अमेरिका-इज़राइल-ईरान: तृतीय विश्व युद्ध में लिप्त

America-Israel-Iran: Engaged in World War III

प्रो. नीलम महाजन सिंह

अमेरिका व इज़राइल ने ईरान पर हमला क्यों किया और यह युद्ध कब समाप्त होगा? अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू करने के उपरांत 28 फरवरी, 2026 को ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता, अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के साथ, पूरे मध्य पूर्व में संघर्ष जारी हो गया है। ईरान ने इज़राइल व खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमले की जवाबी कार्रवाई जारी रखी है। ये हमले गैर-सैन्य लक्ष्यों तक फैल गए हैं, जिनमें नागरिक स्थल व ऊर्जा संयंत्र शामिल हैं। अमेरिका-इज़राइल ने ईरान पर हमला किया था, जिसमें उन्होंने राजधानी तेहरान व पूरे देश में ईरानी मिसाइल के बुनियादी ढांचे, सैन्य ठिकानों व नेतृत्व को निशाना बनाया है। ईरान के सर्वोच्च नेता, अयातुल्ला अली खामेनेई, जो 1989 से देश का नेतृत्व कर रहे थे, हमलों की पहली लहर के दौरान मार दिए गए। इज़राइली सेना ने बताया कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) के दर्जनों वरिष्ठ अधिकारी मारे गए। खामेनेई की मृत्यु के बाद उनके बेटे, मोजतबा खामेनेई को उनका उत्तराधिकारी नियुक्त किया गया। 13 मार्च को अमेरिकी रक्षा सचिव, पीट हेगसेथ ने कहा कि नए हमलों में मोजतबा खामेनेई “घायल हो गए हैं व संभवतः उनका चेहरा बिगड़ गया है”। उन्होंने इशारा किया कि हाल के हफ्तों में वे सार्वजनिक रूप से देखाई नहीं दिए। तेहरान ने हेगसेथ के दावे को खारिज कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि “नए सर्वोच्च नेता के साथ कोई समस्या नहीं है”। अमेरिका-इज़राइल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े प्रमुख स्थलों को निशाना बनाना जारी रखा है। ईरान ने कहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है। हाल के दिनों में इन दोनों ने ईरानी तेल रिफाइनरियों पर हमले तेज़ किए हैं। अमेरिका ने खर्ग द्वीप पर ध्यान केंद्रित किया, जहाँ एक बड़ा टर्मिनल है जिसे ईरान की ‘आर्थिक जीवनरेखा’ माना जाता है। 14 मार्च को, अमेरिका स्थित समूह ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स इन ईरान’ (HRANA) ने बताया कि ईरान में 3,040 लोग मारे गए हैं, जिनमें 1,122 सैन्यकर्मी व 1,319 नागरिक शामिल हैं, जिनमें 206 बच्चे थे। 599 अन्य मौतें ‘अवर्गीकृत नागरिक व सैन्य’ थीं। 6 मार्च को, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने कहा कि 1,300 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं। ईरान ने अमेरिका-इज़राइल पर 28 फरवरी को दक्षिणी ईरान में आई.आर.जी.एस. बेस के पास एक लड़कियों के स्कूल पर हमला करने का आरोप लगाया और कहा कि लगभग 110 बच्चों सहित 168 लोग मारे गए। अमेरिका ने कहा कि वह इस घटना की जाँच कर रहा है, जबकि इज़राइल ने कहा कि उसे उस इलाके में किसी भी सैन्य अभियान की जानकारी नहीं है। विशेषज्ञों के वीडियो विश्लेषण से पता चलता है कि एक अमेरिकी ‘टॉमहॉक मिसाइल’ स्कूल के पास एक सैन्य अड्डे पर गिरी थी, व बी.बी.सी. की रिपोर्ट ने इसकी पुष्टि की है। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ को अब डेमोक्रेट्स की ओर से अमेरिका की संभावित संलिप्तता को लेकर सवालों का सामना करना पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों के लिए ईरान में पहुँच सीमित है व देश में इंटरनेट कनेक्टिविटी पूरी तरह से प्रतिबंधित है। अपने क्षेत्र के बाहर, 4 मार्च को श्रीलंका के तट के पास हिंद महासागर में एक अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा, एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया गया था। इसमें कम से कम 87 लोग मारे गए थे। ईरानी स्कूल के पास मौजूद मिलिट्री बेस पर मिसाइल गिरी। वीडियो एनालिसिस से पता चला कि ‘रात दिन में बदल गई।’ तेहरान की तेल सुविधाओं पर हवाई हमलों की वजह से ‘काली बारिश’ हो रही है। ईरान ने इज़रायल के हमलों को “बिना किसी उकसावे के, गैर-कानूनी व नाजायज़” बताया है व इसके जवाब में बड़े पैमाने पर मिसाइल हमले किए हैं। 15 मार्च तक, इज़रायली अधिकारियों ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से मिसाइल हमलों में 12 नागरिक मारे गए हैं। जिन देशों में भी हमले हुए हैं वहां अमेरिकी मिलिट्री बेस हैं, कतर, बहरीन, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) व कुवैत। 14 मार्च तक, अमरीकन सेना के 13 जवान मारे जा चुके थे। ईरान पर आरोप है कि उसने अपने हमलों का दायरा दूसरे लक्ष्यों तक बढ़ा दिया है, जिनमें तेल सुविधाएँ, जहाज़ व आम नागरिकों से जुड़े स्थान हैं, जैसे दुबई के होटल शामिल हैं। उत्तरी इराक में एक कुर्द मिलिट्री बेस पर ड्रोन हमले में एक फ्रांसीसी सैनिक मारा गया। इराक में ही, ‘पॉपुलर मोबिलाइज़ेशन फोर्सेज’ (PMF), जिसे पिछले दशक में ‘इस्लामिक स्टेट समूह’ से लड़ने के लिए बनाया गया था, बताया कि उसके 27 सदस्य मारे गए हैं। ईरान-इराक में इस्लामिक प्रतिरोध’ (IRI) के बैनर तले काम करने वाले मिलिशिया, आतंकी (Milita) समूहों का समर्थन करता है, जो ‘पीएमएफ’ का हिस्सा हैं। तुर्कीये ने बताया कि नाटो (NATO) की हवाई सुरक्षा प्रणाली ने उसके हवाई क्षेत्र में घुसे तीन ईरानी मिसाइलों को मार गिराया है। अज़रबैजान ने ईरान पर ड्रोन से एक हवाई अड्डे पर हमला करने का आरोप लगाया है। अमेरिका व उसके अरब सहयोगियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर ईरान के हमलों की निंदा की, “आम नागरिकों व उन देशों को निशाना बनाना जो युद्ध में शामिल नहीं हैं, एक गैर-ज़िम्मेदाराना, अस्थिरता पैदा करने वाला रवैया है।” 14 मार्च को राष्ट्रपति डाॅनल्ड ट्रंप ने कहा कि तेहरान एक डील करना चाहता है, जिसकी शर्तें स्वीकार नहीं हैं। युद्ध अर्थव्यवस्था व ऊर्जा की कीमतों को कैसे प्रभावित कर रहा है? मध्यपूर्व में अस्थिरता का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पूर्ण विश्व पर पड़ने लगा है। ईरान पर, खाड़ी के जहाजों पर हमला करने का आरोप लगा है, जिससे ‘होर्मुज जल-डमरू-मध्य’ (Strait of Hormuz) को प्रभावी रूप से बंद करने की नौबत आ गई है। यह एक अहम रास्ता है जिससे दुनिया की लगभग 20% तेल और गैस की आपूर्ति होती है। ओमान के दुक्म कमर्शियल बंदरगाह व एमिरात के फुजैराह टर्मिनल सहित प्रमुख तेल व गैस केंद्रों पर हमलों की खबरें आ रही है। लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) सुविधाएं, तेल व गैस की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था व जीवन-यापन की लागत पर पड़ने वाले असर के बारे में चेतावनियां जारी की गई हैं। 12 मार्च को इराक के ‘उम कासर बंदरगाह’ के पास दो विदेशी ईंधन टैंकरों पर धमाके होने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। ‘होर्मुज जल-डमरू-मध्य’; ईरान के वैश्विक तेल मार्ग को बंद कर दे तो क्या होगा? डाॅनल्ड ट्रंप ने कहा कि उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना था कि ईरान “बहुत लंबे समय तक अमेरिका-इज़राइल या किसी भी अमेरिकी सहयोगी को निशाना बनाने वाले हथियार विकसित न करे। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने संकेत दिया है कि यह युद्ध छह हफ़्तों तक चल सकता है। इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने युद्ध की शुरुआत में कहा था, “यह अभियान तब तक ज़रूरी रहेगा, जब तक ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोका जाएगा”। बड़े तेल व गैस उत्पादकों को उत्पादन रोकना पड़ा है, जिनमें कतार की लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) सुविधाएं व सऊदी अरब की घरेलू रिफाइनरी शामिल हैं। होर्मुज जल-डमरू-मध्य; को यदि ईरान वैश्विक तेल मार्ग को बंद कर दे तो क्या होगा? अंततः यह कहा जा सकता है, कि यह युद्ध अंतर्राष्ट्रीय हो गया है और इसे तृतीय विश्व युद्ध के रूप में देखा गया है। एक ओर विश्व को ‘ग्लोबल विलेज व वासुदेव कुटुम्बकम’ का आह्वान है व दूसरी ओर अमेरिका-इज़राइल, दूसरे देशों के प्राकृतिक संसाधनों को हड़पना चाहते हैं। किसी भी प्रकार से युद्ध समाप्त होना अनिवार्य है। सभी देशों को नागरिक सुरक्षा व अपने देश को अन्य देशों से बचाने का प्रयास करना चाहिए।

प्रो. नीलम महाजन सिंह (वरिष्ठ पत्रकार, अंतर्राष्ट्रीय सामयिक विशेषज्ञ, दूरदर्शन व्यक्तित्व व सालिसिटर फाॅर ह्यूमन राइट्स संरक्षण)