निर्मल रानी
पहले झूठ बोलकर या अफ़वाह फैलाकर किसी को अपमानित करने और बाद में विवाद बढ़ने पर मुआफ़ी मांग कर किनारे हो जाने का चलन हमारे देश में बढ़ता जा रहा है। इसका मूल कारण यही है कि आजकल हमारे संभ्रांत या विशिष्ट कहे जाने वाले वर्ग में तमान असभ्य क़िस्म के लोगों ने प्रवेश कर लिया है। किसी का मान सम्मान,पद गरिमा,आयु उसकी सामाजिक हैसियत देखे बिना जानबूझकर ऐसा काम करते हैं जिससे, जिसका वे अपमान करना चाह रहे हैं, उस व्यक्ति का अपमान हो या न हो परन्तु ऐसी चेष्टा करने वालों की असलियत ज़रूर सामने आ जाती है। और ऐसे लोगों का परिचय बताने की रही सही कसर उनकी मुआफ़ी पूरी कर देती है।
ऐसी ही एक घटना गत 18 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल ज़िले के नरेंद्र नगर के ‘सिद्धपीठ मां कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले’ में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान हुई। यहाँ मशहूर गायक दिलेर मेहंदी अपनी कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहे थे। कार्यक्रम के बीच में ही उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल आग बबूला होकर सीधे मंच पर चढ़ गए और उन्होंने दिलेर मेहंदी की प्रस्तुति को बीच में ही रुकवा दिया। इसके बाद मंत्री ने भरे मंच से जनता के सामने कहा कि दलेर मेहंदी ने शराब पी रखी है, वे बोलने व गाने की स्थिति में नहीं हैं और केवल लिप-सिंकिंग कर रहे, अर्थात केवल होंठ चला रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने दिलेर मेहंदी को भुगतान की गई क़रीब 35 लाख रुपये की राशि का भी सार्वजनिक मंच से ज़िक्र किया। और भी कई बातें इस मंत्री ने दिलेर मेंहदी को अपमानित करते हुये कहीं। इस दौरान दिलेर मेंहदी भी अपमानित होते हुये काफ़ी असहज व झेंपे हुये नज़र आये। आख़िर क्या अधिकार था मंत्री महोदय को उनके अपने राज्य में आये हुये एक मेहमान के साथ ऐसा दुर्व्यवहार करने का ? दिलेर मेंहदी के क़रीबी व जानकारों का दावा है कि वे शराब पीते ही नहीं। फिर ऐसी तोहमत लगाने से मंत्री को क्या हासिल हुआ ? सिवाय इसके कि एक मंत्री का अहंकार उजागर हुआ और एक मंत्री उत्तराखंड राज्य में अतिथि कलाकारों का कैसे सम्मान करता है,यह भी पता चला ?
दिलेर मेंहदी के अपमान व इस घटना के सोशल मीडिया पर सार्वजनिक होने के बाद सिनेमा जगत के संगठनों और कलाकारों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। सिनेमा और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की प्रमुख संस्था फ़ेडरेशन ऑफ़ वेस्टर्न इंडिया सीने एम्प्लॉइज़ ने इस मामले में कड़ा रुख़ अपनाते हुये देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को आधिकारिक पत्र लिखकर इस घटना पर चिंता व्यक्त की। महासंघ ने अपने पत्रों में यह भी स्पष्ट किया कि दिलेर मेहंदी शराब का सेवन बिल्कुल नहीं करते हैं। महासंघ ने संवेदनशीलता बरतने की मांग की और कहा कि इस तरह सार्वजनिक मंच पर वरिष्ठ कलाकार की बेईज़्ज़ती करना बेहद निंदनीय है। दिलेर मेहंदी के भाई व प्रसिद्ध गायक मीका सिंह ने भी शराब का सेवन करने जैसे मंत्री के आरोपों को पूरी तरह ख़ारिज किया और सीएम पुष्कर सिंह धामी से उनियाल के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कलाकार सम्मान और गरिमा के हक़दार हैं। अगर राजनेता इस तरह अपमान करेंगे, तो कलाकार वहाँ क्यों परफ़ॉर्म करेंगे? अभिनेता राजपाल यादव ने भी इस शर्मनाक घटनाक्रम पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जिस कलाकार की आवाज़ ने दशकों तक देश-दुनिया का मनोरंजन किया, उसके साथ हज़ारों लोगों के सामने ऐसा व्यवहार करना बिल्कुल ठीक नहीं है। अनुपम खेर, कपिल शर्मा और बादशाह आदि कई अन्य कलाकारों ने भी खुलकर दिलेर मेहंदी के प्रति एकजुटता दिखाई और मंत्री द्वारा मंच पर जाकर इस तरह से झूठ बोलने और विवाद खड़ा करने के तरीक़े पर आपत्ति जताई।
हाँ, यह संभव है कि अधिक आयु की वजह से वे शारीरिक रूप से स्वयं को सहज महसूस न कर रहे हों। परन्तु यह निर्णय तो आयोजन समिति को उन्हें आमंत्रित करने से पूर्व करना चाहिए था। इसमें क्या शक है कि दिलेर मेंहदी भारतीय गायकों में एक बड़ा नाम है। आयोजक जानते हैं कि जितना मशहूर गायक आएगा उतनी ही भीड़ इकट्ठी होगी और कार्यक्रम सफल होगा। मिसाल के तौर पर गुरदास मान तो दिलेर मेंहदी से भी उम्र में भी बड़े हैं और पैसे भी उनसे दुगना ही लेते होंगे। फिर भी देश और दुनिया से उनके कार्यक्रम लेने के लिये लोगों की लाइन लगी होती है। रहा सवाल लिप-सिंकिंग करने अर्थात केवल होंठ चलाने का तो यह लाइव स्टेज गायन का तकनीकी विषय है। कोई भी लाईव परफ़ॉर्मर ऐसा नहीं है है जो लिप-सिंकिंग न करता हो। सिर्फ़ कम या ज़्यादा हो सकता है। इसलिए मंत्री महोदय को इस विषय पर भी ज्ञान झाड़ने का कोई अधिकार नहीं था। जब जनता आनंदित हो रही थी तो कार्यक्रम में मंत्री के विघ्न डालने का क्या अर्थ ?
अब रहा सवाल पैसों के लिये मंत्री का तंज़ करना। तो दिलेर मेंहदी या कोई अन्य गायक अकेले इतने पैसे नहीं लेते। उनके साथ बड़ी व अच्छी संगत होती है,उनके अपने ख़र्च होते हैं। वे इतने पैसे लेकर समाज को आनंदित करते हैं,लोगों का मनोरंजन करते हैं। इनकम टैक्स अदा करते हैं। परन्तु जनता के टैक्स के पैसों से हर महीने इससे भी अधिक उड़ा देने वाले नेता आख़िर जनता को क्या देते हैं यह बात भी देश अच्छी तरह जानता है। उत्तराखंड के इसी सिद्धपीठ मां कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले’ के सांस्कृतिक कार्यक्रम का ही उदाहरण ले लीजिये। गायक परफ़ॉर्म कर रहा है लोग मस्ती ले रहे हैं। नेता जी ने बजाये कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने के,उल्टे ज़हर उगलकर व झूठ बोलकर कार्यक्रम के रंग में भंग ज़रूर घोल दी। दरअसल इसमें आयोजकों का भी दोष है जो केवल सरकारी सहायता रुपी धनराशि लेने के चक्कर में मंत्रियों को बुलाते रहते हैं।
बहरहाल, इसतरह के लोगों की एक लंबी सूची है जिन्होंने किसी न किसी मामले में पहले झूठ बोला,अफ़वाहबाज़ी की बाद में दबाव में आकर,अपनी किरकिरी व आलोचना होती देख या फिर अदालती दबाव में आकर मुआफ़ी माँगी। बाबा रामदेव,बालकृष्ण,अरविंद केजरीवाल,सुखबीर सिंह बादल और कई अन्य व्यक्तिगत स्तर पर और गोदी मीडिया के अनेक ख़बरिया चैनल इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इस मामले में भी पहले तो ऐसी खबरें आईं थीं कि दोनों के बीच सुलह हो गई है, लेकिन बाद में मंत्री ने कहा कि उन्होंने कभी मुआफ़ी नहीं मांगी थी। इसके बजाय, उन्होंने फिर उल्टे गायक को ही दोषी ठहराया। परन्तु दलेर के भाई मीका सिंह ने बाद में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाक़ात की। मीका के अनुसार, मुख्यमंत्री ने मंत्री की ओर से मुआफ़ी मांगी। धामी के हस्तक्षेप के बाद मंत्री सुबोध उनियाल ने भी स्वयं दलेर मेहंदी को फ़ोन कर इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए मुआफ़ी मांग ली। फिर अंत में मीका सिंह की टीम ने आधिकारिक बयान जारी कर इस विवाद को ख़त्म करने की घोषणा की। परन्तु इस घटना ने यह ज़रूर साबित कर दिया है कि झूठ बोलकर या ज़हर उगलकर मुआफ़ी मांगने का चलन बढ़ता ही जा रहा है।




