हरदीप सिंह पुरी – जेफरी एपस्टीन क्षणयंत्र का सत्य

Hardeep Singh Puri - The Truth about the Jeffrey Epstein Moment

डॉ. नीलम महाजन सिंह

अमेरिकी न्याय विभाग (Department of Justice) द्वारा केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री, हरदीप सिंह पुरी की, दण्डित यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ एक तस्वीर जारी किए जाने के बाद अनेक राजनीतिक सवाल खड़े हो गए हैं। यह तस्वीर ऐसे समय में सामने आई, जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो मुंबई के दौरे पर थे। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 21 अक्टूबर 2026 को इस तस्वीर के जारी होने के समय पर प्रश्न उठाया कि “अमेरिका किसे ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहा है?” कांग्रेस का कहना है कि हरदीप पुरी को एपस्टीन के ’62 ईमेल बातचीत, 14 मुलाकातों’ पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। रुबियो मुंबई जाते हैं व अमेरिकी न्याय विभाग एपस्टीन – हरदीप सिंह पुरी की तस्वीर जारी कर देता है? राहुल गांधी ने पूछा, “प्रिय भाजपा व आर.एस.एस. कार्यकर्ताओं, आपको क्या लगता है कि वे किस देशद्रोही को ब्लैकमेल कर रहे हैं?” भारत की आंतरिक राजनीति एक ओर है और अन्तरराष्ट्रीय नीति दूसरी ओर। प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी अक्सर ‘नारी का सम्मान’, ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ व ‘लखपति दीदी’ जैसे नारों का ज़िक्र करते हैं, परंतु उन्हें कितना कार्यान्वित किया जाता है? दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज के एक साधारण से छात्र रहे; हरदीप सिंह पुरी में आखिर ऐसी क्या खास बात है कि वह भाजपा का चहेता बना हुआ है? जब वह नाबालिग व छोटी बच्चियों (जो अभी यौवन तक नहीं पहुंची हैं) के शारीरिक यौन शोषण से जुड़े ‘एपस्टीन फाइल्स ग्लोबल स्कैंडल’ में संदिग्ध रूप से शामिल है, तो उसे देश के ताकतवर लोगों से जन्मदिन की शुभकामनाएं कयों मिलीं? यह बेहद घिनौनी, बीमारी मानसिकता व बेतुकी बात है कि हरदीप सिंह पुरी को अभी तक गिरफ़्तार क्यों नहीं किया गया? महत्वपूर्ण मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री के पद से उसका तुरंत इस्तीफ़ा लिया जाना चाहिए। हरदीप सिंह पूरी दोषी अमेरिकी यौन शोषण अपराधी, “मृत जेफ्री एपस्टीन का फ्रेंड फ्राम इंडिया” है। पूरी के निजी संबंधों ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। हरदीप सिंह पुरी ने 2014 से 2017 के बीच जेफ्री एपस्टीन के साथ कई बार ईमेल, बातचीत व मुलाकातें कीं हैं। इसी वजह से यह बड़ा राजनीतिक विवाद हो गया है। विपक्षी दल उसके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, जबकि हरदीप सिंह, बेशर्मी से अपने कामों का बचाव करते हुआ कहता रहा है कि ये ‘पेशेवर (professional) था व उस समय उसे एपस्टीन के आपराधिक इतिहास की जानकारी नहीं थी’। अरे वाह, कितना मासूम है यह इंसान! ये दस्तावेज़ व ईमेल संयुक्त राज्य अमेरिका के न्याय विभाग, फाइल नंबर सहित, वेबसाईट पर सार्वजनिक किए गए हैं। ‘एपस्टीन फाइल्स’ से पता चलता है कि पुरी ने मैनहट्टन स्थित एपस्टीन के टाउनहाउस में चार बार उससे मुलाकात की थी: 4 फरवरी 2015, 6 जनवरी 2016 और 19 मई 2017 को। ईमेल से उसकी बीच काफी करीबी जान-पहचान के संकेत मिले थे, जिसमें भारत की ‘डिजिटल इंडिया’, निवेश के मौकों व नेटवर्किंग पर चर्चा शामिल है। दिसंबर 2014 के एक ईमेल में, पुरी ने एपस्टीन को लिखा, “आप अपने शानदार द्वीप से कब वापस आ रहे हैं? ताकि हम बैठकर बातचीत कर सकें।” पुरी ने बताया कि उनकी एपस्टीन से मुलाकात ‘इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट’ (International Peace Institute) और ‘इंडिपेंडेंट कमीशन ऑन मल्टीलेटरलिज्म’ (ICM) से जुड़े होने के दौरान हुई थी। वह ‘निजी नागरिक’ के तौर पर काम कर रहा था न कि सरकारी अधिकारी के रूप में। मिस्टर पुरी, आपको एक दोषी यौन अपराधी व दलाल (pimp) के सामने भारत का प्रचार करने के लिए किसने अधिकृत किया था? पुरी ने अरुण जेटली व पीएम नरेंद्र मोदी के नाम का निरंतर दुरुपयोग किया। तर्क यह दिया कि वह ‘मेक इन इंडिया’ व ‘डिजिटल इंडिया’ जैसी पहलों की वकालत कर रहा था। उसका कहना है, कि बातचीत पूरी तरह से निवेश पर केंद्रित थी, न कि उन अवैध गतिविधियों पर जिनमें एपस्टीन शामिल था। वाह-वाह, शाबाश, मासूम हरदीप सिंह पुरी! जेफ़री एपस्टीन ने हरदीप सिंह पुरी को “दोमुंहा” बताया। राहुल गांधी ने संसद में ‘एपस्टीन फाइल्स’ घोटाले का मुद्दा उठाया था। उन्होंने हरदीप पुरी पर आरोप लगाया कि उसने मुलाकातों के बारे में झूठ बोला, जबकि असल में 62 ईमेल का आदान-प्रदान हुआ व 14 मुलाकातें हुई थीं। अब विपक्ष ने पीएम नरेंद मोदी सरकार से हरदीप पुरी के इस्तीफे व कानूनी कार्रवाई की मांग की है। सारांंशार्थ भा.ज.पा. एन.डी.ए. सरकार को हरदीप सिंह पुरी को बर्खास्त करना होगा। यह विवाद उस बड़ी बहस का हिस्सा है जो वैश्विक हस्तियों पर एपस्टीन के नेटवर्क के प्रभाव को लेकर चल रही है। भारतीय विपक्षी नेताओं का तर्क है कि इस तरह के संबंधों से “मौजूदा सरकार की छवि ख़राब हुई है।” शर्म की बात है कि एन. डी.टी.वी. (NDTV) की चाटुकार पत्रकार पद्मजा जोशी ने जेफरी एपस्टीन का बचाव किया था। पद्मजा जोशी, अगर तुम्हारे साथ वैसा शारीरिक यौन शोषण किया जाता, तो कैसा लगता? यह भारत के मीडिया घरानों की बेशर्मी है कि उन्होंने अपने चैनलों से ‘एपस्टीन फाइल्स’ घोटाले को पूरी तरह गायब कर दिया है। इसके उलट, न्यूज़ चैनलों पर ‘पिंप पुरी’ (दलाल पुरी) के इंटरव्यू दिखाए जा रहे हैं! यह बेहद बेतुकी शरारत से कम नहीं है। जयराम रमेश व पवन खेड़ा, दोनों ने अमेरिकी न्याय विभाग के उन ईमेल के ज़रिए हरदीप पुरी की पोल सार्वजनिक की है। हरदीप सिंह पुरी के दोस्त, अनिल अंबानी ने एपस्टीन को लिखा था, “मुझे एक लंबी, स्वीडिश, सुनहरे बालों वाली (ब्लॉन्ड) महिला चाहिए!” क्या टीना मुनीम अंबानी यह सब सुन रही है, या अपने पति के ‘सेक्स ट्रैफिकर (यौन तस्करी करने वाले) के साथ संबंधों को नज़र-अंदाज़’ कर रही हैं? मीडिया अब कुछ सवाल उठा रहा है। हरदीप ने एपस्टीन के साथ 14 मुलाकातें क्यों कीं? उसने 62 ईमेल क्यों भेजे? हरदीप सिंह पुरी एक ऐसे दागदार व्यक्ति का दोस्त है, जिसने अपने फायदे के लिए एक पीडोफाइल (बच्चों का यौन शोषण करने वाला), सीरियल रेपिस्ट, सेक्स ट्रैफिकर व हत्यारे से दोस्ती की थी। ‘हरदीप पुरी जैसे मामूली व्यक्ति’ ने भारत की सरकारी नीतियां, एपस्टीन के साथ क्यों साझा कीं? जो कोई भी एपस्टीन के नेटवर्क का इस्तेमाल करता है, वह सिर्फ इसलिए खुद को बेकसूर नहीं बता सकता कि उसने एपस्टीन के अपराधों में सीधे तौर पर हिस्सा नहीं लिया। ‘दी हिंदू’ से बात करते हुए पुरी ने कहा, “मैंने एपस्टीन के साथ मुलाकातें नहीं कीं थीं।” हरदीप पुरी, सौ झूठ बोलने से एक सच नहीं बन जाता! इसके अलावा, 2014 में 5, 6, 8 और 9 जून; 19, 23 और 24 सितंबर; तथा 9 और 10 अक्टूबर को एपस्टीन के साथ हुई मुलाकातों में पुरी ने क्या चर्चा की? हरदीप सिंह पुरी की ये मुलाकातें 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के तुरंत बाद शुरू हुईं व 2017 तक चलती रहीं। सवाल यह उठता है कि जून 2014 में, किस पद पर रहते हुए हरदीप पुरी ने एपस्टीन से मुलाकातें की? ‘एपस्टीन फाइल्स’ घोटाले में नाम आने के कारण, दिल्ली में हुए (AI Impact Summit) ‘ऐ.आई. इम्पैक्ट समिट’ में माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स की भागीदारी रद्द कर दी गई थी। माइक्रोसॉफ्ट के इस सह-संस्थापक को एक यौन संचारित बीमारी (STD) भी हो गई थी। हरदीप पुरी व जेफ्री एपस्टीन के बीच, सामने आए चित्रों से पता चलता है कि भले ही उसकी बातचीत नेटवर्किंग व निवेश तक सीमित थी, लेकिन इससे भाजपा के उस पुराने दावे पर संदेह पैदा होता है, जिसमें कहा गया था कि एपस्टीन के किसी संदेश में पुरी का नाम आना महज एक ‘नाम का जिक्र’ (name dropping) भर था। अमेरिकी न्याय विभाग ने 30 जनवरी 2026 को इन ईमेल को सार्वजनिक किया था। जून 2014 से जून 2017 के बीच की हज़ारों फाइलें, वीडियो व तस्वीरें भी जारी की गईं हैं, जिनका संबंध दोषी अमेरिकी यौन अपराधी से था। इन रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि एपस्टीन के न्यूयॉर्क स्थित आवास पर कम से कम चार बैठकें हुई थीं। साथ ही, एपस्टीन ने पुरी को सिलिकॉन वैली के निवेशकों से जोड़ने की कोशिशें की थी। उस समय पुरी किसी सार्वजनिक पद पर नहीं था। वो भारतीय विदेश सेवा से रिटायर हो चुका था व न्यूयॉर्क में ‘इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट’ (थिंक-टैंक) में काम कर रहा था। 2014 में वो भाजपा में आया व सितंबर 2017 में नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री बना, जबकि वो संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं था। एपस्टीन के अपराधों की पूरी सच्चाई 2018 के आसपास सामने आई। 2008 में फ्लोरिडा में नाबालिगों से वेश्यावृत्ति करवाने केआरोपों में उसने एक विवादित ‘प्ली एग्रीमेंट’ (समझौते) के तहत अपना जुर्म कबूल कर लिया था। इस बदनामी के बावजूद, वह अमेरिका के अमीर, मशहूर लोगों के लिए एक ‘पावर ब्रोकर’ का काम करता रहा। इनमें से ज्यादातर लोगों ने अब उसके साथ जुड़े रहने पर पछतावा जताया है। विदेश मंत्रालय ने भी इस बात पर ज़ोर दिया कि ‘एपस्टीन एक दोषी, दंडित अपराधी था’ – जिसका संदर्भ 2008 में उसे मिली सजा से है। जुलाई 2019 में उसे नाबालिग लड़कियों की ‘सेक्स तस्करी’ के संघीय आरोपों में फिर से गिरफ्तार किया गया, लेकिन एक महीने बाद ही हिरासत में उसने आत्महत्या कर ली। ‘अमेरिकी हाउस ओवरसाइट कमिटी’ ने कुछ दस्तावेज जारी किए, जिनसे पता चलता है कि जैफरी एपस्टीन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान आयोजित कार्यक्रमों में जिन अंतरराष्ट्रीय हस्तियों को आमंत्रित किया था, उनमें ‘हरदीप पुरी (भारत)’ का नाम भी शामिल था। सामने आए संदेशों से पता चलता है कि, अनिल अंबानी ने इस ‘सेक्स अपराधी’ की पहुंच का इस्तेमाल डोनाल्ड ट्रंप के सामने मोदी के एजेंडे को रखने के लिए की थी। अनिल अंबानी, तुझे भारत के प्रधान मंत्री का प्रतिनिधि बनने के लिए किसने अधिकृत किया? हाल ही में हुए खुलासों से पता चलता है कि एपस्टीन ने हरदीप पुरी को लिंक्डइन (LinkedIn) के फाउंडर से जोड़ा था। एपस्टीन ने पुरी को लिखा कि लिंक्डइन के को-फाउंडर रीड हॉफमैन [Reid Hoffman] भारत आने के लिए तैयार है। 23 जून 2014 को हरदीप पुरी ने जवाब दिया, “जेफ्री, दिल्ली लौटने पर अभी तुम्हारा मैसेज देखा। रीड हॉफमैन की यात्रा में मदद करने में मुझे खुशी होगी।” 24 सितंबर 2014 को एपस्टीन ने रीड हॉफमैन को एक परिचय ईमेल भेजा, जिसमें इतना लिखा था, “रीड – हरदीप। हरदीप – रीड, भारत में हरदीप ही आपके काम का आदमी है।” इस परिचय के बाद कई संदेशों का आदान-प्रदान हुआ व हॉफमैन तथा पुरी ने सिलिकॉन वैली में मिलने की योजना बनाई। हॉफमैन ने गर्मजोशी से जवाब देते हुए पुरी से कहा कि “जेफ्री की लोगों को चुनने की पसंद बहुत बेहतरीन है” और उन्होंने कैलिफोर्निया या बाद में भारत में मिलने का प्रस्ताव दिया। आखिरकार उन्होंने अक्टूबर 2014 की शुरुआत में सिलिकॉन वैली में मीटिंग्स तय की। इन मीटिंग्स के बाद, 13 नवंबर 2014 को पुरी ने एपस्टीन – हॉफमैन को एक विस्तृत ईमेल भेजे, जिसमें भारत के बढ़ते इंटरनेट सेक्टर में निवेश के मौकों के बारे में बताया गया। इस मैसेज में सिलिकॉन वैली में 3 अक्टूबर को हॉफमैन के साथ हुई बातचीत का ज़िक्र है। इसमें एपस्टीन की यह राय भी शामिल थी कि हॉफमैन को “जल्द से जल्द भारत का दौरा करना चाहिए”। ईमेल में, पुरी ने बताया कि भारत में इंटरनेट यूज़र्स की संख्या 200 मिलियन है, जो हर महीने 5 मिलियन की दर से बढ़ रही है व 2018 तक इसके 500 मिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। पुरी ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की “डिजिटल इंडिया” पहल के बारे में विस्तार से बताया व लिंक्डइन (LinkedIn) के 28 मिलियन भारतीय रिज्यूमे की तुलना स्थानीय प्रतियोगी ‘नौकरी डॉट कॉम’ (Naukri.com) के 38 मिलियन रिज्यूमे से की। पुरी ने लिखा, “जेफ / रीड, मैंने ऊपर अपनी बातों का सारांश दिया है, ताकि जेफ की इस राय का समर्थन कर सकूं कि भारत का दौरा जल्द से जल्द किया जाना चाहिए।” उसने बात खत्म करते हुए एपस्टीन के उस सुझाव का ज़िक्र किया, जिसमें कहा गया था कि “बहुत ज्यादा, अच्छी-अच्छी बातें करने के बजाय इंटरनेट पर आधारित उद्यमिता (entrepreneurship) के विचारों पर ज्यादा ध्यान दिया जाए”। हरदीप सिंह ने आगे लिखा: “मैं तैयार हूं।” जब इन मुलाकातों के मकसद के बारे में पूछा गया, तो पुरी ने ‘दी वाॅयर’ (The Wire) न्यूज़ नेटवर्क को बताया कि वो भारत में बिजनेस के मौकों की वकालत कर रहा था। उसने कहा, “2014 में, मेरा कहना था कि यह सरकार इनोवेशन पर ध्यान देगी, ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देगी। लिंक्डइन के पास 28 मिलियन यूज़र्स हैं, और भारत की क्षेत्रीय भाषाओं को देखते हुए, इसमें काफी संभावनाएं हो सकती हैं।” नवंबर 2014 के अपने ईमेल को एक “विश्लेषण” बताया, जिसमें कहा गया था कि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार, ‘मेक इन इंडिया’ पर फोकस करेगी। सभी मीटिंग्स एपस्टीन की असिस्टेंट, लेस्ली ग्रॉफ के जरिए तय की गईं थीं और ये ‘9 ईस्ट 71वीं स्ट्रीट’ स्थित एपस्टीन के घर पर आयोजित की गईं । 9 जनवरी 2015 के लिए तय एक मीटिंग तब रद्द कर दी गई, जब एपस्टीन न्यूयॉर्क में नहीं था। पुरी ने लिखा, “कृपया मुझे बताएं कि आप अपने शानदार द्वीप (exotic island) से कब वापस आ रहे हैं।” एपस्टीन द्वारा पुरी – हॉफमैन का परिचय कराने के एक महीने बाद, उसने पुरी को ईमेल करके पूछा कि क्या उसका असिस्टेंट भारतीय वाणिज्य दूतावास (कॉन्सुलेट) में किसी से बात करके भारत में एक शादी में शामिल होने के लिए वीज़ा प्राप्त कर सकता है। पुरी ने न्यूयॉर्क में पूर्व भारतीय कौंसुल व दक्षिण सूडान में राजदूत रहे, प्रमोद बजाज, आई.एफ.एस. से अनुरोध किया कि क्या वे “इसे प्राथमिकता के आधार पर करवा सकते हैं”। 24 अक्टूबर 2014 को (भारतीय समयानुसार) एपस्टीन ने लिखा: “हरदीप, मुझे एक मदद चाहिए। मेरे असिस्टेंट को जल्दी वीज़ा चाहिए ताकि वह भारत में एक शादी में शामिल हो सके। क्या वाणिज्य दूतावास में कोई ऐसा व्यक्ति है जिससे वह बात कर सके?” पुरी ने जवाब दिया कि बजाज, जो “अब मेरे साथ काम करते हैं” (और जिन्हें उन्होंने ईमेल थ्रेड में भी शामिल किया था), “इस काम को करवा देंगे”। पुरी ने कहा, “प्रमोद, अगर आप इसे प्राथमिकता के आधार पर करवा सकें तो बहुत आभारी रहूंगा। मैं आवेदक से कहूंगा कि वह सीधे आपसे संपर्क कर ले।” साथ ही, “न्यूयॉर्क में संजीव” नाम के एक व्यक्ति को भी ईमेल में शामिल किया, ताकि अगर फाइनेंसर-एपस्टीन उनसे संपर्क करना चाहे तो कर सके। इसके तुरंत बाद, बजाज ने एपस्टीन को ‘कॉक्स एंड किंग्स ग्लोबल सर्विसेज’ की वेबसाइट के बारे में बताया। यह उस समय अमेरिका में भारतीय मिशनों द्वारा अधिकृत सर्विस प्रोवाइडर थे। उन्होंने एपस्टीन के असिस्टेंट से कहा कि वह अपना वीज़ा आवेदन ऑनलाइन भरें व उसकी हार्ड कॉपी कंपनी के कार्यालय में जमा कर दें। पुरी – एपस्टीन के बीच आखिरी बातचीत जून 2017 में हुई थी, जब पुरी ने लिखा, “जेफ, अगर तुम वापस शहर में आ गए हो, तो मैं तुमसे मिलने और बातचीत करने आना चाहूंगा। मैं 10 तारीख तक यहीं हूं।” एपस्टीन ने जवाब दिया, “क्या कल फोन पर बात करें? मैं 15 तारीख को वापस आऊंगा।” नॉर्वेजियन राजनयिक टेर्जे रोड-लार्सन ने आई.पी.आई. के प्रमुख के पद से इस्तीफा दे दिया, जब यह पता चला कि उसके एपस्टीन से साथ संबंध थे। इस थिंक टैंक को 2011 व 2019 के बीच एपस्टीन के फाउंडेशन से $650,000 डॉलर का चंदा मिला था। बाद में बोर्ड ने तय किया कि इतनी ही रकम उन कार्यक्रमों को दान कर दी जाए जो मानव तस्करी व यौन उत्पीड़न के पीड़ितों की मदद करते हैं। रीड हॉफमैन ने पहले ही स्वीकार किया है कि वे एपस्टीन से मिले थे, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्हें इस जुड़ाव पर पछतावा है। 2019 के एक बयान में, हॉफमैन ने बताया कि वे 2015 में एपस्टीन से मिला था। नवंबर 2025 में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एपस्टीन फाइलों में उल्लिखित डेमोक्रेट्स की जांच के आदेश दिए, जिसमें उन्होंने विशेष रूप से हॉफमैन का नाम लिया। ट्रम्प ने उन्हें “घटिया इंसान” (sleaze-bag) बताते हुए कहा, “मेरी राय में, हॉफमैन की जांच होनी चाहिए।” न्याय विभाग द्वारा जारी दस्तावेजों में लाखों पन्ने शामिल हैं, जो 2019 में संघीय हिरासत में एपस्टीन की मौत से पहले की उसकी गतिविधियों से जुड़े हैं। ईमेल में अन्य प्रमुख हस्तियों का भी जिक्र है, जिनमें ब्रिटेन के पूर्व प्रधान मंत्री गॉर्डन ब्राउन, [CIA] सीआईए के पूर्व निदेशक, बिल बर्न्स, अमेरिका के पूर्व ट्रेजरी सेक्रेटरी, लैरी समर्स और काउंसिल ऑफ यूरोप के महासचिव, थोरब्योर्न जगलैंड शामिल हैं। पुरी 2009 से लेकर फरवरी 2013 में भारतीय विदेश सेवा से रिटायर होने तक संयुक्त राष्ट्र में भारत का स्थायी प्रतिनिधि रहा। कितनी शर्मनाक बात है—एक ऐसे देश में जहां महिला को देवी, नवदुर्गा के रूप में पूजा जाता है, जहां बेटियों के लिए सरकारी नारे दिए जाते हैं, वहां एक अपराधी, यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन एक राजनयिक तक पहुंचने का ज़रिया बन गया? भारतीय विदेश सेवा को अब जाग्रत हो जाना चाहिए। उन्हें राष्ट्रवाद का संकल्प लेना चाहिए व दलाली, नाबालिग लड़कियों की तस्करी, वेश्यावृत्ति, झूठी गवाही जैसे कामों से दूर रहना चाहिए। पूरा देश हैरान है कि ‘कुछ अलग करने का दावा करने वाली’ भारतीय जनता पार्टी, अपने कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह पुरी द्वारा की जा रही दलाली पर चुपचाप तमाशा क्यों देख रही है। इस मंत्री को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को मेरी सलाह है कि हरदीप सिंह पुरी से इस्तीफा लें, मामले की जांच करवायें व भारत वासियों को सत्य बताएं। यह मानवता के खिलाफ जघन्य अपराध है। ‘सैटैनिक कल्ट’ (Satanic Cult), बच्चियों का अपहरण, उनका खून निकाल कर, बुढ़े लोगों में भर देना, जवान दिखने वाला यह अन्तरराष्ट्रीय गैंग, भारतीय संस्कृति के विपरीत है। इसकी जांच पहले से ही अमेरिका की ‘फेडरल ब्यूरो आफॅ इनवेस्टिगेशन’ (FBI) कर रहा है। भारत का यह एक समझदारी भरा कदम होगा कि घिनौना मंत्री को तुरंत निष्कासित किया जाए।