विवेक शुक्ला
केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया। यह उनका नौवां बजट था और स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार रविवार को पेश किया गया। इस बजट में आर्थिक विकास, क्षमता निर्माण और सबका साथ, सबका विकास पर जोर दिया गया है। विशेष रूप से, क्रिएटिव इंडस्ट्रीज या ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं, जो कंटेंट क्रिएटर्स को सीधे लाभ पहुंचाएंगी। ऑरेंज इकोनॉमी का मतलब क्रिएटिव सेक्टर से है, जिसमें एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स (AVGC) और डिजिटल कंटेंट शामिल हैं।
ऑरेंज इकोनॉमी का महत्व और बजट में इसका स्थान
ऑरेंज इकोनॉमी वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रही है। भारत में यह सेक्टर न केवल रोजगार सृजन कर रहा है बल्कि सांस्कृतिक निर्यात को भी बढ़ावा दे रहा है। वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा कि AVGC इंडस्ट्री को 2030 तक लगभग 20 लाख प्रोफेशनल्स की आवश्यकता होगी। इसे ध्यान में रखते हुए, सरकार ने क्रिएटिव इंडस्ट्रीज को नई ऊर्जा देने का फैसला किया है। यह पहल युवाओं को डिजिटल स्किल्स से लैस करके भविष्य के लिए तैयार करने पर केंद्रित है।
दिल्ली-एनसीआर के युवा वैज्ञानिक श्रेयांस जैन कहते हैं कि वित्त मंत्री ने अपने बजट प्रस्तावों में नई रिसर्च करने वाले तमाम उत्साही युवाओं और अन्य लोगों को तोहफा दिया है। सरकारी सहयोग के अभाव में बहुत सारे लोगों के रिसर्च प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पा रहे थे। पर अब यह नहीं होगा। सेलेस्टियल एयरोस्पेस लसे जुड़े हुए श्रेयांस जैने और आईआईटी के कई सहयोगी बैलून-सहायता प्राप्त रॉकेट लॉन्च सिस्टम विकसित कर रहे हैं। इस तकनीक में एक बड़ा बैलून रॉकेट को ऊपरी वायुमंडल तक ले जाता है, जहां हवा पतली होती है और प्रतिरोध कम। वहां से रॉकेट प्रज्वलित होता है, जिससे ईंधन की बचत होती है और पेलोड क्षमता 2-3 गुना बढ़ जाती है।
बजट में ऑरेंज इकोनॉमी को ‘क्रिएटिव जॉब्स का नया इंजन’ कहा गया है। यह सेक्टर सेवाओं पर आधारित विकास को बढ़ावा देगा। पहले से ही भारत के क्रिएटिव सेक्टर में स्टार्टअप्स और जॉब्स की बाढ़ आ रही है, लेकिन स्किल गैप एक बड़ी चुनौती है। बजट इस गैप को भरने के लिए ठोस कदम उठाता है, जैसे कि एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में लैब्स स्थापित करना। इससे कंटेंट क्रिएटर्स को स्कूल और कॉलेज स्तर से ही ट्रेनिंग मिलेगी, जो उन्हें प्रोफेशनल वर्ल्ड में एंट्री के लिए तैयार करेगा।
बजट की सबसे प्रमुख घोषणा है मुंबई स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज (IICT) को सपोर्ट देकर कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित करना। वित्त मंत्री ने प्रस्ताव रखा कि 15,000 सेकेंडरी स्कूलों और 500 कॉलेजों में ये लैब्स सेट अप किए जाएंगे। ये लैब्स छात्रों को एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स बनाने की ट्रेनिंग देंगे।
ये लैब्स क्यों महत्वपूर्ण हैं? श्रेयांस जैन कहते हैं कि आज की डिजिटल दुनिया में कंटेंट क्रिएटर्स यूट्यूब, इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर लाखों कमाते हैं। लेकिन कई युवाओं को प्रोफेशनल टूल्स और ट्रेनिंग की कमी होती है। ये लैब्स वीडियो प्रोडक्शन, एडिटिंग, डिजिटल स्टोरीटेलिंग और XR (एक्सटेंडेड रियलिटी) जैसी स्किल्स सिखाएंगी। IICT के नेतृत्व में ये लैब्स ग्रासरूट स्तर पर टैलेंट को निखारेंगी, जिससे भारत का क्रिएटर वर्कफोर्स मजबूत होगा। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इससे गेम डेवलपर्स, आर्टिस्ट्स और स्टोरीटेलर्स की नई पीढ़ी तैयार होगी, जो भारतीय आईपी (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी) पर आधारित कंटेंट बनाएगी।
इसके अलावा, बजट में ईस्टर्न रीजन में एक नया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन एंड डेवलपमेंट स्थापित करने का प्रस्ताव है। यह डिजाइन एजुकेशन को बढ़ावा देगा, जहां कंटेंट क्रिएटर्स विजुअल डिजाइनिंग सीख सकेंगे।
एक और महत्वपूर्ण पहल है डिजिटल नॉलेज ग्रिड का निर्माण, जो भारत की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यटन संपत्तियों को डिजिटली डॉक्यूमेंट करेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि इससे हिस्टोरियंस, रिसर्चर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए नए जॉब्स बनेंगे। यह ग्रिड एक ओपन प्लेटफॉर्म होगा, जहां कंटेंट क्रिएटर्स भारतीय हेरिटेज पर आधारित वीडियोज, डॉक्यूमेंट्रीज और डिजिटल कंटेंट बना सकेंगे।
यह पहल क्यों प्रोत्साहनकारी है? कंटेंट क्रिएटर्स अक्सर ऑथेंटिक सोर्स की तलाश में रहते हैं। डिजिटल नॉलेज ग्रिड उन्हें हाई-क्वालिटी डेटा प्रदान करेगा, जिससे वे एजुकेशनल और एंटरटेनमेंट कंटेंट बना सकेंगे। इससे टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि 20 आइकॉनिक डेस्टिनेशंस पर 10,000 टूरिस्ट गाइड्स को अपस्किल करने का पायलट प्रोग्राम शुरू होगा। कंटेंट क्रिएटर्स इन डेस्टिनेशंस पर वीडियोज बनाकर मोनेटाइज कर सकेंगे।
बजट में क्रिएटिव सेक्टर के लिए अप्रत्यक्ष प्रोत्साहन भी हैं। इस बाबत 10,000 करोड़ रुपए रखे गए हैं, जो क्रिएटिव स्टार्टअप्स को फंडिंग देगा। साथ ही, म्यूनिसिपल बॉन्ड्स के लिए 100 करोड़ का इंसेंटिव बड़े शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने में मदद करेगा, जो क्रिएटिव हब्स विकसित कर सकता है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रो. प्रभांशु ओझा कहते हैं कि निर्मला सीतारमण का बजट कंटेंट क्रिएटर्स को एजुकेशन, स्किलिंग और जॉब क्रिएशन के माध्यम से प्रोत्साहित करता है। ये लैब्स और डिजिटल नॉलेज ग्रिड जैसी पहलें भारत को क्रिएटिव सुपरपावर बनाने की दिशा में कदम हैं। यह बजट युवा-केंद्रित है, जो ‘विकसित भारत’ के विजन को मजबूत करता है।





