साउथ दिल्ली में अवैध निर्माण का खेल: क्या नगर निगम की मिलीभगत से चल रहा है भ्रष्टाचार का साम्राज्य?

The game of illegal construction in South Delhi: Is the empire of corruption running with the connivance of the Municipal Corporation?

मुकेश अग्रवाल

नई दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली का साउथ इलाका कभी सुव्यवस्थित और नियमों के पालन के लिए जाना जाता था, लेकिन आज यह क्षेत्र अवैध निर्माण के बढ़ते जाल में उलझता नजर आ रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब यह सवाल खुलकर उठने लगा है कि आखिर नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी के पीछे क्या वजह है? क्या यह केवल लापरवाही है या फिर अवैध निर्माण का यह खेल अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है? साउथ दिल्ली की कई कॉलोनियों में बिल्डरों और प्रॉपर्टी मालिकों द्वारा खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मंजूर नक्शे के विपरीत निर्माण कर दिया जाता है। हैरानी की बात यह है कि यह निर्माण महीनों तक चलता रहता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय आंखें मूंदे रहते हैं। सवाल यह उठता है कि क्या इतने बड़े स्तर पर हो रहा निर्माण अधिकारियों की नजर से बच सकता है? इतना ही नहीं, पार्किंग और सार्वजनिक स्थानों पर कब्जा करने का सिलसिला भी तेजी से बढ़ रहा है। जिन इमारतों की ग्राउंड फ्लोर पार्किंग के लिए निर्धारित होती है, वहां दुकानों और फ्लैटों का निर्माण कर दिया जाता है। इससे न केवल ट्रैफिक जाम और अव्यवस्था फैलती है, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों का भी खुला उल्लंघन होता है। फुटपाथ और सरकारी जमीन पर कब्जा कर निर्माण करना अब जैसे एक आम चलन बन गया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जब भी अवैध निर्माण की शिकायत की जाती है, तो या तो कार्रवाई में जानबूझकर देरी की जाती है या फिर मामूली औपचारिकता पूरी कर मामले को दबा दिया जाता है। इससे यह संदेह और मजबूत होता जा रहा है कि इस पूरे खेल में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें हैं। यदि प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाएं, तो अवैध निर्माण को रोका जा सकता है, लेकिन ऐसा होता नजर नहीं आ रहा। अवैध निर्माण केवल नियमों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह लोगों की जान के साथ खिलवाड़ भी है। कमजोर निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी भविष्य में बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की निष्क्रियता चिंताजनक है। अब समय आ गया है कि सरकार और संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या पर सख्त और पारदर्शी कार्रवाई करें। यदि अवैध निर्माण के इस गठजोड़ को जल्द नहीं तोड़ा गया, तो साउथ दिल्ली की पहचान और नागरिकों की सुरक्षा दोनों खतरे में पड़ सकती हैं। जनता को भी जागरूक होकर भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण के खिलाफ आवाज बुलंद करनी होगी, तभी इस समस्या पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।