जहरीले बयान से विषैले पानी तक कटघरे में एमपी की सरकार

From toxic statements to toxic water, the MP government is under scrutiny

नरेंद्र तिवारी

किसी भी सरकार की दृढता और जन सामान्य से जुड़े विषयों में उसकी संवेदनशीलता सरकार की कीर्ति, ख्याति और गुणगान का महत्वपूर्ण आधार होती है। इस लिहाज से मध्यप्रदेश राज्य सरकार जिसने अपने नवीन नैतृत्व के साथ दो बरस से अधिक की कार्य अवधि पूर्ण कर ली है, अब यह जानना बहुत जरुरी हो जाता है की जनसामान्य से जुड़े आवश्यक विषयों के प्रति सरकार के मुख्यमंत्री, मंत्री, नेता और अफसरों का दृष्टिकोण क्या है? जब किसी राज्य में केंद्रीय नैतृत्व ने नव प्रयोग करते हुए वरिष्ठता के क्रम को उलांघकर मोहन यादव को मध्यप्रदेश की सरकार का मुखिया बनाया हो, तब राज्य सरकार का मूल्यांकन और भी जरुरी हो जाता है। सरकार के कार्यों का मूल्यांकन जनता की नजर से करने का पैमाना वैसे तो पांच बरस में होने वाले चुनाव है। इस पैमाने पर अब से दो बरस पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिँह चौहान के नैतृत्व में एमपी की जनता ने भाजपा को व्यापक जन समर्थन देकर राज्य में राज्य में पांच वर्षीय कार्यकाल सौपा है, जनादेश इतना बड़ा की बहुमत से 50 सीटें अधिक याने की 230 में से 163 सीट जीतकर भाजपा ने इतिहास रचा। किंतु यह सफलता भाजपा को पूर्व मुख्यमंत्री, वर्तमान में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज चौहान के नैतृत्व में प्राप्त हुई थी। शिवराज के नैतृत्व में भाजपा को मिले व्यापक जन समर्थन के बाद भाजपा हाईकमान ने शिवराज के स्थान पर महाकाल की नगरी उज्जैन दक्षिण के विधायक एमपी सरकार के पूर्व शिक्षामंत्री मोहन यादव को प्रदेश की कमान सौपी। मध्यप्रदेश में मोहन यादव ने 13 दिसम्बर 2023 को राज्य के 19 वें मुख्यमंत्री के रुप में शपथ ग्रहण की थी।
मध्यप्रदेश जिसकी बागडोर शिवराज के हाथों से मोहन यादव के हाथों में आ चुकी थी। प्रदेश के मुख्यमंत्री के रुप में अपने शुरुवाती निर्णयों में मोहन यादव सरकार की दृढता स्पष्ट दिखाई दे रही थी। उन्होंने पदभार ग्रहण करते ही 13 दिसम्बर 2023 को धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों पर निर्धारित डेसिबल से अधिक तेज आवाज वाले लाउडस्पीकरों और डीजे के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया। यह कदम सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत ध्वनि प्रदूषण कम करने और जन स्वास्थ्य को दृष्टिगत रखते हुए उठाया गया था। इस निर्णय को सम्पूर्ण प्रदेश में समान रुप से लागू करने में भी सफलता प्राप्त हुई थी। जब गाँव-गाँव, शहर-शहर ऊँचे स्थानों पर लाउड स्पीकर लगाकर धार्मिक कट्टरवाद की प्रतिस्पर्धा का दौर चल रहा था। मोहन यादव की सरकार ने आमजनता के हित में दृढता से कदम उठाया। उक्त निर्णय को समान रुप से लागू भी किया। तेज आवाज से परेशान आमजन को राहत देने का काम किया था। एमपी की सरकार का दूसरा कठोर निर्णय परिवहन चैक पोस्ट समाप्त करने का था। जिसका आधिकारिक निर्णय 30 जून 2024 को लिया गया। और यह 1 जुलाई 2024 से पुरे राज्य में लागू भी हो गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अंतर प्रांतीय सीमाओं पर होने वाली अवैध वसूली को रोकने और गुजरात मॉडल अपनाने के लिए चेक पोस्ट को बंद करने का कड़ा फैसला लिया था। यह फैसला सरकार का भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार था। जनता से जुड़े कठोर निर्णय लेने वाली मोहन सरकार कुछ मामलों में अनिर्णय का शिकार होती दिखी, जिन विषयों पर संवेदनशीलता और दृढता दिखाए जाने की आवश्यकता थी, राज्य सरकार और उसके मुखिया खामोश नजर आए। ऐसा ही राष्ट्रीय अस्मिता से जुडा मामला एमपी सरकार के जनजातीय कार्यमंत्री के रुप में विजय शाह द्वारा दिया गया बयान था। उन्होंने भारतीय सेना की कर्नल सौफ़िया कुरैशी जिन्होंने आपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की कार्यवाही से दुनियाँ को अवगत कराया स्वयं भी कार्यवाही का हिस्सा रही। उन पर दिए जहरीले बयान में मंत्री विजय शाह ने उन्हें आंतकियों की बहन कहकर सम्बोधित किया। भारत राष्ट्र की जिस नायिका पर देश गौरव कर रहा है, एमपी सरकार के जिम्मेदार मंत्री द्वारा दिए बयान ने मध्यप्रदेश की जनता को शर्मन्दगी से भर दिया था, उनका यह बयान देश की गरिमा को नुकसान पहुंचाने वाला है, किंतु आश्चर्य की 10 माह होने को आए मंत्री अपने पद पर बना हुआ है। एमपी की सरकार उन्हें मंत्री पद से हटाने में नाकाम दिखाई दी, जब से अब तक का हर दिन एमपी की सरकार और उसके मुख्यमंत्री की संवेदना और दृढता को मुंह चिढ़ाता प्रतीत हो रहा है।
एमपी की आर्थिक राजधानी इंदौर जिसे देश के सबसे साफ शहर का तमगा मिला हुआ है। अभी वर्ष 2026 की जनवरी माह में इस शहर के भागीरथ पूरा इलाके में विषैले पानी से फैले डायरिया के कारण एक के बाद एक 33 लोगो की मौत हो गयी। मौत का क्रम अभी भी जारी है, जाने कब रुकेगा, सरकार ने तीन अधिकारियो को निलंबित किये जाने एवं मृतक परिवार को मुआवजे के रुप में मात्र 2 लाख रु की घोषणा कर इस गंभीरतम अपराध पर पर्दा डालने का प्रयास किया। इस अति गंभीर विषय पर प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री ने एक पत्रकार को दिए बयान में फोकट प्रश्न और घंटा जैसे शब्दों के इस्तेमाल ने प्रदेश की जनता को झकझोर दिया। इस बयान ने प्रदेश को गहरे रुप से शर्मिंदा किया। एमपी के इंदौर में विषैले पानी से हुई मौत के सम्पूर्ण घटनाक्रम पर सरकार संवेदन शून्य नजर आई। यह विषय प्रदेश के विपक्ष को सरकार पर हमलावर होने का मौका था, विपक्ष ने ऐसा ही किया। सरकार और मुख्यमंत्री विपक्ष को दोष देते दिखे। इस अति गंभीर विषय पर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री भाजपा की फायर ब्राड नेता उमा भारती का बयान काबिले गौर रहा, जिसमे जनमत की आवाज सुनाई दी उन्होंने x पर अपनी पोस्ट में लिखा ‘ सिर्फ इंदौर के मेयर ही नहीं, मध्यप्रदेश का शासन एवं प्रशासन कटघरे में खडे है, इस महापाप के सभी जिम्मेदार लोग जनता के प्रति अपराध के कटघरे में खडे है, उमा भारती ने लिखा इंदौर दूषित पानी के मामले में यह कौन कह रहा है की हमारी चली नहीं, जब आपकी चली नहीं तो आप पद पर बैठे बीसलेरी का पानी क्यों पीते रहे? जनता के बिच क्यों नहीं गए? ऐसे पापों का कोई स्पष्टीकरण नहीं होता या तो प्रायश्चित या दंड!’ उमा भारती की इस पोस्ट में सरकार को सख्त कदम उठाने का संदेश था। किंतु सत्तामद में चूर प्रदेश सरकार इस संवेदनशील विषय पर असंवेदनशील नजर आई। घटनाक्रम तो प्रदेश में व्याप्त भ्रष्टाचार, राशन माफिया, शराब माफिया, बढ़ती बेरोजगारी, लालफीताशाही भी है,किंतु आपरेशन सिंदूर की नायिका सौफ़िया कुरैशी पर मंत्री विजय शाह के बयान के बाद भी उनका पद पर बने रहना? इंदौर के भागीरथ पूरा में विषैले पानी से हुई 33 लोगो की मौत के बाद सरकारी तत्परता की कमी, सरकारी दृढता का अभाव, प्रदेश सरकार के मुखिया मोहन यादव जो अपने आरम्भिक कुछ महीनों में कठोर निर्णय लेते दिखे, बाद में अनिर्णय का शिकार हो गए। विषैले पानी और जहरीले बयान के बाद सरकार के कमजोर फैसलों ने एमपी सरकार के मुखिया और सरकार की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव को जरूरत है, संवेदनशील विषय पर कठोर रुख इख़्तियार करने की, हाई कमान एक बार मौका देता है, बाद में प्रदेश की जनता आपको मजबूत लीडर के रुप में देश के सामने प्रस्तुत करती है। जनता का नेता बनने के लिए जरूरत है। जनभावना के सम्मान की एमपी की सरकार और उसके मुखिया मोहन यादव को समय रहते जनता की भावना का आदर करना सीखना होगा। हर विषय पर दिल्ली की और देखना भी आपकी कमजोरी और निर्णय लेने में देरी को प्रदर्शित करते है।