डॉ. प्रीतम भी. गेडाम
आज के युग में स्वार्थ, लालच, द्वेष, चरित्रहीनता, भ्रष्टाचार, नशाखोरी, मिलावटखोरी, प्रदूषण, भेदभाव और मनुष्य की असीमित इच्छाओं की पूर्ति के लिए चल रहा कभी न खत्म होने वाला संघर्ष जिंदगी का सुकून छीन रहा है। हर कोई अपने ख्वाबों को पूरा करने के लिए भेड़चाल में भाग रहा है। किसी के पास रोजगार नहीं, किसी के पास प्रेम नहीं, परिवार नहीं, चरित्रवान जीवनसाथी नहीं, निरोगी शरीर नहीं, संस्कारशील बच्चे नहीं, सहयोगी परिवार और मित्र नहीं, समय नहीं, नाम और शोहरत नहीं, कोई सहारा नहीं तो किसी के पास धन-दौलत नहीं। दुनिया में कोई भी व्यक्ति जीवन की सभी खुशियों, सुकून और सुख-सुविधाओं के साथ परिपूर्ण नहीं हो सकता। समस्याएं सभी के जीवन में होती हैं, लेकिन उनके कारण पूरे जीवन परेशान रहकर और डर-डरकर जीना उचित नहीं है। हमारे पास जो उपलब्ध है, उसे समाधान मानने के बजाय मनुष्य असंतोषी बनकर अपने जीवन को स्वयं ही कष्टमय बना रहा है। मनुष्य अपने जीवन में खुशी की परिभाषा बदल रहा है। वह दूसरों के दुःख में खुशी और दूसरों की खुशी में ईर्ष्या से भर जाता है। अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति का दोहन करता है और फिर स्वयं ही शुद्ध हवा, पानी, भोजन और बीमारियों की समस्याओं से परेशान होता है। भौतिक सुविधाओं के पीछे भागते हुए आज पैसा ही ईश्वर बन चुका है, यह साबित करने पर लोग तुले हुए हैं।
आज मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं अत्यधिक तेजी से बढ़ी हैं, लेकिन लोग इन समस्याओं से समझौता करके घुट-घुटकर जी रहे हैं। तनाव के कारण सिज़ोफ्रेनिया और मनोविकार, द्विध्रुवी और मनोदशा विकार, प्रमुख अवसादग्रस्तता विकार, पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर और गंभीर चिंता, खाने के विकार, मादक द्रव्यों के सेवन संबंधी विकार, टाइप-2 मधुमेह और चयापचय सिंड्रोम, हृदय रोग, मोटापा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, तंत्रिका संबंधी और मस्कुलोस्केलेटल समस्याएं, क्रॉनिक दर्द सिंड्रोम, माइग्रेन, ऑस्टियोपोरोसिस और गति संबंधी विकार, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल तथा प्रतिरक्षा संबंधी विकार जैसे अनेक गंभीर विकार होते हैं। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए दुनियाभर में हर साल 10 अक्टूबर को ‘विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस’ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की थीम “निजी अनुभवों को सुनना: असली आवाज़ें, असली बदलाव” है।
मनुष्य को पशुओं की भांति सरल जीवन जीना चाहिए, लेकिन झूठे दिखावे और आधुनिकता की होड़ में वह अपने मानसिक स्वास्थ्य को बर्बाद कर रहा है। कई बार जीवन में दूसरों की खुशी के लिए इंसान अपनी खुशी भी त्याग देते हैं। यह सिलसिला चलता रहता है और दूसरों की खुशी का ख्याल रखते-रखते हम अपनी मानसिक शांति खो बैठते हैं। जीवन में सबसे ज्यादा जरूरी मानसिक सुकून है, जिसके कारण मनुष्य चैन की सांस लेता है। मानसिक सुकून हमारे मन की खुशी से जुड़ा होता है। इसे हम खरीद नहीं सकते, बल्कि अपने सत्कर्मों और अच्छे आचरण से ही प्राप्त कर सकते हैं।
कुछ समय पहले मैंने एक खबर पढ़ी थी कि अमेरिका की सिलिकन वैली के एक भारतीय उद्यमी ने अपनी 100 करोड़ रुपये की संपत्ति और आलीशान जीवनशैली त्यागकर भारत के एक छोटे से गांव में आकर बस गया। उसने भौतिक सुख-सुविधाओं के बजाय मानसिक सुकून, प्रकृति के निकट जीवन और आत्मिक संतुलन को प्राथमिकता दी। यह केवल एक उदाहरण नहीं है; दुनिया में ऐसे अनेक उदाहरण देखने को मिल जाएंगे। जीवन में मानसिक शांति नहीं हो तो हमारे पास सब कुछ होते हुए भी हम भीड़ में खुद को तनहा पाते हैं। हमारा जीवन सबसे अनमोल है और मानसिक शांति हमारे जीवन की असली सफलता को दर्शाती है कि हम कितने सुकून से जी रहे हैं। पैसा केवल क्षणिक सुविधाएं खरीद सकता है।
हमारे देश में मजदूर और किसान वर्ग में आत्महत्या की घटनाएं अधिक देखने को मिलती हैं। छोटे व्यापारी वर्ग, छात्र, गृहिणी, युवा और सरकारी कर्मचारी वर्ग में भी आत्महत्या की घटनाएं बढ़ी हैं। इसके मुकाबले राजनीतिक रसूख वाले व्यक्तियों और नेताओं में यह समस्या नजर नहीं आती। नेता अच्छे हों या बुरे, लेकिन मानसिक तनाव का बेहतर प्रबंधन की कला उनसे सीखनी चाहिए। उन्हें अनेक बार राजनीतिक, सामाजिक और व्यक्तिगत दबावों का सामना करना पड़ता है। चुनाव हारना, आरोपों का सामना करना, घोटालों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई, मीडिया में आलोचना, अदालतों में मामले, राजनीतिक मतभेद, धमकियां या आर्थिक-सामाजिक नुकसान जैसी परिस्थितियां उनके सामने आती रहती हैं। इसके बावजूद अनेक नेता कठिन परिस्थितियों में भी अपने सार्वजनिक दायित्वों को निभाते हुए संयम और आत्मविश्वास बनाए रखते हैं। चुनावी दौर में उम्रदराज होने के बावजूद कई नेता लगातार सैकड़ों-हजारों किलोमीटर की यात्रा करते हैं। बारिश, धूप, ठंड, तूफान और खराब मौसम के बीच भी वे कम नींद और कम आराम के बावजूद लगातार शारीरिक एवं मानसिक दबाव में काम करते हैं। रैलियों और सभाओं में उनका उत्साह तथा ऊर्जा दिखाई देती है। हालांकि, हर व्यक्ति की तनाव सहने और उससे निपटने की क्षमता अलग-अलग होती है। इसलिए नेताओं के सार्वजनिक जीवन से यह सीख ली जा सकती है कि कठिन परिस्थितियों में संयम, आत्मविश्वास कायम रखना और तनाव का सकारात्मक ढंग से प्रबंधन करना जीवन के लिए उपयोगी गुण हैं।
हर कोई अपने फायदे के लिए दूसरों के मन से खेलता है। दूसरों की खुशी के लिए अपनी खुशियों का गला मत घोंटिए। जो व्यक्ति हमारे बुरे वक्त में हमारा साथ देता है, भावनाओं की कद्र करता है और हमारी परवाह करता है, हमें भी उसकी कद्र करनी चाहिए। बाकी लोग अपने स्वार्थ के हिसाब से खेलते है, उन्हें अपने जीवन के साथ खेलने का मौका मत दीजिए। किसी की कठपुतली मत बनिए। ऐसे लोगों से सावधान रहें और उनसे दूर रहें। अपनी आत्मिक खुशी का अर्थ समझिए। भौतिक सुविधाएं ही सब कुछ नहीं हैं। निश्चिंत होकर जीना सीखिए। तनाव से कोई फायदा नहीं, बल्कि केवल नुकसान होता है। जीवन की हर समस्या को एक अवसर मानकर हंसते हुए पार कीजिए। संघर्ष जीवन का हिस्सा है; डरना नहीं, डटना है। दुनिया की महानतम शख्सियतों ने भी अपने जीवन को संघर्षों से सींचा है, तब जाकर उन्होंने नाम और शोहरत हासिल की है।
जीवन में आगे बढ़ना है तो अपना लक्ष्य निर्धारित करें और लगातार बेहतर बनने का प्रयास करें। नित नया कुछ सीखें। जीवन के छोटे-छोटे पलों में भी खुशियां बांटना सीखें। जिंदगी से शिकायतें नहीं, समाधान ढूंढना सीखें। ओवरथिंकिंग से बचें और लोगों से ज्यादा अपेक्षाएं न रखें। कभी हारकर बैठना नहीं है। समय परिवर्तनशील है, हमारा भी समय बदलेगा। जैसे वातावरण में हम रहते हैं, वैसा ही हमारे शरीर और मन पर असर पड़ता है। इसलिए बुरे विचारों वाले लोगों और बुरी आदतों से हमेशा दूर रहें। घर-परिवार की जिम्मेदारी के साथ अपनी खुशी का भी ख्याल रखें। स्वस्थ रुचियों, व्यायाम, पशुप्रेम, समाजसेवा, परोपकारिता और प्रकृति से निकटता बढ़ाएं। ये जीवन में सुकून लेकर आते हैं। पौष्टिक भोजन करें, संगीत सुनें, यात्रा करें, सामूहिक श्रमदान का हिस्सा बनें और अपनी खूबियों को जानें। जिस विषय में रुचि हो, उस पर काम करें। बस, हमारी वजह से किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए। यह अनमोल जिंदगी एक बार मिलती है। जिंदगी जीने के लिए है, काटने के लिए नहीं। व्यस्तता का बहाना छोड़ें और अपनी खुशी के लिए समय निकालना सीखें। अपना बेहतर कर्म करते रहें और आगे बढ़ते रहें। सबसे ज्यादा स्वयं की मानसिक शांति को प्राथमिकता दें, खुश रहें और तनावमुक्त जीवन जिएं।





