जयपुर में मेट्रो के विस्तार से राजधानी गुलाबी नगरी को जाम से मिलेगी राहत

The expansion of the metro in Jaipur will provide relief from traffic jams in the Pink City

गोपेन्द्र नाथ भट्ट

राजस्थान की राजधानी गुलाबी नगरी जयपुर तेजी से बढ़ते शहरीकरण और यातायात दबाव के बीच आधुनिक परिवहन समाधान की ओर अग्रसर है। इसी दिशा में जयपुर मेट्रो एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई और इसने शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नया आयाम दिया। अब मेट्रो के विस्तार की योजनाएं जयपुर के भविष्य के शहरी विकास की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

जयपुर में मेट्रो की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई थी, जब इसके पहले चरण का संचालन एशिया की सबसे बड़ी आवासीय कॉलोनी मानसरोवर से चांदपोल के बीच शुरू किया गया। बाद में इसका विस्तार बड़ी चौपड़ तक किया गया, जिससे शहर के परकोटे (वॉल्ड सिटी) क्षेत्र को भी मेट्रो नेटवर्क से जोड़ा गया। यह कदम न केवल यातायात को सुगम बनाने में सहायक रहा, बल्कि पर्यटकों के लिए भी सुविधाजनक साबित हुआ है।

जयपुर मेट्रो की विशेषता इसकी आधुनिक तकनीक, स्वच्छता और समयबद्धता है। वातानुकूलित कोच, स्वचालित टिकटिंग प्रणाली और सुरक्षा के उच्च मानक इसे यात्रियों के बीच लोकप्रिय बनाते हैं। हालांकि, सीमित रूट के कारण इसका पूर्ण लाभ अभी तक शहर के सभी हिस्सों तक नहीं पहुंच पाया है। यही कारण है कि मेट्रो के दूसरे चरण (फेज-2) और विस्तार की योजनाएं लंबे समय से चर्चा में हैं। प्रस्तावित विस्तार के तहत मेट्रो को सीतापुरा और विद्याधर नगर तक ले जाने की योजना है। यह विस्तार शहर के दक्षिणी और उत्तरी हिस्सों को जोड़ते हुए एक व्यापक परिवहन नेटवर्क तैयार करेगा। विशेष रूप से सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र और संस्थागत हब है, जबकि विद्याधर नगर तेजी से विकसित होता आवासीय क्षेत्र है—ऐसे में इन इलाकों को मेट्रो से जोड़ना अत्यंत उपयोगी साबित होगा।

इसके अलावा, जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की मांग भी लंबे समय से उठ रही है। यदि यह योजना साकार होती है, तो शहर में आने वाले पर्यटकों और व्यापारिक यात्रियों को सीधा और सुविधाजनक परिवहन विकल्प मिल सकेगा।

मेट्रो विस्तार के कई फायदे हैं। सबसे पहले, यह सड़क यातायात पर दबाव कम करेगा और जाम की समस्या से राहत दिलाएगा। दूसरा, प्रदूषण में कमी आएगी, क्योंकि अधिक लोग निजी वाहनों की बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करेंगे। तीसरा, यह शहर के आर्थिक विकास को गति देगा, क्योंकि बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।हालांकि, इन योजनाओं के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। मेट्रो परियोजना के लिए भारी वित्तीय निवेश की आवश्यकता होती है, और भूमि अधिग्रहण भी एक जटिल प्रक्रिया है। इसके अलावा, ऐतिहासिक शहर होने के कारण जयपुर में निर्माण कार्य के दौरान विरासत संरचनाओं की सुरक्षा भी एक बड़ी जिम्मेदारी है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए संतुलित और सावधानीपूर्वक योजना बनाना आवश्यक है। राज्य सरकार और जयपुर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन इस दिशा में लगातार प्रयासरत हैं। केंद्र सरकार के सहयोग और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के माध्यम से वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था करने पर भी विचार किया जा रहा है।

अंततः कहा जा सकता है कि जयपुर मेट्रो केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि जयपुर के आधुनिक और स्मार्ट शहर बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि इसके विस्तार की योजनाएं समयबद्ध और प्रभावी तरीके से लागू होती हैं, तो यह न केवल शहर की यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ बनाएगा, बल्कि जयपुर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बेहतर शहरी मॉडल के रूप में स्थापित करेगा।

इधर खबर जयपुर मेट्रो परियोजना के दूसरे चरण की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को लेकर केन्द्र सरकार जल्द फाइनल स्वीकृति देने वाली है. दूसरे चरण के अलावा भविष्य में शहर में किस तरह मेट्रो के नेटवर्क का विस्तार किया जाए उसको लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बैठक ली। राज्य सरकार की ओर से पिछले वर्ष मई में जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण की डीपीआर केन्द्र सरकार को मंजूरी के लिए भेजी गई थी. इंटर मिनिस्ट्रियल कंसल्टैशन के बाद मामला मंजूरी के लिए केन्द्र सरकार के पब्लिक इनवेस्टमेंट बोर्ड को भेजा गया ।केन्द्र सरकार के वित्त मंत्रालय (व्यय) के सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभिन्न संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया. बैठक में मौजूद राजस्थान मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के एमडी वैभव गालरिया ने दूसरे चरण की डीपीआर को लेकर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया. इसके बाद में डीपीआर को स्वीकृति दी गई. किसी भी मेट्रो की डीपीआर पर केन्द्र सरकार की स्वीकृति प्रक्रिया में पब्लिक इनवेस्टमेंट बोर्ड की स्वीकृति मिलना काफी अहम पड़ाव है. अब डीपीआर पर केवल केन्द्रीय कैबिनेट की स्वीकृति शेष है। उम्मीद है अगले हफ्ते केन्द्र सरकार जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण की डीपीआर पर लगा सकती है फाइनल मुहर।डीपीआर का प्रस्ताव स्वीकृति के लिए पहुंच गया है केंद्रीय कैबिनेट
केन्द्रीय कैबिनेट की बैठक आगामी बुधवार 25 मार्च को प्रस्तावित है। दूसरे चरण की डीपीआर पर मुहर लगने के बाद दूसरे चरण का मौके पर तुरंत काम शुरू हो जाएगा ।

बताते है जयपुर के प्रहलादपुरा से पिंजरापोल गौशाला तक मेट्रो का शुरू काम हो जाएगा । करीब 42 किमी लंबे दूसरे चरण की कुल लागत 12 हजार 260 करोड़ रुपए है। दूसरे चरण को राजस्थान मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने सात-आठ पैकेजों में विभक्त किया है। पहले पैकेज की लागत करीब 918 करोड़ रुपए है। बताते है कार्यादेश मिलने के बाद चयनित फर्म मौके पर कर काम शुरू देगी। अनुबंध के मुताबिक फर्म को 34 महीने में काम पूरा करना होगा ।

करीब 11 किलोमीटर लंबे कोरिडोर निर्माण का काम करना होगा पूरा। इस पैकेज में प्रहलादपुरा, मानपुरा, बीलवा कलां,बीलवा,गोनेर रोड,सीतापुरा, जेईसीसी, कुंभा मार्ग,हल्दीघाटी गेट और पिंजरापोल गौशाला एलिवेटेड मेट्रो स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा ।

जयपुर में पहले और दूसरे चरण के बाद शहर के यातायात की भावी जरूरतों के अनुसार किन-किन इलाकों में जयपुर मेट्रो के नेटवर्क का विस्तार किया जाए, इसको लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के स्तर पर लगातार मंथन चल रहा है।

अब महानगर का स्वरूप ले रहा जयपुर शहर का मेट्रो को लेकर एक मास्टर प्लान बनेगा। मेट्रो का मास्टर प्लान राजस्थान मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन बनाएगा। यह मास्टर प्लान जेडीए से समन्वय करते हुए बनाया जाएगा। अजमेर रोड,आगरा रोड एवं दिल्ली रोड को जोड़ा जाएगा। तीनों प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों को मेट्रो रूट से जोड़ा जाएगा। मेट्रो अधिकारियों ने बताया वर्तमान में गलता गेट तक फेज वन सी के तहत और दो सौ फीट बायपास तक फेज वन डी के तहत मेट्रो चलाने के लिए कोरिडोर निर्माण का चल रहा है ।आगामी दिनों में गलता गेट से आगे आमेर होते हुए दिल्ली रोड तक और दो सौ फीट बायपास चौराहे से आगे अजमेर रोड तक का बनेगा प्लान। बैठक में मेट्रो के प्रस्तावित तीसरे फेज को लेकर हुई चर्चा। तीसरे फेज में जगतपुरा व वैशाली नगर में मेट्रो चलाने पर हुई चर्चा। इसको लेकर राज्य सरकार ने भी बजट में घोषणा की थी। बैठक में तीसरे फेज के विभिन्न विकल्पों को लेकर की गई चर्चा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने निर्देश दिए कि एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट को इस प्रकार क्रियान्वित किया जाए कि भविष्य में मेट्रो कोरिडोर के निर्माण में कोई समस्या नहीं हो । पिंजरापोल गौशाला से एयरपोर्ट तक दूसरे पैकेज में मेट्रो चलाने के लिए निविदा प्रपत्र तैयार किया जा चुका है। जल्द ही इस प्रपत्र को फाइनल कर दूसरे पैकेज की भी निविदा जारी करने की राजस्थान मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन तैयारी कर रहा है।

राजस्थान में मेट्रो परियोजना फिलहाल केवल जयपुर तक सीमित है, जहाँ जयपुर मेट्रो संचालित हो रही है और इसका विस्तार प्रस्तावित है। राज्य के अन्य बड़े शहरों जैसे सूर्य नगरी जोधपुर, झीलों की नगरी उदयपुर और शिक्षा नगरी कोटा में फिलहाल मेट्रो की कोई ठोस योजना नहीं है। इन शहरों में वर्तमान में ई-बस और स्मार्ट पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर जोर दिया जा रहा है। कम जनसंख्या घनत्व और उच्च लागत के कारण मेट्रो व्यावहारिक नहीं मानी जा रही, हालांकि भविष्य में राजस्थान के इन शहरों में भी मेट्रो की संभावनाएं बनी हुई हैं।