नारेबाज़ी, हंगामा बाज़ी और संसदीय रंगबाजी वाला साल: पोस्टमार्टम 2024

A year of sloganeering, uproar and parliamentary stunts: Post-mortem 2024

विनोद कुमार विक्की

‘हैप्पी न्यू ईयर भूषण भैया’ मंकी कैप से मुंँह बाहर निकालते हुए भुटकुन के चाय दुकान पर बिनोद ने भूषण का अभिवादन किया।

“अलुआ न्यू ईयर… का बिनोद तुम भी सचिव की तरह अंग्रेजी भाषा में बात करने लगे। अरे हम लोगों का नया साल चैत में आता है जी।” भूषण ने मुंह बनाते हुए जवाब दिया।

“लेकिन भूषण भैया हमारे उधारी का हिसाब तो आप अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार पाँच तारीख को ही करते हैं, कभी एकादशी/त्रयोदशी वाला हिसाब-किताब तो चलता नहीं!” चुटकी लेते हुए भुटकुन बीच में बोल पड़ा।

भूषण (भुटकुन को घूरते हुए) “इहे बकलोली के कारण फुलेरा में पड़े हुए हो मरदे, नहीं तो चाय वाला कहां से कहां पहुंच रहा है। चलो दुगो कड़क चाय बनाओं फटाफट… जानता है बिनोद, एक समय था नवंबर से फरवरी तक ठंडा का सीजन रहता था।
प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग से ठंडा एकाध महीना भी नहीं टिक पाता है। सर्दी ना हुई मानों गठबंधन की सरकार हो गई, टाइम का कोई फिक्स शेड्यूल ही नहीं रहा।” खैनी रगड़ते हुए भूषण बोला।

“भैय्या हमको तो लगता है कि प्रदूषण के साथ ही रुस-यूक्रेन, इजरायल-हमास, सीरिया-यमन आदि विभिन्न देशों के बीच होने वाले युद्ध के कारण भी ठंडा ज्यादा दिन नहीं टिक पाया। चाहे जो बोलिए भैया हमको तो खुब ठंडा लगता है। अब देखिए ना कम दिन रहने वाला ठंडा भी हांड़़ कंपा दिया और लौटती जाड़ा में हमको कंबल खरीदना पड़ गया।पता है आपको, हम तो पूस में एक दिन भी नहीं नहाएं … लेकिन भैय्या कुल मिलाकर साल 2024 हमलोगों के लिए ठीक नहीं रहा। विधायक जी पर कुत्ता मारकर खाने का आरोप लग गया तो दूसरी ओर प्रधान पर गोलीबारी भी हो गयी।” मायूसी के साथ बिनोद ने अपनी बात पूरी की।

“अरे हमारे गांव के प्रधान की बात तो छोड़ो, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीति करने वालों के लिए भी पिछला साल सही नहीं रहा भाई… मालूम है दो राज्यों के प्रधान तक को जेल की हवा खानी पड़ गयी जबकि पड़ोसी देश के प्रधान को गद्दी और देश दोनों छोड़कर भागना पड़ा बिनोद। सांत्वना व्यक्त करते हुए भूषण आगे बोला, सच पूछो तो वर्ष 2024 में नारा और घोषणाओं का लोकतांत्रिक मार्केट परवान चढ़ा रहा। नहीं झुकने वाला पुष्पा इस वर्ष के अंत तक राज (पुष्पा 2 द रुल) करने चला आया किन्तु ‘अबकी बार चार सौ पार’ की उम्मीद लगाने वाली राष्ट्रीय पार्टी को भी गठबंधन के सहारे सरकार बनाने की नौबत आ गई। समय-समय पर ‘बंटोगे तो कटोगे’ और ‘एक हैं तो सेफ हैं’ भी सुर्खियों में छाया रहा।एगो बात जानता है बिनोद, इस साल अखिल भारतीय स्तर पर आईएएस से भी बड़े पद के रुप में उभरने वाला बीपीएससी शिक्षक का पद खुब चर्चित रहा। पंचायत में होने वाले दिखावटी मीटिंग की तरह इस आयोग से चयनित हुए अभ्यर्थियों पर भी दिखावा का शौक चढ़ गया। घर-द्वार,बाईक से चार चक्का गाड़ी तक में शान से ‘बीपीएससी शिक्षक’ का बोर्ड लगा कर स्वयं को श्रेष्ठ साबित करने की होड़ में लगा रहा।”

“एक दम सही कह रहे हैं भैया, बीपीएससी शिक्षक वाला भौकाल तो हम भी सुन रखें हैं। इतना फख्र तो हम फुलेरा वासी प्रहलाद भाई के बेटा राहुल के शहीद होने पर महसूस नहीं कर रहे थे जितना गुमान यह कम वेतनमान वाले शिक्षक कर रहे हैं। एक दुल्हा तो शादी के डिस्प्ले बोर्ड में वेलकम की बजाय बीपीएससी शिक्षक लिख कर अपने परिवार और समाज को गौरवान्वित महसूस कराने का प्रयास किया था।” भूषण की बातों का समर्थन करते हुए बिनोद बोल पड़ा।

“जानता है बिनोद, पिछले साल मार्च में एक दिन मेटा की सारी सर्विस अचानक बंद हो गई तो मोबाइल उपभोक्ताओं का प्राण हलक में आ गया था। बीच- बीच में फर्जी सायबर ठग सायबर अरेस्ट के रूप में कंठ सुखाता रहा…” इससे पहले की भूषण अपनी बात पूरी करता बिनोद बीच में ही टपक पड़ा ‘यह मेटा कौन सी बला है भैया?’

“अरे वो फेसबुक, व्हाट्सएप्प चलाने वाली कंपनी है मेटा। एक दिन इसकी सेवा ठप पड़ गयी थी तो सेवाओं के बंद हो जाने के डर से सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर,रील्स मीम्स यूजर्स खासकर लेखक वर्ग हलकान हो गया था… अरे तुमको कहां से पता चलेगा, तुम कौन सा मोबाइल पर फेसबुक चलाते हो?” भूषण ने समझाया।

“हे भैया,हम तो सायकिल भी चलाना नहीं जानते,तो यह व्हाट्सएप्प, फेसबुक कहां से चलाएंगे? वैसे भी हमारे पास टिपटिपिया बटन वाला मोबाइल है।” आत्मविश्वास के साथ असमर्थता प्रकट करते हुए बिनोद आगे बोला- लेकिन भैया, झटका तो हमें भी पिछले साल उस समय लगा जब हमारा जियो वाला रिचार्ज प्लान अचानक से महंगा कर दिया गया।

खैनी को होंठ और दांतों के बीच स्थापित करते हुए भूषण बोला – “जियो से याद आया, तुमको पता है अनंत और राधिका का वैवाहिक कार्यक्रम को सदी की शादी के रूप में याद रखा जाएगा। मेंहदी,तिलक,प्री वेडिंग सूट,विवाह आदि की रस्में एकता कपूर के सीरियल और एस. राजमौली के सीक्वल मूवी की तरह लंबा चलते हुए आखिर कार पिछले साल संपन्न हो ही गया। अरबों रुपए खर्च हुए हैं इस शादी में… जिस प्रकार देवी-देवताओं के वैवाहिक कार्यक्रम में यक्ष, गंधर्व,देवता आदि उपस्थित हुआ करते थे उसी तरह नेता,पीएम,सीएम, खिलाड़ी,एक्टर लगभग सभी वीवीआईपी पहुंचे थे इस शादी में। पत्रकारिता की बात कहो या चाटुकारिता की, कुछ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वाला तो पेटकूनिया डाल कर अंबानी के घर पर ही पड़ा रहता था और सारी कवरेज टीवी पर प्रसारित करता रहता।”

बिनोद गर्दन हिलाते हुए – “लोकतंत्र में राजसी विवाह जयसन दृश्य के बारे में सुनें तो हम भी थे भैय्या। शादी में इतना-इतना ख़र्च किया और उसकी भरपाई के लिए हमारा रिचार्ज प्लान महंगा कर दिया, बताइए.”

बिनोद की बातें सुन मुस्कुराते हुए भूषण बोला,
धीरे-धीरे तुम भी समझदार होने लगा है बिनोद।

हें हें हें…सब आपकी संगत का असर है भैया। वैसे भी राजनीति और दुनियादारी तो हमारे समझ से परे है। बिनोद ने तार्किक जवाब दिया।

“राजनीति से याद आया, अस्पताल के सामने जिस तरह हमलोग और सचिव-प्रधान के टीम के बीच पुष्टांग मार-पीट हुआ था वैसे ही संसद में पक्ष और विपक्षी सांसद के बीच धक्का-मुक्की हुआ है। पिछले साल रेलवे ट्रैक पर विकास डी रेल होता रहा अथवा आपस में टकराता रहा और तो और पिछले साल ईवीएम की स्थिति और परिस्थिति भी हमलोगों की तरह ही रही। जिस तरह प्रधान पर हुए गोलीबारी के लिए फुलेरा सहित ओटीटी के दर्शक हम पर और विधायक चंद्र किशोर सिंह पर शक कर रहा है वैसे ही लोक सभा चुनाव 2024 में ईवीएम मशीन पर संदेह नहीं करने वाली विपक्षी पार्टी विभिन्न प्रांतों के विधानसभा चुनावों में मिले हार पर व्यक्तिगत समीक्षा की बजाय ईवीएम के चरित्र पर उंगली उठाती रही। ” दांत और होंठ के बीच फंसे खैनी को जीभ से बाहर निकालते हुए गम्भीरता से भूषण बोला।

हे भैय्या सांसद, विधायक तो हम पंचायत प्रतिनिधियों से भी ज्यादा उत्पात मचाने लगे हैं। सदन के अंदर भी गाली-गलौज तो एक दूसरे पर कभी कुर्सी, कभी जूता फेंक मारते हैं। जाने दीजिए, हमें क्या…हम तो पंचायत में ही खुश हैं,आपस में मन-मुटाव भी है तो साथ हैं।वैसे भी एक हैं तो सेफ हैं, रही बात चुनाव की तो हमारा पंचायत चुनाव ईवीएम की बजाय बैलेट पेपर से ही होने वाला है। चाय सुरकते हुए बिनोद बोला।

बिनोद की बातें सुन भूषण के चेहरे पर रहस्यमयी मुस्कान छा गई। वह चहकते हुए बोला, सही याद दिलाया बिनोद, सांसदों की धक्का-मुक्की, किसानों की हंगामेबाजी,वैश्विक रंगबाजी और नेताओं की नारेबाजी में ही 2024 चला गया और 2025 आ गया। खैर, हमलोगों को अपने पंचायत चुनाव पर भी फोकस करना है। चलो फटाफट चाय खत्म करके पंचायत वासियों को नववर्ष की शुभकामनाएं देने चलते हैं। नववर्ष के बहाने क्षेत्र में लोगों से मिलना-जुलना भी हो जाएगा और वोट बैंक भी तैयार… चाहे जैसे हो,इस वर्ष बिट्टू की मम्मी को प्रयाग महाकुंभ और पंचायत महाकुंभ दोनों में डुबकी लगवा कर फुलेरा का प्रधान बनवाना ही है…”

थोड़ी देर पहले कैलेंडर नववर्ष की शुभकामनाओं पर आपत्ति व्यक्त करने वाले भूषण द्वारा फुलेरा वासी को शुभकामना संदेश ज्ञापित करने की बात सुन कर बिनोद लंबी सांस लेते हुए बोला -” आप न भैया,अब पक्का पालिटिशियन हो गये हैं। इस बार आप प्रधान पति जरूर बनिएगा और हम बनेंगे उप प्रधान।”

इसके बाद भुटकुन की दुकान पर भूषण और बिनोद के चाय कप से ‘सुर्र-सुर्र’ की संयुक्त ध्वनि निकलने लगी।