विनोद कुमार सिंह
भारतीय रेल केवल एक परिवहन प्रणाली नहीं है,बल्कि यह भारत की आर्थिक,सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना की धमनियों में प्रवाहित होने वाला जीवन प्रवाह है। ब्रिटिश काल में बिछी रेल पटरियों से लेकर स्वतंत्र भारत के औद्योगिक और सामाजिक पुनर्निर्माण तक,रेल ने देश को जोड़ा,गति दी और एक राष्ट्र की भौगोलिक विविधताओं को एक साझा अनुभव में पिरोया।आज जब भारत ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ 21वीं सदी के तीसरे दशक में आगे बढ़ रहा है,तब भारतीय रेल स्वयं को एक पारंपरिक परिवहन सेवा से बदलकर एक आधुनिक, तकनीक-संचालित,लॉजिस्टिक्स- सक्षम और ग्राहक-केंद्रित परिवहन इकोसिस्टम के रूप में पुनर्परिभाषित कर रही है।
रेल मंत्रालय द्वारा घोषित ‘बेहतर ऑन-बोर्ड सेवाएं’ और ‘गतिशक्ति कार्गो टर्मिनलों के माध्यम से रेल-आधारित लॉजिस्टिक्स’ की रणनीति,भारतीय रेल के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखी जा सकती है। यह सुधार केवल यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं है,बल्कि यह भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर,औद्योगिक उत्पादन, आपूर्ति श्रृंखला,और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई दिशा देने वाला कदम है।रेल यात्रा अनुभव के संदर्भ में भारतीय रेल लंबे समय से आम नागरिकों की जीवनरेखा रही है,परंतु यात्रियों की अपेक्षाएं समय के साथ बदलती गई हैं।स्वच्छता,आराम,समय बद्धता और सेवा गुणवत्ता अब केवल सुविधा नहीं बल्कि अधिकार के रूप में देखी जाने लगी हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में रेलवे द्वारा सामान्य डिब्बों सहित सभी कोचों में निरंतर सफाई की व्यवस्था लागू करने का निर्णय ऐतिहासिक महत्व रखता है। सामान्य श्रेणी के यात्रियों को अब तक सुविधाओं के मामले में अक्सर उपेक्षित माना जाता रहा है,किंतु वर्तमान सुधारों का केंद्रबिंदु यही वर्ग है,जो भारतीय रेल के सामाजिक लोकतंत्र का प्रतीक है।
रेलवे द्वारा बेहतर लिनन प्रबंधन और कोच सफाई के लिए सेवा प्रदाता की पहचान तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव,भारतीय रेल के डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक बड़ा कदम है।एआई सक्षम निगरानी प्रणाली केवल सफाई की निगरानी तक सीमित नहीं रहेगी,बल्कि यह सेवा गुणवत्ता,शिकायत निवारण और प्रदर्शन मूल्यांकन के लिए एक डेटा-आधारित प्रणाली के रूप में विकसित हो सकती है।इससे रेलवे प्रशासन के निर्णय अधिक वैज्ञानिक,पारदर्शी और उत्तरदायी बनेंगे।रेलवे सुधारों का दूसरा और अधिक व्यापक आयाम रेल- आधारित लॉजिस्टिक्स और मल्टी-मॉडल टर्मिनलों के रूप में सामने आया है।वर्तमान में देश में 124 मल्टी- मॉडल टर्मिनल कार्यरत हैं,जिन्हें अब ‘कार्गो-प्लस- प्रोसेसिंग हब’ के रूप में विकसित करने की योजना है।इसका अर्थ यह है कि रेल टर्मिनल केवल माल लोड और अनलोड करने का स्थान नहीं रहेंगे,बल्कि वे मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग,भंडारण,प्रसंस्करण और वितरण के केंद्र बनेंगे।यह अवधारणा विकसित देशों के लॉजिस्टिक्स मॉडल के अनुरूप है, जहां परिवहन केंद्र आर्थिक गतिविधियों के क्लस्टर के रूप में कार्य करते हैं।इसके अतिरिक्त, 500 से अधिक गतिशक्ति कार्गो टर्मिनलों की योजना भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती है। प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत विभिन्न परिवहन माध्यमों—रेल, सड़क, जलमार्ग और वायु मार्ग—के एकीकरण का जो दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है,भारतीय रेल उसमें केंद्रीय भूमिका निभाने जा रही है।रेल-आधारित लॉजिस्टिक्स लागत-कुशल,ऊर्जा-कुशल और पर्यावरणीय दृष्टि से टिकाऊ है। भारत जैसे विशाल और विविध भौगोलिक संरचना वाले देश में, जहां माल परिवहन की लागत सकल घरेलू उत्पाद का महत्वपूर्ण हिस्सा है,रेल आधारित लॉजिस्टिक्स सुधार प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में निर्णायक सिद्ध हो सकते हैं।
लॉजिस्टिक्स सुधारों का प्रत्यक्ष प्रभाव कृषि,उद्योग,व्यापार और निर्यात क्षेत्र पर पड़ेगा।कृषि उत्पादों की समयबद्ध ढुलाई,औद्योगिक कच्चे माल की आपूर्ति, तैयार माल का वितरण और ई-कॉमर्स की बढ़ती मांग ऑल इन क्षेत्रों में रेल आधारित कार्गो नेटवर्क एक गेम चेंजर साबित हो सकता है।विशेष रूप से भारत के अंतर्देशीय और दूरस्थ क्षेत्रों में आर्थिक अवसरों का विस्तार होगा,जहां सड़क और अन्य परिवहन साधन सीमित हैं।
भारतीय रेल द्वारा फील्ड लर्निंग और ऑपरेशनल एफिशिएंसी के आधार पर इन सुधारों को पूरे नेटवर्क में लागू करने की योजना, प्रशासनिक परिपक्वता और व्यावहारिक दृष्टिकोण का संकेत है। अक्सर बड़े पैमाने पर लागू की गई योजनाएं जमीनी स्तर पर असफल हो जाती हैं,किंतु चरणबद्ध कार्यान्वयन और फील्ड अनुभव से सीखने की रणनीति नीति निर्माण में आधुनिक शासन मॉडल को दर्शाती है।रेलवे सुधारों का यह अभियान केवल तकनीकी या प्रशासनिक सुधार नहीं है,बल्कि यह एक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का वाहक है।भारतीय रेल लोकतांत्रिक भारत का सबसे बड़ा सार्वजनिक संस्थान है,जहां अमीर और गरीब, शहरी और ग्रामीण,सभी एक ही डिब्बे में यात्रा करते हैं।इसलिए जब सामान्य कोचों की सफाई और सेवा गुणवत्ता को प्राथमिकता दी जाती है,तो यह सामाजिक न्याय और समावेशन की भावना को भी प्रतिबिंबित करता है।डिजिटल निगरानी,एआई आधारित प्रणाली और सेवा प्रदाताओं के माध्यम से सफाई और लिनन प्रबंधन की गुणवत्ता सुधारने का उद्देश्य केवल दृश्य स्वच्छता नहीं,बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और यात्री संतोष को बढ़ाना भी है। स्वच्छता केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि गरिमा और सुरक्षा का प्रश्न है।कोविड-19 महामारी के बाद स्वच्छता और स्वास्थ सुरक्षा के प्रति नागरिकों की संवेदनशीलता बढ़ी है , भारतीय रेल का यह कदम उसी चेतना का परिणाम है।भारतीय रेल द्वारा लॉजिस्टिक्स हब के रूप में टर्मिनलों के विकास से निजी क्षेत्र की भागीदारी और निवेश के नए अवसर भी खुलेंगे।सार्वजनिक- निजी भागीदारी मॉडल के माध्यम से आधुनिक वेयरहाउसिंग,कोल्ड स्टोरेज,प्रोसेसिंग यूनिट्स और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम विकसित किए जा सकते हैं।इससे रोजगार सृजन,क्षेत्रीय विकास और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।भारत की अर्थव्यवस्था में लॉजिस्टिक्स की लागत लगभग 13-14 प्रतिशत आंकी जाती है, जो विकसित देशों की तुलना में अधिक है।रेल आधारित लॉजिस्टिक्स सुधारों से इस लागत में कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है। यदि यह लक्ष्य सफल होता है,तो भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे,निर्यात बढ़ेगा और ‘मेक इन इंडिया’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों को ठोस आधार मिलेगा।रेलवे सुधारों का यह अभियान उस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है,जिसमें भारत अपने बुनियादी ढांचे को आधुनिक,टिकाऊ और डिजिटल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हाई-स्पीड रेल,समर्पित माल गलियारे, स्टेशन पुनर्विकास, .वंदे भारत ट्रेनें,और डिजिटल टिकटिंग -ये सभी पहलें एक समग्र परिवहन क्रांति की ओर संकेत करती हैं।ऑन-बोर्ड सेवाओं में सुधार और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का विस्तार इस क्रांति के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।इस परिवर्तन की सफलता प्रशासनिक क्षमता,तकनीकी कार्यान्वयन, वित्तीय संसाधनों और नागरिक सहभागिता पर निर्भर करेगी।सेवा प्रदाताओं की पारदर्शी नियुक्ति, एआई सिस्टम की विश्वसनीयता, डेटा सुरक्षा,और जमीनी स्तर पर कर्मचारियों का प्रशिक्षण – ये सभी कारक सुधारों की स्थिरता और प्रभावशीलता को निर्धारित करेंगे।
भारतीय रेल के सुधारों की यह नई एक्सप्रेस केवल पटरियों पर दौड़ती ट्रेन नहीं,बल्कि भारत के विकास पथ पर दौड़ती परिवर्तन की रेलगाड़ी है। यह सुधार भारत के आम नागरिक को बेहतर यात्रा अनुभव, उद्योग को कुशल लॉजिस्टिक्स,और राष्ट्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता प्रदान करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
जब सामान्य कोच का यात्री स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण में यात्रा करेगा,जब किसान का उत्पाद समय पर बाजार पहुंचेगा,जब उद्योग को कच्चा माल सस्ती और तेज़ गति से मिलेगा,और जब भारत का निर्यात वैश्विक बाजार में नई पहचान बनाएगा – तब यह कहा जा सकेगा कि भारतीय रेल ने केवल पटरियां नहीं बिछाईं,बल्कि विकसित भारत की राह भी प्रशस्त की।भारतीय रेल के इस परिवर्तन कारी अभियान को केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं,बल्कि एक राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखा जाना चाहिए।
यह मिशन भारत की गति, दिशा और नियति को आकार देने वाला है।रेल की सीटी केवल स्टेशन पर आगमन का संकेत नहीं,बल्कि भारत के भविष्य के आगमन की उद्घोषणा है। वही ऑन-बोर्ड सेवाओं से लेकर गतिशक्ति कार्गो टर्मिनलों तक भारत के परिवहन परिदृश्य में ऐतिहासिक परिवर्तन – अर्थात सुधारों की पटरी भारतीय रेल नई रप्तार लगाने के लिए तत्पर है ।





