- मेरा ध्यान अपना हॉकी कौशल और रफ्तार बेहतर करने पर है
- हमारा मकसद होबार्ट चरण में चारों मैच जीतना है
सत्येन्द्र पाल सिंह
नई दिल्ली : नौजवान स्ट्राइकर अंगदबीर सिंह ने एक बरस के बाद एफआईएच हॉकी प्रो लीग 2025-26 के होबार्ट चरण के लिए भारत की 24 सदस्यीय हॉकी टीम में वापसी की है। अगंद ने करीब एक बरस पहले एफआईएच प्रो हॉकी लीग 2024-25 से आयरलैंड के खिलाफ भुवनेश्वर में भारतीय सीनियर टीम के लिए अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर का आगाज किया था लेकिन इसके बाद उन्हें सीनियर टीम के लिए खेलने का मौका ही नहीं मिल पाया। भारत के अपने घर में राउरकेला में एफआईएच प्रो हॉकी लीग 2025-26 चरण में अपने चारों मैच हारने के बाद निजी कारणों से ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह के होबार्ट एफआईएच प्रो हॉकी लीग चरण से बाहर होने पर होबार्ट चरण में टीम की कप्तानी मिडफील्डर हार्दिक सिंह कर रहे हैं। 23 बरस के नौजवान स्ट्राइकर भारत के लिए एफआईएच प्रो लीग के होबार्ट चरण में दमदार प्रदर्शन कर अलग छाप छोड़ने को बेताब हैं।
एफआईएच प्रो लीग का होबार्ट चरण अंगदबीर सिंह के भारत का पहला विदेशी दौरा होगा और इसमें वह अपनी छाप छोड़ने को बेताब हैं । भारत के सामने एफआईएच प्रो लीग के होबार्ट चरण में ऑस्ट्रेलिया और स्पेन से पार पाने की मजबूत चुनौती होगी। अंगदबीर कहते हैं, ’ एक बरस बाद भारत की सीनियर हॉकी टीम में लौटना एक अलग अहसास है। भारत के लिए सीधे अंतर्राष्ट्रीय मैच में खेलने उतरना और खास है। आप एफआईएच प्रो लीग के होबार्ट चरण में मेरा बदला हुआ रूप देखेंगे। भारत में राष्ट्रीय शिविर में होबार्ट चरण के लिए हमारी तैयारी बहुत बढ़िया रही हैं। प्रशिक्षण सत्रों को मैन टू मैन यानी एक के पीछे एक साये तरह लग कर खेलने वाली स्पेन और ऑस्ट्रेलिया और स्पेन को जेहन में रख कर तैयार किया गया है।हमने पूरी शिद्दत से अभ्यास किया और हमारा जोर फिटनेस और मैच के लिए पूरी तरह चौकस रहने पर रहा। राउरकेला चरण में सभी चार मैच हारने के बावजूद हमारी टीम की सोच सकारात्मक है। हर किसी को मुश्किल दौर से गुजरना पड़ता है। बावजूद इसके हमारा फोकस सकारात्मक रहने और मानकों के मुताबिक खेलने पर है। हमारा मकसद होबार्ट चरण में चारों मैच जीतना है। हमारा ध्यान पिछले नतीजों की बजाय अपने प्रदर्शन पर है। हमारी सोच पूरे विश्वास के साथ खेल कर अपने सभी चारों मैच जीतने की है।
ऑस्ट्रेलिया के परिचित मौसम के चलते वहां की स्थितियों से तालमेल बैठाना आसान होगा। ऑस्ट्रेलिया का मौसम बहुत कुछ बेंगलुरू जैसा है , न ज्यादा गर्म, न ज्यादा ठंडा और इसी के चलते हमारे लिए हमारे लिए खुद को उसके मुताबिक ढालने और अपना वूरा ध्यान तैयारियों पर है।
उन्होंने कहा,‘मैंने सीनियर खिलाड़ियों को खेलते देख कर मैदान पर उससे बाहर खुद संभालना सीखा। हमारे उस्तादों ने मुझसे अपने खेल में कुछ सुधार करने को कहा है और मैंने इसे बहुत गंभीरता से लिया है। मेरा ध्यान अपना हॉकी कौशल और रफ्तार बेहतर करने पर है। मेरे लिए एचआईएल बहुत अहम साबित हुआ और मुझे खिताब जीतने वाली अपनी वेदांता कलिंगा लांसर्स की ओर से खेलते हुए अनुभवी अंतराष्ट्रीय से बहुत कुछ सीखने को मिला। मुझे खुशी हे कि कोचिंग स्टाफ ने मुझ पर भरोसा किया और मुझे भारतीय टीम में एक और मौका दिया। मुझे बतौर स्ट्राइकर और विंगर खेलना पसंद है क्योंकि इसमें मैं अपनी रफ्तार का इस्तेमाल कर सकता हूं। मैं इसका उपयोग कर मैं टीम के लिए पेनल्टी कॉर्नर बना सकता हूं। यह मेरी ताकत है और मैं इसका इस्तेमाल कर टीम के लिए योगदान करना चाहता हूं। संजय और अरिजित सिंह हुंडल ने मुझे धैर्य बनाए रखने और प्रोसेस पर भरोसा बनाए रखने में मदद की। टीम में हम सभी एक दूसरे क साथ देकर मजबूती से खेलने को प्रेरित करते हैं। जहां तक घर से बाहर दुनिया की शीर्ष वरीयता प्राप्त टीमों के खिलाफ खेलने की बात है तो इस बाबत मेरा कहना है मैदान पर 11 बनाम 11 होते हैं। जो भी ज्यादा प्रतिबद्धता और संकल्प दिखाता है जीत उसे ही मिलती है।





