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दीपक कुमार त्यागी
नीतिगत, सामरिक, आर्थिक, विकास, प्राकृतिक, जनसंख्या आदि के दृष्टिकोण से देश की राजधानी दिल्ली बेहद अहम है। लेकिन चिंता की बात यह है कि दिल्ली के पास अपने सीमित संसाधन हैं। दिल्ली में आबादी की सीमित जमीन है, विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण करने के खाली जमीन सीमित मात्रा में उपलब्ध है। जमीन की कमी के चलते दिल्ली के पास प्राकृतिक संसाधनों की भारी कमी है। दिल्ली के पास ना तो सांस लेने के लिए अपनी स्वच्छ हवा है, ना पीने के लिए अपना स्वच्छ पानी व दूध है, ना ही खाने के लिए अपनी फल, सब्जी व अन्न है और सबसे बड़ी समस्या है कि बहुत तेजी से बढ़ती जनसंख्या को बसाने के लिए दिल्ली के पास अपनी जमीन भी उपलब्ध नहीं है। रोज़मर्रा की जरूरत को पूरा करने के लिए दिल्ली राज्य को अपने आसपास के राज्यों पर पूरी तरह से निर्भर रहना पड़ता है। ऐसी स्थिति में कर्ताधर्ताओं के सामने यह बहुत बड़ी चुनौती है कि सामरिक, आर्थिक, नीतिगत फैसले लेने वाली ताकतवर सत्ता का मुख्य केंद्र दिल्ली को कैसे पूरी तरह से सुरक्षित रखते हुए विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ अत्याधुनिक सुविधाओं व कम से कम कुछ प्राकृतिक संसाधनों से युक्त विश्वस्तरीय विकसित दिल्ली बनाया जाए।
देश का दिल दिल्ली की पहचान दुनिया भर में भारत की राजधानी के रूप में होती है, जो एक केंद्र शासित प्रदेश के रूप में चलती है, जहां पर कुछ शक्तियां राज्य सरकार व कुछ शक्तियां केंद्र की सरकार के पास होती है। केंद्र व राज्य दोनों के बेहतर सामंजस्य से ही दिल्ली का शासन बेहतर ढंग से चल सकता है। देश की राजधानी होने के चलते दिल्ली में ही भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य व अन्य न्यायाधीश, सेनाध्यक्ष, केंद्रीय कैबिनेट, दिल्ली के उप राज्यपाल, मुख्यमंत्री आदि बहुत सारे देश के महत्वपूर्ण पदों पर आसीन लोग रहते हैं, राजधानी होने के चलते दिल्ली में राजकीय व अधिकांश केंद्रीय कार्यालय भी है। रोजी-रोटी, शिक्षा चिकित्सा व देश की सबसे ताकतवर सत्ता का मुख्य केंद्र बिंदु होने के चलते ही देश की आज़ादी के बाद से ही दिल्ली की जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हुई थी। दिल्ली में तेजी से बढ़ती आबादी की समस्याओं के समाधान करने के उद्देश्य के लिए वर्ष 1962 में बने दिल्ली के पहले ही मास्टर प्लान में यह सिफारिश की गई थी कि दिल्ली के साथ-साथ इसके आसपास के राज्यों के शहरों को भी एक उप महानगरीय क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाए। जिस परिकल्पना को धरातल पर मूर्त रूप देने के लिए वर्ष 1985 में नेशनल केपिटल रिजन प्लानिंग बोर्ड की शुरुआत की गई थी। जिससे इस पूरे क्षेत्र में व्यवस्थित विकास के लिए कार्य योजना बना करके उसका धरातल पर कार्यान्वयन किया जा सकें और एनसीआर क्षेत्र में शामिल किसी भी क्षेत्र का विकास अव्यवस्थित ढंग से होने से रोका जा सकें।
दिल्ली को बेहतर बनाने के लिए ही वर्ष 1985 में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान के कुछ जनपदों को मिलाकर के दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र तो घोषित कर दिया गया था, लेकिन चार राज्यों व केंद्र की सरकारों के बीच का मामला होने के चलते उस वक्त की गयी पूरी प्लानिंग आज तक भी धरातल पर पूरी तरह से परवान नहीं चढ़ पाई है। जिसका बड़ा खामियाजा दिल्ली व एनसीआर की जनता लगातार भुगत रही है। सिस्टम को सर्वोच्च न्यायालय की बार-बार फटकार लगने के बावजूद भी दिल्ली व एनसीआर के निवासी स्वच्छ पेयजल व स्वच्छ सांसों तक के लिए तरस गये है। आज खराब पानी व प्रदूषित वायु के चलते दिल्ली एनसीआर क्षेत्र के बड़ी संख्या में पेट, लीवर व फेफड़ों से संबंधित रोगी आसानी से मिल जाते हैं।
हालांकि हम भारतवासियों की यह खूबी है कि हम विपरीत से विपरीत स्थिति में भी उम्मीद की लो जलाकर रखते हैं। जिसके चलते ही आज भी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा व राजस्थान के एनसीआर क्षेत्र के निवासियों का सपना है कि उनको भी एक दिन दिल्ली की तरह ही उच्च गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा, बेहतरीन चिकित्सा, विश्वस्तरीय अत्याधुनिक सुविधाएं, रोजी-रोटी, व्यापार करने का अवसर मिलेंगे, जिस उद्देश्य को पूरा करने के लिए केंद्र शासित दिल्ली राज्य में कभी एनसीआर के क्षेत्र को जोड़ा गया था, लेकिन अफसोस वह आज तक भी अपने लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाया। जिसके चलते ही अब एनसीआर क्षेत्र के एक बहुत बड़े वर्ग का मानना है कि देश का दिल दिल्ली राज्य अपनी सीमाओं का विस्तार करते हुए भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए कार्य करें। लेकिन देश में आये दिन क्षणिक स्वार्थों से पूर्ण राजनीति होने के चलते कभी भी देशहित की इस दूरगामी रणनीति पर किसी भी राजनीतिक दल ने कोई विशेष रणनीति बनाकर कार्य नहीं किया है।
लेकिन जब से दिल्ली में भाजपा की सरकार बनी है, तब से बहुत सारे लोगों के मन में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की जगह अब बृहद दिल्ली राज्य के निर्माण विचार आने लगा है। क्योंकि फिलहाल केंद्र सरकार के साथ-साथ दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा व राजस्थान में एक ही दल भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार है और सबसे बड़ी बात यह है कि उस राजनीतिक दल के सर्वेसर्वा नरेन्द्र मोदी के पास राजनीति से ऊपर उठकर के देश के नव निर्माण करते हुए, भारत को विश्वगुरु बनाने का जज्बा मौजूद है। लोगों को लगता है कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बृहद दिल्ली या राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) अंतरराज्यीय क्षेत्रीय योजना और अत्याधुनिक विकास का एक अद्वितीय उदाहरण बन सकता है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के कुछ जनपदों को मिलाकर बनने वाले लगभग 55,083 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल का विश्वस्तरीय विकास हो सकता है।
यहां आपको बता दें कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के कई महत्वपूर्ण शहर भी शामिल हैं। एनसीआर के क्षेत्र का आज भी दिल्ली से कई सौ किलोमीटर तक विस्तार है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र,1985 के नियोजन बोर्ड के कानून के अनुसार, इस अधिसूचित क्षेत्र में दिल्ली का 1,483 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्रफल आता है। वहीं उत्तर प्रदेश के मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, बुलन्दशहर, हापुड, बागपत, शामली और मुजफ्फरनगर जनपद का 14,826 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल आता है। वहीं हरियाणा के फरीदाबाद, गुरुग्राम, नूँह, रोहतक, सोनीपत, रिवाडी, झज्जर, पानीपत, पलवल, भिवानी, चरखी दादरी, महेन्द्रगढ, जींद और करनाल का 25,327 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल आता है। राजस्थान के अलवर और भरतपुर का 13,447 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल आता है। जिस क्षेत्र को कुछ कम करते हुए भी बृहद दिल्ली राज्य का निर्माण अब इन राज्यों की सहमति से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व आसानी से किया जा सकता है।
वैसे भी देखा जाये तो उस वक्त देश के नीति-निर्माताओं का एनसीआर क्षेत्र बनाने के पीछे मकसद था कि दिल्ली के स्थाई निवासियों के साथ-साथ दिल्ली में आजीविका की तलाश में आ रहे देश के अन्य राज्यों के लोगों को रोजी-रोटी, घर, पानी, बिजली, शिक्षा, चिकित्सा, बेहतर कनेक्टिविटी के साथ सार्वजनिक परिवहन जैसी बुनियादों सुविधाओं की कमी का सामना ना करना पड़े। जिसके चलते ही एनसीआर में शामिल होने वाले अन्य राज्यों के कुछ जिलों का विकास राज्य के अन्य जिलों के मुकाबले बहुत तेजी से हुआ। यहां पर लोगों को रोजी-रोटी, घर, बिजली, पानी के साथ-साथ बेहतर प्राथमिक व उच्च शिक्षा, चिकित्सा सुविधा, आधुनिक बस, मेट्रो व रेपिड रेल जैसी विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी की सुविधाएं मिलने से लोगो के रहन-सहन व जीवन स्तर में काफी सुधार हुआ है। लेकिन एनसीआर के गठन के समय के बहुत सारे उद्देश्य अब भी बाकी है, समय-समय पर राज्यों की आपसी खींचतान के चलते इस पूरे क्षेत्र में काम करने की बहुत गुंजाइश बाकी है। वैसे भी यह पूरा क्षेत्र ऐसा है कि अगर इस क्षेत्र में विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण हो, कानून व्यवस्था बेहतर हो, कल-कारखाने लगें हो, क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रित हो, नदियां स्वच्छ हो, भूजल रिचार्ज करने का कार्य हो, हरित पट्टी व वन्य क्षेत्र विकसित हो, भूकंप रोधी अत्याधुनिक भवनों व इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण हो, विश्वस्तरीय सार्वजनिक परिवहन तंत्र जाल बिछा हुआ हो, शिक्षा, चिकित्सा, रोजी-रोटी की भरमार हो, पूरा क्षेत्र सामरिक दृष्टिकोण से हर वक्त तैयार हो, आर्थिक दृष्टिकोण से मजबूत हो, तो उसका जबरदस्त सकारात्मक प्रभाव पूरे देश की जीडीपी पर पड़ेगा, देश सामरिक रूप से मजबूत होगा। इसलिए बृहद दिल्ली का निर्माण या एनसीआर के पूरे क्षेत्र का नव निर्माण करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास यह शानदार अवसर है।