मुंबई (अनिल बेदाग) : भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर, जब कोई शख्स प्रकृति की गोद में सुकून तलाशने निकलता है, तो वह सिर्फ एक यात्रा नहीं बल्कि खुद से जुड़ने का मौका होता है। कुछ ऐसा ही अनुभव हाल ही में कृष्णा गौतम ने हिमाचल के शांत पहाड़ों के बीच किया जहां हर हवा का झोंका आत्मा को छूता है और हर कदम एक नई ऊर्जा देता है।
अपने काम के प्रति समर्पण के लिए पहचानी जाने वाली कृष्णा गौतम ने व्यस्त शेड्यूल से ब्रेक लेकर ट्रेकिंग के जरिए प्रकृति को करीब से महसूस किया। उनके लिए यह सिर्फ एक शौक नहीं, बल्कि खुद को ज़मीन से जोड़ने का जरिया है। लेकिन यह सुकूनभरी यात्रा अचानक एक खतरनाक मोड़ ले बैठी, जब एक ट्रेक के दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया।
हालांकि, सही सुरक्षा उपकरण और सतर्कता के चलते वह एक बड़े हादसे से बाल-बाल बच गईं और मामूली चोटों के साथ सुरक्षित रहीं।
इस अनुभव ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। कृष्णा मानती हैं कि एडवेंचर जितना रोमांचक होता है, उतना ही जिम्मेदारी भरा भी।
आज, मुंबई लौटकर वह न सिर्फ स्वस्थ हो रही हैं, बल्कि अपने अनुभव के जरिए लोगों को एक अहम संदेश भी दे रही हैं। प्रकृति का आनंद लें, लेकिन सुरक्षा से कभी समझौता न करें।





