गीतम (GITAM) में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री रथिन रॉय ‘ह्यूमैनिटीज़ एंड सोशल साइंसेस’ (मानविकी और सामाजिक विज्ञान) विभाग के प्रमुख नियुक्त

Renowned economist Rathin Roy appointed as the head of the Department of Humanities and Social Sciences at GITAM

रविवार दिल्ली नेटवर्क

गीतम (GITAM) (मानित विश्वविद्यालय) ने प्रोफेसर रथिन रॉय को ‘स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज़ एंड सोशल साइंसेस’ का डीन नियुक्त किया है। प्रोफेसर रॉय भारत के वरिष्ठ सार्वजनिक वित्त अर्थशास्त्री हैं, जिनके पास राजकोषीय नीति, व्यापक आर्थिक शासन और संस्थागत सुधारों में तीन दशकों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अधीन ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी’ के निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएँ दी हैं। इसके बाद, उन्होंने लंदन स्थित वैश्विक नीति थिंक टैंक ‘ओवरसीज डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट’ का नेतृत्व किया। उनके करियर में न्यूयॉर्क, बैंकॉक और ब्रासीलिया में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के साथ वरिष्ठ कार्यभार भी शामिल हैं। उन्होंने भारत के 13वें वित्त आयोग में संयुक्त सचिव के स्तर पर आर्थिक सलाहकार के रूप में कार्य किया, जहाँ उन्होंने राजकोषीय संघवाद और सार्वजनिक व्यय ढांचे में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वह मैनचेस्टर विश्वविद्यालय और लंदन विश्वविद्यालय में अध्यापन कर चुके हैं। उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पीएचडी और एम.फिल., जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से एम.ए. और सेंट स्टीफंस कॉलेज से बी.ए. की उपाधि प्राप्त की है।

उनकी यह नियुक्ति गीतम के विकास के एक निर्णायक चरण में इसके बौद्धिक आधार को और मजबूती प्रदान करती है। जैसे-जैसे यह विश्वविद्यालय ज्ञान और सत्यनिष्ठा पर आधारित एक बहु-विषयक और अनुसंधान-प्रधान संस्थान बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, यह उन विषयों में अपने नेतृत्व को सशक्त कर रहा है जो राज्य की क्षमता, संस्थागत संरचना और सार्वजनिक तर्कशक्ति को आकार देते हैं। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ‘मानविकी और सामाजिक विज्ञान’ कोई गौण विषय नहीं हैं, बल्कि ये इसकी नींव हैं।

यह स्कूल अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान और संबंधित क्षेत्रों का केंद्र है। ये विषय यह निर्धारित करते हैं कि समाज किस प्रकार संसाधनों का वितरण करता है, संस्थानों का शासन कैसे चलाता है और सरकारी खजाने पर होने वाले दावों का निपटारा कैसे करता है। एक शोध विश्वविद्यालय, जो तकनीक, चिकित्सा, प्रबंधन और व्यावहारिक विज्ञान के क्षेत्रों में विस्तार कर रहा है, ये विषय वह विश्लेषणात्मक ढांचा प्रदान करते हैं जिसके भीतर नवाचार ‘नीति’ बनता है और शोध ‘सुधार’ का रूप लेता है।

प्रोफेसर रॉय के नेतृत्व में, यह स्कूल ‘पॉलिटिकल इकोनॉमी’, ‘पब्लिक फाइनेंस’ और ‘डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स’ के क्षेत्रों में अकादमिक शोध को और गहरा करेगा। इसमें विशेष रूप से राजकोषीय संघवाद, नियामक संरचना और संस्थागत जवाबदेही पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। यह संस्थान राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं के अनुरूप व्यवस्थित शोध समूहों का निर्माण करेगा और सरकारी विभागों, नियामक प्राधिकरणों तथा बहुपक्षीय संस्थानों के साथ सहयोग को मजबूत करेगा। यह ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन की पढ़ाई में ठोस नीतिगत विश्लेषण को जोड़ेगा। साथ ही, यह गीतम के ‘लिबरल एजुकेशन’ ढांचे के तहत अलग-अलग विषयों को एक साथ मिलकर पढ़ने के तरीकों को और मजबूत बनाएगा।

यह नियुक्ति गीतम के उस उद्देश्य को आगे बढ़ाती है, जिसके तहत वह एक मजबूत क्षेत्रीय संस्थान से बदलकर अनुसंधान, व्यावहारिक शिक्षा और नीतिगत भागीदारी के लिए पहचाने जाने वाले विश्वविद्यालय के रूप में विकसित होना चाहता है। अपने ‘मानविकी और सामाजिक विज्ञान’ एजेंडे के केंद्र में राजकोषीय शासन और संस्थागत अर्थशास्त्र को रखकर, गीतम यह संकेत दे रहा है कि अनुसंधान और नवाचार में उसका विस्तार सार्वजनिक प्रणालियों और आर्थिक ढांचे के साथ गंभीर जुड़ाव पर आधारित होगा।