मुंबई में सावरकर पर तीन पुस्तकों का विमोचन

Three books on Savarkar released in Mumbai

क्रांति, राष्ट्र और युवा चेतना: सावरकर की विरासत पर मुंबई का वैचारिक संगम

मुंबई (अनिल बेदाग) : जब इतिहास केवल स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान से संवाद बन जाए—तब विचार जीवित हो उठते हैं। मुंबई के विले पार्ले ईस्ट में आयोजित पुस्तक विमोचन कार्यक्रम ने यही संदेश दिया। वीर सावरकर के जीवन, विचारधारा और राष्ट्रवादी दर्शन पर आधारित तीन पुस्तकों के लोकार्पण के साथ यह आयोजन युवाओं, विद्वानों और जागरूक नागरिकों के लिए विचार-मंथन का सशक्त मंच बना, जहाँ अतीत की व्याख्या वर्तमान की ज़रूरतों से जुड़ती दिखी।

इस अवसर पर विश्व हिंदू फाउंडेशन के संस्थापक एवं वैश्विक अध्यक्ष स्वामी विज्ञानंद सरस्वती और महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को वैचारिक ऊँचाई दी। डॉ. वैदेही तमन द्वारा लिखित तीनों पुस्तकें रेक्लेइमिंग भारत (अंग्रेज़ी), वीर सावरकर की क्रांतिकारी यात्रा (हिंदी) और वीर सावरकरांची क्रांतिकारी यात्रा (मराठी)—भाषायी सीमाओं से परे जाकर सावरकर के क्रांतिकारी जीवन, अडिग राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता संग्राम व सांस्कृतिक पुनर्जागरण में उनके योगदान को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाने का प्रयास हैं।

विमोचन के बाद संवाद सत्र में श्रोताओं ने सावरकर की विचारधारा, ऐतिहासिक व्याख्याओं और राष्ट्र-निर्माण की दृष्टि पर सवाल रखे—जिससे यह स्पष्ट हुआ कि समकालीन संदर्भ में सावरकर पर रुचि केवल बढ़ी नहीं, बल्कि गहरी भी हुई है।

मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने युवाओं से आग्रह किया कि वे सावरकर को किसी एकांगी छवि के बजाय उनके मूल लेखन और विचारों के माध्यम से समझें। वहीं स्वामी विज्ञानंद सरस्वती ने उद्यमिता, आत्मनिर्भरता, सशक्त रक्षा, हिंदू एकता और समग्र राष्ट्र निर्माण जैसी सावरकर की दूरदर्शी अवधारणाओं को रेखांकित करते हुए डॉ. तमन की सरल, पाठक-हितैषी प्रस्तुति की विशेष सराहना की।

लेखिका डॉ. वैदेही तमन के सम्मान के साथ संपन्न यह आयोजन इस बात का संकेत है कि सावरकर के विचार आज भी विमर्श के केंद्र में हैं और उन्हें समझने के लिए गंभीर, संतुलित और सुगम पुस्तकों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।