तेल के खेल में सत्ता का नया केंद्र बनेगा भारत ?

Will India become the new centre of power in the oil game?

सौरभ वार्ष्णेय

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दिए एक बयान से तेल के खेल में भारत सत्ता का नया केंद्र बन सकता है? राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला को लेकर एक बयान दिया है जिसमें साफ-साफ कहा है कि अब अमेरिका वेनेजुएला के साथ मिलकर काम कर रहा है। हम भारी मात्रा में तेल और गैस के उत्पादन और बिक्री में बहुत अच्छा तालमेल बिठा रहे हैं, जो संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद पृथ्वी पर दूसरा सबसे बड़ा भंडार अब हम कच्चे तेल के लिए मध्य पूर्व पर पूरी तरह से निर्भर नहीं हैं और फिर भी हम वहां सहायता के लिए मौजूद हैं। हालांकि, ट्रंप ने भले ही वेनेजुएला के तेल भंडार पर कब्जा कर लिया हो लेकिन इसमें सबसे अधिक फायदा भारत को हो सकता है। भारत इसमें सत्ता का केंद्र बन सकता है ? यानी भारत तेल के खेल में विश्व उर्जा का केंद्र बन सकता है क्योंकि भारत भले ही दूसरे देशों से कच्चे तेलों का निर्यात करता हो लेकिन कच्चे तेल की रिफाइनिंग के लिए अन्य देशों को हम भारत पर ही निर्भर रहना पड़ता है, क्योंकि रिफाइनरी के मामले में भारत दुनिया के सभी देशों से आगे हैं। अगर अमेरिका वेनेजुएला के कच्चे तेल को यूरोपियन देश को बेचता है तो इसमें भी भारत का ही सबसे अधिक फायदा है। क्योंकि, यूरोपियन देश भारत से सबसे अधिक रिफाइंड तेल खरीदते हैं। अमेरिका खुद भारत से सबसे अधिक रिफाइंड तेल का निर्यात करता है। ऐसे में आने वाला भविष्य भारत के लिए अच्छा संकेत दे रहा है।

वैश्विक राजनीति में तेल (ऊर्जा) हमेशा से शक्ति का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत रहा है। 20वीं सदी में (ऑर्गनाइजेशन ऑफ दॅ प्रेट्रोलियम इ एंड पोर्टिंंग कंट्रीज) देशों और पश्चिमी शक्तियों के बीच तेल की राजनीति ने विश्व व्यवस्था को आकार दिया। आज 21वीं सदी के तीसरे दशक में, बदलते ऊर्जा समीकरणों के बीच यह सवाल फिर उठ रहा है—क्या भारत इस तेल के खेल में सत्ता का नया केंद्र बन सकता है?

इस बदलते वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखलाओं में बड़ा बदलाव आया। यूरोप ने रूसी तेल पर निर्भरता घटाई, वहीं भारत ने सस्ते रूसी कच्चे तेल का आयात बढ़ाकर अपनी ऊर्जा रणनीति को मजबूत किया। इससे भारत न केवल लागत में बचत कर सका, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अपनी वॉर्गनिंग पॉवर भी बढ़ाई।

ऐसे में समय में भारत की रणनीतिक स्थिति की बात करे तो भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है। इसकी भौगोलिक स्थिति—मध्य पूर्व, रूस और एशिया के बीच—इसे एक प्राकृतिक ऊर्जा हब बनने का अवसर देती है। भारत ने एक ओर रूस से तेल आयात बढ़ाया, तो दूसरी ओर संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के साथ संबंधों को भी संतुलित रखा।
भारत रिफाइनिंग और निर्यात की ताकत रखता है। भारत केवल तेल आयातक ही नहीं, बल्कि एक प्रमुख रिफाइनिंग हब भी बन चुका है। भारतीय रिफाइनरियां कच्चे तेल को प्रोसेस करके यूरोप और अन्य देशों को पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात कर रही हैं। इस प्रक्रिया में भारत एक “मध्यस्थ शक्ति” के रूप में उभर रहा है—जहां कच्चा तेल कहीं से आता है और तैयार उत्पाद कहीं और जाता है।

अब सवाल उठता है क्या भारत बनेगा नया शक्ति केंद्र?
भारत के पास अवसर जरूर है, लेकिन यह पूर्ण सत्ता केंद्र बनने से ज्यादा संतुलनकारी शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत की असली ताकत उसकी कूटनीति, बाजार आकार और ऊर्जा विविधीकरण में है, न कि केवल तेल में। तेल का खेल अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन इसके नियम बदल रहे हैं। भारत इस बदलते खेल का एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन चुका है। यदि वह अपनी ऊर्जा नीति में संतुलन, आत्मनिर्भरता और हरित विकल्पों को साथ लेकर चलता है, तो भविष्य में वह केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा राजनीति का निर्णायक केंद्र भी बन सकता है।

ओपेक दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों का एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है (ऑर्गनाइजेशन ऑफ दॅ प्रेट्रोलियम इ एंड पोर्टिंंग कंट्रीज), जिसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों की तेल नीतियों का समन्वय करना और वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित करना है।

इसके संस्थापक १९६० में और इसमें ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेजुएला देश शामिल हैं। इसका मुख्यालय वियना (ऑस्ट्रिया) में हैं। इसके मुख्य कार्य तेल उत्पादन को नियंत्रित करना, सदस्य देशों के हितों की रक्षा करना, वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर रखना, उपभोक्ता देशों को नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना आदि है। समय-समय पर बैठकों में यह तय करता है कि सदस्य देश कितना तेल उत्पादन करेंगे। अगर कीमतें गिरती हैं ? उत्पादन घटाया जाता है। अगर कीमतें बढ़ती हैं ?

उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। इस तरह वैश्विक तेल कीमतों पर सीधा प्रभाव डालता है। यह गठबंधन वैश्विक तेल बाजार पर और भी ज्यादा प्रभावशाली बन गया है। केवल एक संगठन नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीति को प्रभावित करने वाली एक शक्तिशाली ताकत है। इसके निर्णय से पेट्रोल-डीजल की कीमतों से लेकर देशों की अर्थव्यवस्था तक प्रभावित होती है।

अगर हम भारत से रिफाइंड तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों की बात करें तो इसमें अमेरिका भी भारत से तेल आयात करता है।नीदरलैंड साल 2024 में रिफाइंड पेट्रोलियम का सबसे बड़ा आयातक है। संयुक्त अरब अमीरात भी भारत से रिफाइंड तेल का प्रमुख आयातक है। रिफाइंड तेल खरीदार के रूप में सिंगापुर भी टॉप लिस्ट में शामिल है। ऑस्ट्रेलिया सहित अन्य देश भी रिफाइंड के मामले में भारत पर निर्भर है।