टीएमयू हॉस्पिटल में पीडियाट्रिक्स विभाग की ऐतिहासिक उपलब्धि, नवजात को मिलीं सांसें

A historic achievement for the Department of Pediatrics at TMU Hospital, a newborn regains his breath

रविवार दिल्ली नेटवर्क

नवजात चिकित्सा में एक मील का पत्थर: जन्म के समय दम घुटने- बर्थ एस्फिक्सिया से पीड़ित नवजात का थेरैप्यूटिक हाइपोथर्मिया तकनीक से डॉक्टरों की टीम ने किया सफल उपचार

तीर्थंकर महावीर हॉस्पिटल, मुरादाबाद के लिए चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मिली है। टीएमयू हॉस्पिटल में पहली बार जन्म के समय दम घुटने- बर्थ एस्फिक्सिया से पीड़ित नवजात शिशु का नवीन तकनीक- थेरैप्यूटिक हाइपोथर्मिया के जरिए सफल उपचार किया गया। इलाज के बाद अब शिशु पूरी तरह स्वस्थ होकर बिना किसी जटिलता के अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। थेरैप्यूटिक हाइपोथर्मिया सरीखी उन्नत सुविधा अब तक केवल बड़े महानगरों के चुनिंदा चिकित्सा केंद्रों में उपलब्ध थी। मुरादाबाद में इसका सफल प्रयोग होना पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। टीएमयू अस्पताल का यह प्रयास न केवल नवजात चिकित्सा में एक मील का पत्थर है, बल्कि मुरादाबाद को उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं के मानचित्र पर एक नई पहचान भी दिलाता है। इस जटिल और संवेदनशील उपचार का नेतृत्व नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ. अदिति रावत ने किया। डॉ. रावत की टीम में पीडियाट्रिक्स की एचओडी डॉ. रूपा सिंह, प्रो. विवेक त्यागी, डॉ. सुरेन, डॉ. मयंक और डॉ. नव्या की महत्वपूर्ण भूमिका रही। डॉक्टरों की इस टीम ने चौबीस घंटे निगरानी रखते हुए शिशु को सुरक्षित और प्रभावी उपचार प्रदान किया।

डॉक्टर्स के अनुसार, जन्म के तुरंत बाद शिशु को गंभीर अवस्था में नवजात गहन चिकित्सा इकाई- एनआईसीयू में भर्ती किया गया था। बर्थ एस्फिक्सिया एक अत्यंत गंभीर स्थिति होती है, जिसमें समय पर सही इलाज न मिलने पर शिशु के मस्तिष्क को स्थायी क्षति पहुंच सकती है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में डॉक्टरों की टीम ने आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीक थेरैप्यूटिक हाइपोथर्मिया का सहारा लिया। थेरैप्यूटिक हाइपोथर्मिया प्रक्रिया के तहत शिशु के शरीर को नियंत्रित रूप से ठंडा किया जाता है। इस उपचार में लगभग 72 घंटे तक शरीर का तापमान सावधानीपूर्वक कम रखा जाता है, जिससे मस्तिष्क की कोशिकाओं को होने वाले नुकसान को रोका जा सके। इसके बाद शिशु को- ग्रैजुअल रीवार्मिंग के जरिए धीरे-धीरे सामान्य तापमान पर लाया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया अत्याधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञों की सतत निगरानी में की जाती है। शिशु के माता-पिता ने भावुक होकर डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन का आभार व्यक्त किया और कहा कि उन्होंने उम्मीद खो दी थी, लेकिन डॉक्टरों की मेहनत, अनुभव और आधुनिक तकनीक ने उनके बच्चे को नया जीवन दिया।