आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ सहयोग व डाटा संरक्षण सम्मिट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ सहयोग व डाटा संरक्षण सम्मिट

Artificial Intelligence Collaboration and Data Protection Summit Artificial Intelligence Collaboration and Data Protection Summit

प्रो. नीलम महाजन सिंह

इस सदी में वैसे भी मानवीय रिश्ते डिजिटल हो चुके हैं। फिर यह इस सदी में वैसे भी मानवीय रिश्ते डिजिटल हो चुके हैं. फिर यह ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ जीवन में और अधिक डिजिटल प्रयोग कर देगी। यह कृत्रिम इंटेलिजेंस क्या है? अब कुछ ऐसे ऐप बनाए जा रहे हैं, जिससे कि आप सारा कार्य स्वयं हा कर सकते हैं। इस सप्ताह भारत में पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में अन्तरराष्ट्रीय ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ सहयोग व डाटा संरक्षण को लेकर, भारत मंडलम में विचार गोष्ठी की मेज़बानी की गई।

इसका विशेष प्रभाव युवा पीड़ी पर पड़ने वाला है। भारत में अमरीकी राजदूत सर्जियो गोर ने पीएम नरेंद्र मोदी और प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के बीच मीटिंग का इशारा दिया है। पीएम मोदी को डोनाल्ड ट्रंप को यह समझाने की कोशिश करनी चाहिए कि भारत-अमेरिका सहयोग दोनों देशों की अर्थिक व्यवस्था के लिए महत्त्वपूर्ण है। पीएम नरेंद्र मोदी प्रचार-प्रसार की और सजग हैं।

इंडिया-यूएसए ने ‘पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन’ पर साइन किए हैं; जिस से एडवांस्ड ‘एआई चिप’ में इंडिया की स्टेबल पहुँच पक्की होगी। इस संगोष्ठी में दुनिया के दर्जनों लीडरों और मिनिस्टरों ने हिस्सा लिया। ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ को नियंत्रित करने पर अपनी राय रखी जाए। पांच दिन की यह मीटिंग, अपनी तरह की सबसे बड़ी और किसी प्रगतिशील देश में होने वाली पहली संगोष्ठी है। एआई रेगुलेशन, सभी तक पहुंचे व ग्लोबल सहयोग की ज़रूरी मांगों पर ज़ोर दिया गया। ओपन-ऐआई (‘OpenAI’) के सीईओ; सैम ऑल्टमैन ने चेतावनी दी कि (ऐआई) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शक्ति का सेंट्रलाइज़ेशन खतरनाक हो सकता है और उन्होंने तुरंत सुरक्षा उपायों की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को दुनिया की आम भलाई के लिए कार्यरत रहना चाहिए”। संयुक्त राष्ट्र के सेक्रेटरी-जनरल एंटोनियो गुटेरेस ने भी ऐआई स्किल्स व कंप्यूटिंग एक्सेस को बढ़ाने के लिए $3 बिलियन के ग्लोबल फंड को घोषित किया। इस सम्मिट में हज़ारों पार्टिसिपेंट्स, बड़े टेक सीइओ और ज़रूरी इन्वेस्टमेंट अनाउंसमेंट्स हुए; जिससे ग्लोबल ऐआई गवर्नेंस में एक अहम प्लेयर के तौर पर उभरने के भारत के आकांक्षा को मज़बूती मिली है। आंध्र प्रदेश ने अगले तीन से पांच सालों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) साइबर सिक्योरिटी और क्वांटम कंप्यूटिंग समेत नई टेक्नोलॉजी में एक लाख युवाओं को स्किल देने के लिए ग्लोबल टेक्नोलॉजी की बड़ी कंपनी आईबीएम (IBM) के साथ पार्टनरशिप की है। इस इनिशिएटिव का मकसद लर्नर्स को इंडस्ट्री-अलाइंड, फ्यूचर-रेडी स्किल्स से इक्विप करना और राज्य के बढ़ते टेक्नोलॉजी वर्कफोर्स को मज़बूत करना है।

नई दिल्ली में ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ में इस कोलेबोरेशन को फॉर्मल बनाने वाले एक ‘लेटर ऑफ़ इंटेंट’ पर साइन किए गए। इस मौके पर आईबीएम व ईमिया (EMEA) और ग्रोथ मार्केट्स की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट व चेयरपर्सन सुश्री एना पाउला, आईबीएम इंडिया और साउथ एशिया के मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप पटेल, आईबीएम रिसर्च इंडिया के डायरेक्टर और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर डॉ. अमित सिंघी, और गवर्नमेंट रेगुलेटरी अफेयर्स के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर श्री किशोर बालाजी मौजूद थे। इस पार्टनरशिप में स्ट्रक्चर्ड ट्रेनिंग प्रोग्राम, हैंड्स-ऑन लर्निंग और इंडस्ट्री की ज़रूरतों के हिसाब से तालमेल पर फोकस करने की उम्मीद है, ताकि यह पक्का हो सके कि पार्टिसिपेंट्स ‘एडवांस्ड टेक्नोलॉजी डोमेन’ में हाई-डिमांड रोल के लिए तैयार हैं। इस कदम को आंध्र प्रदेश की बड़ी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है ताकि वह खुद को उभरती ‘टेक्नोलॉजी हब’ के तौर पर बना सके व ग्लोबल डिजिटल इकॉनमी के लिए नौकरीयों के लिए टैलेंट तैयार कर सके। भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे ने कहा, “भारत में हो रहा एआई इम्पैक्ट समिट सिर्फ़ ग्लोबल साउथ के लिए ही नहीं, बल्कि ग्लोबल विश्व के लिए महत्व रखता है”। उन्होंने भारत को टेक्नोलॉजी व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्रांति का तेज़ी से उभरता हुआ सेंटर बताया। एएनआई (ANI) से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मैं एआई इम्पैक्ट सम्मिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आकर बहुत खुश हूँ। आप कह सकते हैं कि यह ग्लोबल साउथ में होने वाला पहली सम्मिट है। मैंने कई लोगों से यही सुना है कि यह पहली बार है जब एआई सम्मिट गलोबल साउथ में हो रही है। हाँ, यह सच है, लेकिन ग्लोबल साउथ से ज़्यादा, यह समिट सच में ग्लोबल महत्व रखता है।” पीएम नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा करते हुए विश्व नेताओं ने कहा कि वे इस सम्मिट में हिस्सा लेने के न्योते के लिए आभारी हैं। क्लीन एनर्जी व नई टेक्नोलॉजी को जोड़ने वाले संभावित सहयोग महत्वपूर्ण हैं। तेज़ बहने वाली नदियों का इस्तेमाल करके क्लीन ग्रीन रिन्यूएबल एनर्जी बनाने के लिए पार्टनरशिप के डेवलपमेंट को बढ़ावा देना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मामले में कॉमन मकसद को पूरा करने के लिए कदम उठाने चाहिए। दक्षिणी एशिया में सस्टेनेबल टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट में भी मदद होगी।

पीएम नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 के मौके पर विश्व नेताओं से चर्चा की। भारत के पास एक बड़ा टैलेंट पूल है और हमने अपनी फॉरेन पॉलिसी को इस तरह से चलाया है जिससे वह भरोसा बनता है। भारत व यूनाइटेड स्टेट्स ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के मौके पर ‘पैक्स सिलिकॉ (Pax Silica) डिक्लेरेशन’ पर हस्ताक्षर किए, जो ज़रूरी व उभरती टेक्नोलॉजी में सहयोग को गहरा करने की दिशा में अहम कदम है। इस डिक्लेरेशन पर यूनियन मिनिस्टर फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी अश्विनी वैष्णव और अमेरिका अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इकोनॉमिक अफेयर्स, जैकब हेलबर्ग की मौजूदगी में साइन किए गए। इस एग्रीमेंट से सेमीकंडक्टर, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी जैसे एरिया में बाइलेटरल कोऑपरेशन को मज़बूत करने की उम्मीद है, जिससे दोनों देशों के बीच बढ़ती टेक पार्टनरशिप को और मज़बूती मिलेगी। हस्ताक्षर समारोह में, अश्विनी वैष्णव ने इस इवेंट को मुमकिन बनाने व भारत की टेक्नोलॉजी की महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए नेताओं का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा, “मैं विदेश मंत्री जयशंकर, पीयूष गोयल व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न को खास धन्यवाद देना चाहता हूँ, जिन्होंने यह सब मुमकिन बनाया है”। सारांंशार्थ हम यहां सिर्फ एक सम्मिट नहीं कर रहे हैं; हम भविष्य बना रहे हैं। हम युवा पीढ़ी के लिए नींव रख रहे हैं। अमेरिकन राजदूत दूत ने समिट को ‘बहुत असरदार’ बताया। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में, भारत में US राजदूत सर्जियो गोर ने इस मीटिंग को प्रोडक्टिव व आगे की सोच वाला बताया। उन्होंने ऐआई स्पेस में गहरे बाइलेटरल एंगेजमेंट की गुंजाइश पर ज़ोर देते हुए कहा, “यह एक बहुत असरदार सम्मिट रही है। हमारे दोनों देशों के बीच बहुत सारे मौके हैं, और इसलिए हम उस पर काम करने के लिए उत्सुक हैं।” दर्जनों ग्लोबल लीडर्स ने ‘युनिफाइड एआई गवर्नेंस ब्लूप्रिंट बनाने तैयार किया है। एआई के सैम ऑल्टमैन ने तुरंत निगरानी की मांग की चेतावनी दी। “किसी भी फर्म या देश द्वारा सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल बर्बादी का कारण बनता है, क्योंकि जेनरेटिव ऐआई का प्रॉफिट बूम समाज व दुनिया के खतरों से टकराता है। फिर भी ओवरकिल इनोवेशन को रोकने का रिस्क रखता है”।

दुनिया के नेताओं ने भरोसे, बैलेंस और मज़बूत ग्लोबल सहयोग की अपील की। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को नैतिक, इंसानी-केंद्रित डेवलपमेंट की ओर ले जाने और साथ ही इंटरनेशनल सहयोग को गहरा करने की आवश्यकता है। फ्रांस के राष्ट्रपति ईमेनयुल मेकराॅव ने भारत-फ्रांस की मज़बूत पार्टनरशिप व उभरती टेक्नोलॉजी में इसके पोटेंशियल पर ज़ोर दिया। 1995 में भारत के अपने पहले दौरे को याद करते हुए, मेकराॅव ने कहा कि दोनों देशों के पास काबिलियत का एक नया सेंटर बनाने, मार्केट बढ़ाने और टैलेंटेड इनोवेटर्स का एक पूल बनाने का मौका है। उन्होंने भविष्य के सहयोग की नींव के तौर पर भरोसे पर ज़ोर दिया व ऐआई के असर का फ़ायदा उठाने में पीएम नरेंद्र मोदी के विज़न का अभिनंदन किया।श्रीलंका के प्रेसिडेंट अनुरा कुमारा दिसानायके ने टेक्नोलॉजी में तरक्की के लिए एक बैलेंस्ड नज़रिए की अपील की। फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों ने अपना हाई-प्रोफाइल इंडिया दौरा X पर “दिल से थैंक-यू इंडिया!” कहकर खत्म किया, और गर्मजोशी भरी मेहमाननवाज़ी के बीच अपने पसंदीदा पलों का एक वीडियो शेयर किया। पीएम नरेंद्र मोदी ने एक बाइलेटरल मीटिंग होस्ट की, जिसमें मैक्रों ने टेक, इनोवेशन और स्ट्रैटेजी के लिए इंडिया-फ्रांस रिश्तों को ‘सबसे ऊंचे पॉइंट’ पर बताया। एल एंड टी (L&T) सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के सीईओ डॉ. संदीप कुमार ने सम्मिट की तारीफ करते हुए इसे शानदार बताया। मेटा के चीफ एआई ऑफिसर एलेक्जेंडर वांग ने कहा, “भारत में, हम पर्सनल सुपरइंटेलिजेंस को बहुत तेजी से बढ़ा सकते हैं”।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निमंत्रण पर अनेक देशों के नेता एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए राजधानी दिल्ली आए। भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे, बोलीविया के उपराष्ट्रपति एडमंड लारा मोंटानो, ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा, क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेनकोविक, एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार करिस, फ़िनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो, फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों, ग्रीस के प्रधानमंत्री क्यारीकोस मित्सोताकिस, गुयाना के उपराष्ट्रपति डॉ. भारत जगदेव, कज़ाकिस्तान के पीएम ओल्ज़ास बेक्टेनोव, लिकटेंस्टीन वंशानुगत राजकुमार एलोइस, लिकटेंस्टीन रियासत के वंशानुगत राजकुमार, मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम, सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक, स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी, स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज़ पेरेज़-कास्टेजोन, श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा डिसानायका, सेशेल्स के उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिल्ले, स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय परमेलिन, नीदरलैंड के प्रधानमंत्री डिक शूफ, यूएई के शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, अदि ने संगोष्ठी में हिस्सा लिया। यह सम्मिट भविष्य के लिए मार्गदर्शन देगी। आम जनता के अंदर की उत्सुकता से यह स्पष्ट है कि सभी सीमाओं के साथ एआई की भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।