राजीविका और रूडा के हस्तशिल्प स्टॉल्स पर हुई 75 लाख से ज्यादा की रिकार्ड बिक्री।
नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रसिद्ध उत्सवों में एक राजस्थान उत्सव-2026 प्रदेश की अमिट और अनुपम छाप छोड़कर बुधवार को समाप्त हो गया। बीकानेर हाउस परिसर में आयोजित इस 11 दिवसीय राजस्थान उत्सव में राजीविका और रूडा के हस्तशिल्प स्टॉल्स पर हुई 75 लाख से ज्यादा की रिकार्ड हुई।
जहां एक ओर राजस्थान की कला और संस्कृति का संगम दिखा वहीं दूसरी ओर राजस्थान व्यंजनों के स्वादों ने सबकी सराहना समेटी।
राजस्थान उत्सव राजधानी वासियों के आकर्षण का केन्द्र बना रहा और पूरा बीकानेर हाऊस परिसर ‘राजस्थानमय’ नजर आया। 11 दिवसीय इस उत्सव ने न केवल सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया, बल्कि राज्य के कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों के लिए आर्थिक अवसर भी सृजित किए।
राजस्थान के मशहूर गणगौर उत्सव को देखते हुए बीकानेर हाउस में 200 महिलाओं के समूह ने राजस्थानी परिधानों में गणगौर की सवारी निकाली जिसकों देखने के लिए सैकड़ो की संख्या में दर्शक एकत्रित हुए।
राजीविका और रूडा द्वारा प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए हस्तशिल्प कारों के माध्यम से लगाए गए लगभग 50 स्टॉल्स ने उत्सव में विशेष रौनक बिखेरी। इन स्टॉल्स पर हस्त कलाकारों द्वारा निर्मित राजस्थानी उत्पादों की खरीद के लिए दर्शकों में खूब उत्साह देखा गया। रूडा के मेला संचालक श्री ओमप्रकाश ने बताया कि पूरे उत्सव के दौरान हस्तकलाकारों ने लगभग 75 लाख रूपये से ज्यादा की बिक्री की जो इस आयोजन की सफलता और लोकप्रियता को दर्शाता है।उत्सव में हर शाम राजस्थान पर्यटन द्वारा सांस्कृतिक संध्याओं के आयोजन ने पूरे उत्सव को संगीतमय कर दिया। राजस्थान के लोककलाकारों ने प्रदेश के नृत्य और गायन प्रस्तुत कर सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
राजस्थान पर्यटन के सहायक निदेशक छत्रपाल यादव ने बताया कि इस वर्ष के उत्सव में पद्मश्री पुरस्कार से मनोनित लोककलाकारों सहित अन्य प्रसिद्ध कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दी। इसके अतिरिक्त श्रीराम भारतीय कला केन्द्र की छात्राओं ने कत्थक नृत्य प्रस्तुत किया।
उत्सव में मनोरंजन की श्रंखला में राजस्थानी व्यंजनों का भी अलग ही स्थान दिखा। राजस्थान के प्रसिद्ध व्यंजन दाल-बाटी-चूरमा, प्याज की कचौरी, मूंग की दाल का हलवा, मिर्ची बड़ा आदि के स्वाद ने दिल्ली वासियों को चांदनी चौक के स्वाद को भूलने को मजबूर कर दिया। इन सभी स्टाॅल्स पर व्यंजनों के स्वाद के लिए लोग प्रतीक्षा में खड़े दिखाई दिए।
पूरे उत्सव में मनोरंजन के लिए आयोजित पारंपरिक खेलों ने हर उम्र और वर्ग के बच्चों का खूब उत्साहित किया। रस्साकसी, रूमाल, झप्पट्टा, लैमन रेस, पेंटिंग, मेहंदी, वन और थ्री लेग रेस, साफा बंधन, नृत्य एवं गायन प्रतियोगिताओं में सैकड़ों की संख्या में प्रतिभागियों ने भाग लिया। जिसमें विजेताओं को पुरस्कार वितरित किये गए।





