026 के समग्र स्वरूप का अध्ययन करने पर कुछ स्पष्ट प्रवृत्तियाँ उभरती हैं पहली, ग्रासरूट स्तर के नायकों पर विशेष ध्यान। हाल के वर्षों की तरह 2026 में भी ऐसे व्यक्तियों को महत्व दिया गया है, जिन्होंने सीमित संसाधनों में समाज के लिए दीर्घकालिक प्रभाव पैदा किया। यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय सम्मान अब केवल प्रसिद्धि का नहीं, बल्कि सामाजिक प्रभाव का पैमाना बनता जा रहा है। दूसरी, लोक कला और पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण। भारत की सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित रखने वाले लोक कलाकार, शिल्पकार, जनजातीय परंपराओं के संवाहक और क्षेत्रीय भाषाओं के साहित्यकार पद्म अवार्ड सूची का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते रहे हैं। 2026 में भी यह रुझान भारत की ‘विविधता में एकता’ की अवधारणा को सशक्त करता है।तीसरी, नारी शक्ति का उभार। विज्ञान, खेल, सामाजिक कार्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व भूमिका पद्म अवार्ड 2026 के माध्यम से रेखांकित होती है। यह सम्मान केवल उपलब्धियों की स्वीकृति नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी है।पद्म अवार्ड 2026 का एक महत्वपूर्ण पहलू क्षेत्रीय संतुलन है। छोटे राज्यों, सीमावर्ती क्षेत्रों और पूर्वोत्तर भारत से आने वाले योगदानकर्ताओं को सम्मानित करने की प्रवृत्ति यह दर्शाती है कि राष्ट्र निर्माण केवल महानगरों तक सीमित नहीं है। इससे राष्ट्रीय एकता की भावना को बल मिलता है और ‘सबका साथ, सबका विकास’ की अवधारणा को मूर्त रूप मिलता है।पद्म अवार्डों की चयन प्रक्रिया में आम नागरिकों से नामांकन आमंत्रित किए जाते हैं, जो इसे विशिष्ट बनाता है। 2026 में भी यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक सहभागिता का उदाहरण प्रस्तुत करती है। विभिन्न स्तरों पर जांच, विशेषज्ञ समितियों की समीक्षा और अंततः राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदन यह पूरी प्रणाली सम्मान की विश्वसनीयता को बनाए रखती है।
हालाँकि पद्म अवार्ड व्यापक प्रशंसा प्राप्त करते हैं, फिर भी कुछ आलोचनाएँ समय-समय पर सामने आती हैं जैसे कुछ क्षेत्रों का अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व या कुछ योगदानों का देर से पहचाना जाना। पद्म अवार्ड 2026 का विश्लेषण करने पर यह संकेत मिलता है कि चयन प्रक्रिया में निरंतर सुधार की गुंजाइश बनी हुई है, विशेषकर उभरते क्षेत्रों जैसे पर्यावरण संरक्षण, डिजिटल नवाचार और सामुदायिक स्वास्थ्य आदि के संदर्भ में। पद्म अवार्ड 2026 केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं हैं, बल्कि यह भारत की सामूहिक चेतना, सामाजिक संवेदनशीलता और सांस्कृतिक आत्मविश्वास का दर्पण हैं। ये पुरस्कार उस भारत की कहानी कहते हैं जो परंपरा को सहेजते हुए नवाचार को अपनाता है, जो चमक-दमक से दूर रहकर निस्वार्थ सेवा को महत्व देता है। 2026 के पद्म अवार्ड इस बात की पुष्टि करते हैं कि राष्ट्र का असली गौरव उसके उन नागरिकों में है, जो चुपचाप समाज को बेहतर बनाने में जुटे रहते हैं।
पद्म पुरस्कार 2026 की घोषणा ने इस बात पर जोर दिया है कि भारतीय समाज आज केवल प्रसिद्धि या लोकप्रियता से प्रेरित नहीं है, बल्कि वह संस्कृति, लोक कला, वैज्ञानिक उपलब्धि, खेल, सामाजिक सुधार और सार्वजनिक सेवा को समान रूप से मान्यता देता है। इस वर्ष की सूची में न केवल फिल्म, खेल और संगीत के दिग्गज शामिल हैं, बल्कि वे भी हैं जिन्होंने जिंदगी के छोटे-छोटे हिस्सों में समाज की दिशा बदलने का काम किया है जैसे शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, लोक कला संरक्षण और स्वास्थ्य सेवा आदि। सरकार ने इस वर्ष के अवार्डों में अनगिनत ‘अदृश्य नायकों’ को भी शामिल किया है, जिनका कार्य अक्सर स्थानीय स्तर तक सीमित रहा, लेकिन जिसने समाज पर गहरा और सकारात्मक प्रभाव छोड़ा है। यह समावेशी दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि भारत का नागरिक सम्मान प्रणाली अब ज्यादा विविध, लोकतांत्रिक और क्षेत्रीय संतुलन पर आधारित हो रही है।





