आधार हाउसिंग फाइनेंस का शानदार तिमाही प्रदर्शन
मुंबई (अनिल बेदाग) : कम आय वर्ग के लिए सुरक्षित और किफायती आवास को सशक्त बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए आधार हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही और नौ महीनों के लिए शानदार वित्तीय नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी ने इस अवधि में प्रबंधन के अंतर्गत परिसंपत्तियों और कर पश्चात लाभ में 20 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक वृद्धि दर्ज की है, जो इसके मजबूत बिज़नेस मॉडल, अनुशासित जोखिम प्रबंधन और बढ़ती किफायती आवास मांग को दर्शाता है।
कंपनी की निरंतर प्रगति ने न केवल चालू वित्त वर्ष के लिए दिए गए एयूएम और लाभ मार्गदर्शन को प्राप्त करने के प्रति प्रबंधन के भरोसे को और पुख्ता किया है, बल्कि कम आय वाले आवास वित्त क्षेत्र में इसकी नेतृत्वकारी स्थिति को भी मजबूत किया है।
20% एयूएम ग्रोथ, मज़बूत बैलेंस शीट
31 दिसंबर, 2025 तक कंपनी का एयूएम सालाना आधार पर 20 प्रतिशत बढ़कर ₹28,790 करोड़ हो गया, जो एक वर्ष पहले ₹23,976 करोड़ था। इसी अवधि में कुल ऋण खातों की संख्या 3.24 लाख से अधिक पहुंच गई, जो कंपनी की व्यापक पहुंच और बढ़ते ग्राहक विश्वास को दर्शाती है।
परिणामों पर टिप्पणी करते हुए आधार हाउसिंग फाइनेंस के एमडी और सीईओ श्री ऋषि आनंद ने कहा, “वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में हमारी मजबूत विकास गति बनी रही है, जिससे कम आय वाले आवास वित्त क्षेत्र में हमारी नेतृत्व स्थिति और सुदृढ़ हुई है। हमारे ‘शहरी और उभरते’ शाखा मॉडल से उल्लेखनीय परिणाम मिल रहे हैं और 621 से अधिक शाखाओं के माध्यम से हम वंचित वर्गों तक अपनी पहुंच लगातार बढ़ा रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि पीएमएवाई 2.0 योजना ने किफायती आवास क्षेत्र में मांग को नया बल दिया है। इस योजना के तहत 10,000 से अधिक ग्राहकों को ब्याज सब्सिडी की पहली किस्त मिल चुकी है, जिससे पहली बार घर खरीदने वालों, विशेषकर ईडब्ल्यूएस और एलआईजी वर्गों के लिए गृहस्वामित्व और अधिक सुलभ हुआ है।
डिजिटल और एआई-फर्स्ट भविष्य की तैयारी
भविष्य की रणनीति पर बात करते हुए कंपनी ने बताया कि वह एआई-आधारित अंडरराइटिंग और डिजिटल-फर्स्ट ऑपरेटिंग मॉडल को पूरे संगठन में लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इससे निर्णय लेने की गति, संचालन दक्षता और जोखिम प्रबंधन में और सुधार होगा।
आधार हाउसिंग फाइनेंस का स्पष्ट फोकस निम्न आय वाले परिवारों को गृहस्वामी बनाने और भारत में सतत वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाने पर बना हुआ है और मौजूदा नतीजे इसी दिशा में मजबूत कदम साबित हो रहे हैं।





