रविवार दिल्ली नेटवर्क
हैदराबाद : देश में बढ़ती बुजुर्ग आबादी के मद्देनज़र भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय पोषण संस्थान (आईसीएमआर-एनआईएन) ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए संतुलित और अनुकूलित पोषण को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है, जिसे अब तक अक्सर नजरअंदाज किया जाता रहा है।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, डाइटरी गाइडलाइंस फॉर इंडियंस 2024 में बुजुर्गों के आहार में पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करने पर विशेष जोर दिया गया है। इसमें पोषण को बेहतर स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और जीवन की गुणवत्ता से सीधे जोड़ा गया है।
दिशानिर्देशों के अनुसार, बुजुर्गों को कम भूख लगना, चबाने और निगलने में कठिनाई, स्वाद में बदलाव, पुरानी बीमारियां और दवाओं के प्रभाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिससे भोजन सेवन और पोषक तत्वों के अवशोषण पर असर पड़ता है। वहीं, मांसपेशियों की मजबूती, हड्डियों के स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा बनाए रखने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन डी, बी-विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट की आवश्यकता बढ़ सकती है।
आईसीएमआर-एनआईएन ने छोटे-छोटे और बार-बार भोजन करने की सलाह दी है, जो ऊर्जा और पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ-साथ आसानी से पचने योग्य हों। इसमें नरम पकी दालें, दूध व दुग्ध उत्पाद, अंडे, अच्छी तरह पकी सब्जियां, फल तथा सीमित मात्रा में मेवे और तिलहन से प्राप्त स्वस्थ वसा शामिल हैं। साथ ही, निर्जलीकरण से बचाव और गुर्दों के बेहतर कार्य के लिए पर्याप्त तरल पदार्थ लेने पर भी जोर दिया गया है।
संस्थान ने कम प्रोटीन वाले आहार और परिष्कृत अनाज पर अत्यधिक निर्भरता के प्रति आगाह किया है, क्योंकि इससे मांसपेशियों का क्षय तेज हो सकता है और कमजोरी, गिरने तथा मेटाबोलिक रोगों का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही, बुजुर्गों के लिए खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता को भी अत्यंत आवश्यक बताया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्गों का पोषण केवल भोजन तक सीमित नहीं, बल्कि उनकी गरिमा और आत्मनिर्भरता में निवेश है। उन्होंने परिवारों और देखभालकर्ताओं से चिकित्सा देखभाल के साथ संतुलित आहार को भी प्राथमिकता देने की अपील की है।





