प्रो. नीलम महाजन सिंह
“अरे किस्मत में नहीं है तो मैं क्या करूं?” अजित पवार ने 6 बार डिप्टी सीएम की शपथ ली। वे अक्सर मीडिया कर्मियों से यह कहा करते थे। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का प्लेन क्रैश में निधन हो गया है।बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान ये हादसा हुआ जिसमे सभी 5 लोगों की मौत हो गई। देश व महाराष्ट्र के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में अजित पवार का इतना रुतबा कैसे बना? अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा Devlali Pravra) में हुआ था। वे शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे थे। अजित के पिता फिल्म जगत से जुड़े मुंबई में वी. शांताराम के राजकमल स्टूडियो में काम करते थे। पवार के दादा, गोविंदराव पवार, बारामती सहकारी व्यापार में काम करते थे और उनकी दादी खेतों की देखभाल करतीं थीं। ‘महाराष्ट्र एजुकेशन सोसाइटी हाई स्कूल’, बारामती से उन्होंने शुरूआती पढ़ाई की। कॉलेज के दिनों में ही उनके पिता का निधन हो गया। अजित ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर में शिवाजी यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया था। वे शुरुआत में शरद पवार के पर्सनल सेक्रेटरी रहे। एक चैनल को दिए इंटरव्यू में बचपन का ज़िक्र करते हुए अजित ने कहा था, “मैं शुरुआत से अपने चाचा, शरद पवार जी से बहुत डरता था, लेकिन हम भाई-बहनों में हमेशा प्यार था। मुझे लगता है पार्टी और परिवार को अलग-अलग रखा जाना चाहिए”। अजित ने महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री पदम सिंह पाटिल की बहन सुनेत्रा पवार से शादी की है। इनके दो बेटे, जय पवार व पार्थ पवार हैं। सुप्रिया सुले, अजित की चचेरी बहन हैं। राजनीति की पाठशाला में उन्होंने शरद पवार के लिए अपनी सीट छोड़ दी थी। 1982 में राजनीति में कदम रखा, तब वे एक को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री बोर्ड के लिए चुने गए थे। इसके बाद वे 1991 में पुणे जिला सहकारी बैंक (पीडीसी) के अध्यक्ष बने और 16 साल तक इस पद पर रहे। 1991 में पहली बार बारामती से सांसद बने। उपचुनाव हुआ, तो चाचा शरद पवार के लिए अपनी सीट छोड़ दी। यहीं से जीतकर शरद पवार, पी.वी. नरसिम्हा राव की सरकार में रक्षा मंत्री बने। 1996 से 2004 तक शरद पवार बारामती से सांसद रहे। 1995 में अजित बारामती विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने। फिर 1999, 2004, 2009 और 2014 में भी यहीं से विधायक चुने गए। 1999 में विलासराव देशमुख की सरकार में उन्हें सिंचाई विभाग में कैबिनेट मंत्री बनाया गया। सुप्रिया सुले के राजनीति में आने से उनके उत्तराधिकारी पद की कुर्सी खतरे में पड़ी। 2004 में जब NCP की 71 सीटें आईं, तब शरद ने कांग्रेस (69 सीटें) को सरकार बनाने का मौका दिया। अजित, शरद के इस फैसले से नाराज़ हुए थे। क्या यह अजित पवार क दरकिनार करना मना जाय? वरिष्ठ पत्रकार उदय तनपाठक के अनुसार, राजनीतिक गलियारों में ये माना जाता था कि अजित पवार ही शरद पवार की सत्ता संभालेंगे। 2009 के बाद सुप्रिया सुले राजनीति में आ गईं व यहीं से फूट पड़ने की शुरुआत हुई। अजित ने शरद पवार को हमेशा ‘फादर फिगर’; पिता तुल्य माना था। पार्टी में रहते उन्होंने जितने भी फैसले लिए वे शरद की मर्ज़ी से ही लिए थे। पत्रकार मयूर के अनुसार, अजित पवार व शरद पवार भले ही एक ही राजनीतिक घराने से आते थे लेकिन दोनों के राजनीति दृष्टिकोण में बहुत अंतर रहा। शरद पवार कभी भी स्पष्ट बात नहीं करते हैं, जबकि अजित को, अगर किसी बात को लेकर ना कहना है तो वो कभी भी बोलने से चूकते नहीं थे। कांग्रेस, शिवसेना व एनसीपी के सभी दिग्गज नेता नेहरू सेंटर मुंबई में एक-एक कर पहुंच रहे थे। बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन टूटने के बाद महाराष्ट्र में चार हफ्ते से तय नहीं हो पाया था कि सरकार कौन बनाएगा। इस लिहाज से ये बैठक अहम थी। कॉंग्रेस राष्ट्रवादी (घड़ी चिह्न) के अध्यक्ष शरद पवार और ठीक बगल में उनके भतीजे अजित पवार एक फाइल लिए बैठे थे। हाव-भाव से लग रहा था जैसे वो मीटिंग से ऊब रहे हों। तभी अजित के मोबाइल पर एक मैसेज आया। वो वॉशरूम जाने के बहाने बाहर चले गए व करीब 10 मिनट तक फोन पर बात करते रहे। बैठक में मौजूद किसी को अंदाजा नहीं था कि अगली सुबह क्या होने वाला है। 22 नवंबर 2019 को महाविकास अघाड़ी की बैठक में तय हुआ कि उद्धव ठाकरे पांच साल तक सरकार चलाएंगे। अगले दिन 23 नवंबर को तड़के 6:30 बजे शरद पवार एक फोन कॉल से जागे। फोन पर किसी ने घबराहट से कहा, ‘मैं अभी-अभी राजभवन से लौटा हूं, आप एक बार न्यूज़ चैनल देखिए।’ टाइम्स ऑफ इंडिया ने छापा था ‘अगले पांच साल सर्वसम्मति से उद्धव सीएम होंगे। अगले ही पल उन्होंने टेलीविजन पर न्यूज चैनल खंगाले तो देखा हेडलाइन थी- देवेंद्र फडणवीस लेंगे सीएम पद की शपथ। अजित पवार महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम होंगे। शरद पवार ने तुरंत उद्धव ठाकरे को फोन घुमाया। 2 दिसंबर 2019 को एक न्यूज चैनल को दिए एक इंटरव्यू में शरद पवार ने बताया था, ‘मैंने सबसे पहले उद्धव ठाकरे को फोन किया और कहा, ये जो कुछ भी हुआ है ये ठीक नहीं था। तीनों पार्टियों (कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी) की चर्चा का कोई अंत नहीं था। राजभवन में सुबह 8 बजे गवर्नर भगतसिंह कोश्यारी ने शपथ दिलाई। घर-वापसी के लिए बहन सुप्रिया मनाने पहुंचीं, 80 घंटे में गिर गई सरकार। प्रतिभा पवार को अजित ने हमेशा मां की तरह माना है। अजित को प्रतिभा की बात समझ में आई और वो एनसीपी में लौट आए। 2024 के लोकसभा चुनाव में अजित ने सुप्रिया सुले के खिलाफ पत्नी सुनेत्रा को चुनाव में खड़ा किया था, लेकिन सुनेत्रा हार गईं। उन्हें राज्य सभा का सदस्य बनाया गया। राजदीप सरदेसाई ने अपनी किताब ‘2020: दी इलेक्शन दैट सरप्राइज्ड इंडिया’ में लिखा है कि जब 2019 में अजित पवार को बीजेपी ने अपने पाले में लिया तो ये वादा लिया कि आप लोकसभा चुनाव में पत्नी सुनेत्रा पवार को सुप्रिया सुले के खिलाफ लड़ाएंगे। अजित ने एक इंटरव्यू में कहा था, “बहन के खिलाफ पत्नी को खड़ा करना एक गलती थी। सुप्रिया के खिलाफ लड़ाने का फैसला पार्टी संसदीय बोर्ड का था। अब मुझे लगता है कि यह गलत फैसला था।” साल 1999 से 2009 तक अजित सिचाई मंत्री रहे। आरोप लगाया गया कि सिंचाई के लिए बांध बनाने की योजना में भारी घोटाला हुआ है। अजित पवार पर करीब 70,000 करोड़ रुपयों के हेरफेर का आरोप लगाया गया। 2019 में चुनाव प्रचार के दौरान फडणवीस ने अजित पवार को भ्रष्ट बताया था व शोले फिल्म का डायलॉग ‘चक्की पीसिंग-पीसिंग’ का उन पर तंज किया था। अजित पवार ने कहा था, “महाराष्ट्र बनने का खर्च 42 हज़र करोड़ रुपए था। 70 हजार करोड़ कहां से आएंगे। ये सब बदनाम करने की साजिश है।” बॉम्बे हाईकोर्ट ने 22 अगस्त 2019 को महाराष्ट्र सहकारी क्षेत्र पर धोखाधड़ी से चीनी मिलों को बेचने के आरोपों की जांच करने का आदेश जारी किया व कहा कि इन्हें औने-पौने दाम पर बेचा गया, जिसके बाद पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। इसकी ‘क्लोजर रिपोर्ट’ दे दी गई। अजित ने एक बार फिर अपना रास्ते बदलने की सोची। 2019 में अजित पवार ने देवेंद्र फडणवीस के साथ डिप्टी सीएम की शपथ ली थी। वर्तमान में वे दोनों ही डिप्टी सीएम के पद पर हैं। 6 फरवरी 2024 को अजित पवार को एनसीपी का चुनाव चिह्न घड़ी मिला था और शरद पवार को चुनाव चिह्न ‘तुरहा बजाता आदमी’। सारांंशार्थ 2023 में अजित पवार ने पूरी तरह से एनसीपी पर कब्जा जमा लिया। 2024 में खुद को स्थापित करने में भी सफल रहे। पिछले सप्ताह कोहरे में फंसा प्लेन, हवा में चक्कर काटकर क्रैश होने से अजित पवार का विमान आग का गोला बना, जिससे उनकी आकस्मिक मौत हो गई। किंग लियर जहाज क्रैश में अजित पावर की 4 लोगों के साथ मौत हो गई। संजय गांधी, माधवराव सिंधिया, जी.एम.सी. बालयोगी, लोकसभा स्पीकर, साइप्रियन संगमा, ओ.पी. जिंदल व सुरेंद्र सिंह, वाई.एस. राजशेखर रेड्डी, दोरजी खांडू, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री, जनरल बिपिन रावत: भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, विजय रूपाणी आदि, इसी प्रकार से विमान दुर्घटनाओं में उनका निधन हुआ। जिस भी व्यक्ति की इस प्रकार आकस्मिक मृत्यु होती है, उसका खालीपन भरना मुश्किल हो जाता है, फ़िर भी राजनीती तो चलती ही रहेगी।
प्रो. नीलम महाजन सिंह (वरिष्ठ पत्रकार, राजनैतिक समीक्षक, दूरदर्शन व्यक्तित्व, सॉलिसिटर फॉर ह्यूमन राइट्स संरक्षण व परोपकारक)





