गाँव, स्मृतियाँ और संवेदनाएँ: ‘धूप और छाँव जब दोनों ही हमारे होंगे’ काव्य संग्रह पर ऑनलाइन परिचर्चा संपन्न”

Village, memories and emotions: Online discussion concluded on the poetry collection ‘When both the sun and shade will be ours’

रविवार दिल्ली नेटवर्क

कोलकाता : साहित्यिक संस्था “नव-सृजन: एक सोच” के तत्वावधान में रविवार को एक ऑनलाइन पुस्तक परिचर्चा का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम के केंद्र में वरिष्ठ कवि चंद्रिका प्रसाद पाण्डेय ‘अनुरागी’ का काव्य संग्रह “धूप और छाँव जब दोनों ही हमारे होंगे” रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ कवयित्री एवं पुस्तक प्रकाशन सहयोगी अनु नेवटिया द्वारा अनुरागी जी के संक्षिप्त परिचय से हुआ। परिचर्चा का संचालन सुप्रसिद्ध कवि नवीन कुमार सिंह ने किया, जिन्होंने अपनी प्रभावशाली शैली से कार्यक्रम को सुचारु रूप से आगे बढ़ाया।

परिचर्चा में पश्चिम बंगाल, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों से साहित्यकारों एवं कवयित्रियों ने भाग लिया। प्रमुख प्रतिभागियों में राजेंद्र सिंह रावत (दिल्ली), मंजू चौहान (दिल्ली), छाया सिंह (दिल्ली), मौसमी प्रसाद (कोलकाता), भारती मिश्रा (कोलकाता), गणेश नाथ तिवारी ‘विनायक’ (कोलकाता), प्रो. सीमा साह (मिदनापुर), ज्योति कुंदर (मुंबई) तथा मनोरमा जैन ‘पाखी’ (मध्य प्रदेश) शामिल रहे।

संस्था के सह-संस्थापक रवि कुमार ‘रवि’ (पटना) एवं अमित कुमार अम्बष्ट ‘आमिली’ (कोलकाता) की सक्रिय उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी गरिमा प्रदान की। वक्ताओं ने काव्य संग्रह की रचनाओं की सराहना करते हुए इसे संवेदनाओं, स्मृतियों और जीवन के यथार्थ का सशक्त प्रतिबिंब बताया तथा सभी वर्ग के पाठकों के लिए उपयोगी कृति माना।

इस अवसर पर स्वयं कवि चंद्रिका प्रसाद पाण्डेय ‘अनुरागी’ भी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में परिचर्चा को प्रेरणादायक बताते हुए सभी प्रतिभागियों एवं संस्था के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की चर्चाएँ रचनाकार को निरंतर सृजन के लिए ऊर्जा प्रदान करती हैं। अंत में उन्होंने अपनी एक रचना का पाठ कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार नंदलाल रौशन, रंजीत भारती सहित अनेक श्रोतागण भी जुड़े रहे। यह परिचर्चा साहित्यिक दृष्टि से अत्यंत सार्थक, प्रेरणादायक एवं सफल रही।